नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछे गए सवाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है, जहां एक वर्ग इसे प्रेस की स्वतंत्रता का हिस्सा बता रहा है, वहीं दूसरे वर्ग का आरोप है कि यह सवाल पूर्वाग्रह और एजेंडे से प्रेरित था।
यह घटना मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे के ओस्लो दौरे के दौरान हुई, जहां एक आधिकारिक कार्यक्रम में दोनों देशों के बीच समझौतों को लेकर जानकारी दी जा रही थी। आमतौर पर ऐसे कार्यक्रमों में सवाल-जवाब का सत्र नहीं होता, लेकिन इसी दौरान पत्रकार हेले लिंग ने सवाल पूछकर ध्यान आकर्षित किया।
To kvinner, som bor 40 minutter fra hverandre her i Nord-Carolina, mistet hvert sitt familiemedlem 23. august 2022.
– De fleste 22-åringer dør jo ikke av en linje kokain, sier moren til Alaina Love.
Les saken her: https://t.co/RC1zYIPWzx
— Helle Lyng (@HelleLyngSvends) April 10, 2024
हेले लिंग, जो नॉर्वे के अखबार ‘डाग्सएविसन’ से जुड़ी हैं, ने अपने सवाल में वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस इंडेक्स में नॉर्वे पहले स्थान पर है, जबकि भारत 157वें स्थान पर है। उनके इस सवाल के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
आलोचकों का कहना है कि कुछ पश्चिमी मीडिया संस्थान भारत से जुड़े मुद्दों को लेकर पहले से तय नैरेटिव के साथ काम करते हैं। वहीं, कुछ लोगों ने इस घटना को लोकतंत्र में पत्रकारों के सवाल पूछने के अधिकार के रूप में देखा है।
पत्रकार ने दी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद हेले लिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सफाई देते हुए कहा कि वह किसी भी तरह की “विदेशी जासूस” नहीं हैं और उनका काम केवल पत्रकारिता करना है।
I never thought I would have to write this, but I am not a foreign spy of any sort, sent out by any foreign government.
My work is journalism, primarily in Norway now.
— Helle Lyng (@HelleLyngSvends) May 18, 2026
उन्होंने लिखा, “पत्रकारिता का काम सवाल पूछना है, खासकर ताकतवर लोगों से। अगर जवाब स्पष्ट नहीं मिलता, तो सवाल करना हमारी जिम्मेदारी है।”
Journalism is sometimes confrontational. We seek answers. If any interview subject, especially with power, do not answer what I asked, I will try to interrupt and get a more focused response. That is my job & duty. I want answers and not just talking points.
— Helle Lyng (@HelleLyngSvends) May 19, 2026
बहस का बड़ा मुद्दा
इस पूरे विवाद ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पत्रकारिता और एजेंडा के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही है?
एक ओर जहां लोकतंत्र में प्रेस की स्वतंत्रता को महत्वपूर्ण माना जाता है, वहीं दूसरी ओर यह भी बहस जारी है कि क्या कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान भारत जैसे देशों को लेकर पूर्वाग्रह से ग्रसित नजरिया अपनाते हैं।
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