प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता खत्म हो गई है। करीब 45 मिनट चली इस अहम बैठक में भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी, व्यापार, औद्योगिक सहयोग, ऊर्जा, न्यूक्लियर सेक्टर, रक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स और फर्टिलाइजर समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा हुई।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। BRICS Summit 2026 से इतर हुई मोदी-पुतिन बैठक पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजरें टिकी हुई हैं।
#WATCH | BRICS Summit 2026 | Delhi: After their bilateral meeting, Prime Minister Narendra Modi and Russian President Vladimir Putin share a car to head to the exhibition at Bharat Mandapam.
Leaders' Session of BRICS Business Forum will be held here shortly.
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— ANI (@ANI) September 11, 2026
2030 तक 100 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
सूत्रों के मुताबिक मोदी-पुतिन वार्ता के प्रमुख आर्थिक मुद्दों में भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य शामिल रहा।
भारत और रूस के बीच पिछले कुछ वर्षों में व्यापारिक संबंधों में तेजी आई है, खासकर ऊर्जा क्षेत्र में। अब दोनों देश व्यापार का दायरा बढ़ाकर औद्योगिक उत्पाद, इंजीनियरिंग, स्टील, इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग को मजबूत करना चाहते हैं।
INNOPROM के जरिए औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर जोर
बैठक के संभावित एजेंडे में भारत में INNOPROM के जरिए रूस के साथ औद्योगिक सहयोग बढ़ाने का मुद्दा भी शामिल रहा।
इसके तहत दोनों देश मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी, मशीनरी, इंजीनियरिंग और संयुक्त उत्पादन परियोजनाओं में नए अवसर तलाश सकते हैं। दोनों पक्ष अधिक B2B यानी बिजनेस-टू-बिजनेस संपर्क बढ़ाने और निजी कंपनियों के बीच साझेदारी को मजबूत करने पर भी जोर दे रहे हैं।
#WATCH | Delhi: Prime Minister Narendra Modi and Russian President Vladimir Putin visit the INNOPROM Exhibition at Bharat Mandapam.
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रेल और टनलिंग सेक्टर में सहयोग
भारत और रूस रेल इंफ्रास्ट्रक्चर और टनलिंग के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। बड़े रेल प्रोजेक्ट्स, सुरंग निर्माण और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तकनीकों में रूसी विशेषज्ञता का इस्तेमाल भारत में किया जा सकता है।
बैठक में इस बात पर भी चर्चा संभावित रही कि दोनों देशों की कंपनियों को एक-दूसरे के बाजारों में अधिक अवसर कैसे दिए जाएं।
स्टील वैल्यू चेन के विकास पर भी चर्चा
भारत-रूस आर्थिक सहयोग के एजेंडे में स्टील वैल्यू चेन को मजबूत करना भी प्रमुख मुद्दा रहा।
भारत स्टील उत्पादन और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के लिए कच्चे माल तथा आधुनिक तकनीकों के नए स्रोत तलाश रहा है। रूस इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण साझेदार बन सकता है।
इसके साथ ही भारतीय कंपनियों के लिए रूसी बाजार तक बेहतर पहुंच और व्यापार से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर भी चर्चा होने की संभावना है।
सिविल न्यूक्लियर सहयोग को और मजबूत करने पर फोकस
दोनों नेताओं की बातचीत में सिविल न्यूक्लियर सहयोग भी महत्वपूर्ण विषय रहा।
सूत्रों के मुताबिक न्यूक्लियर फ्यूल साइकिल, रिएक्टर लाइफ साइकिल सपोर्ट और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा संभावित थी।
भारत और रूस के बीच परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में पहले से मजबूत सहयोग है और दोनों देश इसे भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से और व्यापक बनाना चाहते हैं।
#WATCH | Delhi: Prime Minister Narendra Modi and Russian President Vladimir Putin hold a bilateral meeting on the sidelines of BRICS Summit 2026.
