यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर किए गए ताजा मिसाइल और ड्रोन हमलों ने मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ा दिया है। हमलों में कम से कम 73 लोगों के घायल होने की खबर है। इसके बाद पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ अपने रक्षा समझौते का हवाला देते हुए संकेत दिया है कि यदि यमन का संघर्ष सऊदी क्षेत्र तक फैलता रहा तो सामूहिक रक्षा समझौते के प्रावधान सक्रिय हो सकते हैं।
पाकिस्तान ने इसके साथ ही ईरान से हूतियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने और सऊदी अरब के खिलाफ हमलों को रोकने के लिए कहा है। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुआ मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट किसी एक सदस्य पर हमले को तीनों देशों के खिलाफ हमला मानने की व्यवस्था करता है।
सऊदी अरब में तेल सुविधाओं और सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना
हूतियों ने 8 सितंबर को दक्षिणी सऊदी अरब के कई इलाकों में मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन हमलों में अबहा, जाजान, नजरान और खमीस मुशैत जैसे शहर प्रभावित हुए। तेल और ऊर्जा से जुड़े प्रतिष्ठानों के साथ सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।
सऊदी अधिकारियों के मुताबिक इन हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 73 लोग घायल हुए। कुछ तेल प्रतिष्ठानों में आग लगने की भी खबर सामने आई।
इसके बाद सऊदी समर्थित गठबंधन की ओर से यमन में हूती ठिकानों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की गई। दोनों पक्षों के बीच लगातार बढ़ते हमलों से 2022 के बाद बनी अपेक्षाकृत शांत स्थिति पर भी खतरा मंडराने लगा है।
पाकिस्तान ने क्यों दी ईरान को चेतावनी?
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि यदि यमन का संघर्ष सऊदी अरब की सीमा के भीतर फैलता है या किसी सदस्य देश के खिलाफ सीधा हमला होता है तो मक्का डिफेंस एग्रीमेंट लागू हो सकता है।
समझौते के मुताबिक पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये में से किसी एक पर हमला तीनों के खिलाफ हमला माना जाएगा। पाकिस्तान ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर वह समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करेगा।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान ने सऊदी अरब का संदेश ईरान तक पहुंचाते हुए तेहरान से हूतियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने को कहा है, ताकि संघर्ष और बड़े क्षेत्रीय युद्ध में न बदले।
हूतियों की नजर मोचा और बाब-अल-मंदेब पर?
यमन में एक और महत्वपूर्ण मोर्चा लाल सागर के करीब खुलता दिखाई दे रहा है। हूती लड़ाके पश्चिमी यमन में आगे बढ़ते हुए रणनीतिक बंदरगाह शहर मोचा (Mokha) की दिशा में दबाव बना रहे हैं।
हालांकि मौजूदा विश्वसनीय रिपोर्टों में मोचा पर हूतियों के पूर्ण कब्जे की पुष्टि नहीं हुई है। इसके विपरीत, यमन की सरकार समर्थक सेनाओं ने मोचा और बाब-अल-मंदेब के आसपास अतिरिक्त सैनिक भेजे हैं।
मोचा की अहमियत इसलिए बहुत ज्यादा है क्योंकि यह बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास स्थित है।
बाब-अल-मंदेब पर बढ़ा खतरा क्यों है गंभीर?
बाब-अल-मंदेब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है।
इस क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय मालवाहक जहाजों, तेल टैंकरों और वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है। हूतियों की पश्चिमी यमन में बढ़ती सैन्य गतिविधि इसलिए केवल यमन का आंतरिक मामला नहीं रह जाती, बल्कि इसका असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा बाजार तक पहुंच सकता है।
हूती हमलों के बाद तेल की कीमतों पर भी असर देखा गया और ब्रेंट क्रूड छह सप्ताह के उच्च स्तर तक पहुंच गया।
ईरान पर क्यों टिकी हैं सबकी निगाहें?
हूती विद्रोहियों को लंबे समय से ईरान समर्थित समूह माना जाता है। इसी कारण पाकिस्तान ने इस मामले में सीधे ईरान से संपर्क कर हूतियों पर प्रभाव इस्तेमाल करने का आग्रह किया है।
पाकिस्तान की चुनौती यह भी है कि एक तरफ उसके सऊदी अरब और तुर्किये के साथ रक्षा संबंध हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान उसका पड़ोसी देश है। ऐसे में पाकिस्तान किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध में सीधे शामिल होने से बचते हुए सऊदी सुरक्षा प्रतिबद्धताओं और ईरान के साथ संबंधों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
क्या मिडिल ईस्ट में खुल सकता है नया युद्ध मोर्चा?
सऊदी अरब पर हूती हमले, यमन में जवाबी सैन्य कार्रवाई, मोचा और बाब-अल-मंदेब के आसपास तेज होती लड़ाई तथा पाकिस्तान की ओर से मक्का डिफेंस पैक्ट का जिक्र—ये सभी घटनाक्रम संकेत देते हैं कि क्षेत्रीय तनाव तेजी से गंभीर होता जा रहा है।
अब सबसे अहम सवाल यह है कि क्या हूती सऊदी अरब पर हमले जारी रखते हैं और ऐसी स्थिति में पाकिस्तान-सऊदी अरब-तुर्किये रक्षा समझौता वास्तव में सक्रिय सैन्य भूमिका तक पहुंचता है या कूटनीतिक दबाव तक सीमित रहता है।
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