ब्रिटेन और इजरायल के बीच कूटनीतिक तनाव तेजी से बढ़ गया है। गाजा युद्ध और वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों को लेकर लंबे समय से जारी मतभेद अब व्यापार प्रतिबंध, सांसदों की एंट्री रोकने और राजनयिक गतिविधियों पर कार्रवाई तक पहुंच गए हैं। ब्रिटेन ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों से जुड़े सामान और आर्थिक गतिविधियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने का ऐलान किया है। इसके जवाब में इजरायल ने भी ब्रिटेन के खिलाफ कई जवाबी फैसले लिए हैं।
वेस्ट बैंक की इजरायली बस्तियों के खिलाफ ब्रिटेन का बड़ा फैसला
ब्रिटिश सरकार ने 8 सितंबर 2026 को वेस्ट बैंक की इजरायली बस्तियों से आने वाले सामान के आयात को प्रतिबंधित करने और ऐसी बस्तियों से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों के खिलाफ नए अधिकार लाने की घोषणा की। ब्रिटेन का कहना है कि बस्तियों का लगातार विस्तार और बढ़ती हिंसा भविष्य में व्यवहार्य फलस्तीनी राज्य तथा टू-स्टेट सॉल्यूशन की संभावना को कमजोर कर रही है।
ब्रिटेन का प्रतिबंध पूरे इजरायल के साथ व्यापार पर लागू नहीं है। इसका मुख्य निशाना कब्जे वाले वेस्ट बैंक में स्थित इजरायली बस्तियों से होने वाला व्यापार और ऐसी गतिविधियां हैं जो इन बस्तियों को आर्थिक सहायता देती हैं। ब्रिटिश सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह इजरायल की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर सामान्य व्यापार और बस्तियों से जुड़े व्यापार में अंतर करती है।
इजरायल का पलटवार, 11 ब्रिटिश सांसदों की एंट्री बैन
ब्रिटेन के फैसले के तुरंत बाद इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने जवाबी कदमों का ऐलान किया। इजरायल ने 11 ब्रिटिश सांसदों और एक अन्य ब्रिटिश नागरिक की देश में एंट्री पर रोक लगा दी। प्रतिबंधित सांसदों में पूर्व लेबर नेता जेरेमी कॉर्बिन समेत विभिन्न ब्रिटिश राजनीतिक दलों के नेता शामिल हैं। इजरायली विदेश मंत्रालय ने प्रतिबंध का कारण कथित तौर पर ‘यहूदी-विरोधी और इजरायल-विरोधी गतिविधियों’ को बताया है।
इजरायल की कार्रवाई केवल एंट्री बैन तक सीमित नहीं है। उसने पूर्वी यरूशलम में स्थित ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास को बंद करने का आदेश दिया है। 9 सितंबर की नवीनतम रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन को इसे बंद करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है। यह कॉन्सुलेट फलस्तीनी क्षेत्रों से जुड़े राजनीतिक, कांसुलर और सहायता संबंधी मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
गाजा सेंटर से भी हटेंगे ब्रिटिश प्रतिनिधि
इजरायल ने ब्रिटिश अधिकारियों को गाजा से संबंधित सिविल-मिलिट्री कोऑर्डिनेशन सेंटर से हटाने का भी फैसला किया है। इसके अलावा वेस्ट बैंक के रामल्ला में फलस्तीनी प्राधिकरण के सुरक्षाबलों को ब्रिटेन द्वारा दी जा रही ट्रेनिंग को समाप्त करने की घोषणा की गई है। इन कदमों से दोनों देशों के बीच सुरक्षा और राजनयिक सहयोग भी प्रभावित होने की आशंका है।
‘हमें अपने फैसले पर गर्व है’- एड मिलिबैंड
ब्रिटेन के विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने इजरायल के जवाबी फैसलों पर निराशा जताई, लेकिन ब्रिटिश सरकार की कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने कहा कि उन्हें इजरायली सरकार के फैसले पर अफसोस है, लेकिन ब्रिटेन ने जो कदम उठाया वह सही था और सरकार को उस पर गर्व है। मिलिबैंड ने यह भी स्वीकार किया कि इजरायल की जवाबी कार्रवाई से नुकसान होगा, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने निर्णय लेने से पहले इसके फायदे और नुकसान दोनों पर विचार किया था।
ब्रिटेन का तर्क है कि बस्तियों का विस्तार टू-स्टेट सॉल्यूशन के लिए गंभीर खतरा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
फ्रांस और कनाडा भी ब्रिटेन के साथ
ब्रिटेन अकेला देश नहीं है जिसने इजरायली बस्तियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। फ्रांस और कनाडा ने भी वेस्ट बैंक की बस्तियों से जुड़े व्यापार के खिलाफ कदम उठाने की दिशा में ब्रिटेन का साथ दिया है। कई अन्य देशों ने भी संयुक्त रूप से बस्तियों के विस्तार और सेटलर हिंसा पर चिंता जताई है।
इन देशों का कहना है कि वेस्ट बैंक में लगातार नई बस्तियां बनने से क्षेत्र की भौगोलिक संरचना ऐसी हो सकती है कि भविष्य में स्वतंत्र और व्यवहार्य फलस्तीनी राज्य बनाना कठिन हो जाए।
इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने ब्रिटेन पर साधा निशाना
इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने ब्रिटेन के प्रतिबंधों की तीखी आलोचना की है। उन्होंने ब्रिटिश कदमों को इजरायल की संप्रभुता और उसकी आंतरिक राजनीतिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप बताया। सार का कहना है कि ब्रिटेन की कार्रवाई अनुचित है और इजरायल उसके खिलाफ जवाबी कदम उठाता रहेगा।
वहीं ब्रिटेन का कहना है कि उसकी कार्रवाई इजरायली जनता या इजरायल के अस्तित्व के खिलाफ नहीं, बल्कि वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार और उससे जुड़ी गतिविधियों को लेकर है।
UK-Israel संबंधों में बढ़ी कड़वाहट
वेस्ट बैंक का मुद्दा अब ब्रिटेन और इजरायल के संबंधों में गंभीर कूटनीतिक विवाद बन गया है। व्यापार प्रतिबंध के जवाब में सांसदों की एंट्री रोकना, कॉन्सुलेट बंद करने का आदेश, सुरक्षा प्रशिक्षण खत्म करना और गाजा समन्वय केंद्र से ब्रिटिश अधिकारियों को हटाना बताता है कि दोनों देशों के रिश्तों में तनाव सामान्य राजनीतिक बयानबाजी से काफी आगे बढ़ चुका है।
आने वाले दिनों में सबसे बड़ी नजर इस बात पर रहेगी कि ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा के कदमों का बाकी यूरोपीय देश किस हद तक अनुसरण करते हैं और क्या इजरायल इनके खिलाफ भी इसी तरह की जवाबी कार्रवाई करता है।
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