(Video Source: DD News) pic.twitter.com/KhlCIatMI2
— ANI (@ANI) September 11, 2026
क्रिटिकल मिनरल्स में साझेदारी की तैयारी
बैठक के संभावित एजेंडे में क्रिटिकल मिनरल्स यानी महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग भी शामिल रहा।
इलेक्ट्रिक व्हीकल, सेमीकंडक्टर, बैटरी, रक्षा उद्योग और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के लिए क्रिटिकल मिनरल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में भारत रूस के साथ इस क्षेत्र में दीर्घकालिक सप्लाई और निवेश सहयोग की संभावनाएं तलाश रहा है।
रूस में भारतीय कुशल श्रमिकों की संख्या बढ़ाने पर चर्चा
मोबिलिटी और मानव संसाधन सहयोग भी बैठक के अहम मुद्दों में शामिल रहा।
रूस में विभिन्न क्षेत्रों में कुशल श्रमिकों की मांग को देखते हुए भारत से अधिक स्किल्ड वर्कर्स भेजने के विकल्पों पर चर्चा संभावित है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को भी मजबूती मिल सकती है।
फर्टिलाइजर सेक्टर में रणनीतिक JV की संभावना
भारत और रूस फर्टिलाइजर क्षेत्र में भी दीर्घकालिक सहयोग बनाए रखना चाहते हैं।
दोनों देशों के बीच रणनीतिक जॉइंट वेंचर प्रोजेक्ट्स के जरिए फर्टिलाइजर उत्पादन और सप्लाई को मजबूत करने पर चर्चा होने की संभावना है। भारत के लिए खाद्य सुरक्षा और कृषि उत्पादन के लिहाज से फर्टिलाइजर की स्थिर आपूर्ति बेहद महत्वपूर्ण है।
रक्षा सहयोग भी रहा अहम एजेंडा
भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग इस बैठक का प्रमुख रणनीतिक मुद्दा रहा।
दोनों देशों के बीच कई रक्षा परियोजनाएं पहले से चल रही हैं। बैठक में मौजूदा परियोजनाओं की प्रगति, संयुक्त उत्पादन, तकनीकी सहयोग और भविष्य की संभावित रक्षा परियोजनाओं पर चर्चा होने की संभावना है।
भारत लंबे समय से रूस को अपने प्रमुख रक्षा साझेदारों में गिनता रहा है, हालांकि हाल के वर्षों में नई दिल्ली ने रक्षा खरीद में विविधता भी बढ़ाई है।
यूक्रेन संघर्ष पर भी हुई चर्चा की संभावना
रूसी सरकार के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पुतिन की भारत यात्रा से पहले कहा था कि दोनों नेता भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ दुनिया के सामने मौजूद महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी बातचीत करेंगे।
पेस्कोव के मुताबिक राष्ट्रपति पुतिन प्रधानमंत्री मोदी को रूस-यूक्रेन संघर्ष की मौजूदा स्थिति की जानकारी भी देंगे।
भारत लगातार रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति का समर्थन करता रहा है।
BRICS Summit 2026 के बीच हुई अहम बैठक
मोदी-पुतिन की यह बैठक BRICS Summit 2026 के बीच हुई है। वर्ष 2026 में BRICS की अध्यक्षता भारत के पास है और नई दिल्ली 12-13 सितंबर को 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रही है।
सम्मेलन में सदस्य देशों के अलावा पार्टनर देशों और विशेष आमंत्रित देशों के नेता भी भाग ले रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, BRICS Summit के दौरान सदस्य देश आपसी सहयोग मजबूत करने, साझा प्राथमिकताओं पर आगे बढ़ने और वैश्विक तथा क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार साझा करने पर जोर देंगे।
संयुक्त बयान पर टिकी नजर
मोदी-पुतिन वार्ता के बाद अब सबसे ज्यादा नजर संभावित संयुक्त बयान पर है।
संयुक्त बयान से यह साफ होगा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, न्यूक्लियर सहयोग, ऊर्जा, फर्टिलाइजर, क्रिटिकल मिनरल्स और औद्योगिक साझेदारी को लेकर किन मुद्दों पर ठोस सहमति बनी है। यह बैठक भारत-रूस संबंधों की भविष्य की दिशा तय करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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