लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने 4 जून 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant के एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान हुई व्यवधानकारी गतिविधियों की निंदा की है। यह कार्यक्रम लंदन विश्वविद्यालय के बर्कबेक कॉलेज में आयोजित किया गया था, जहां मुख्य न्यायाधीश को “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतरराष्ट्रीय कानून” विषय पर व्याख्यान देना था।
कार्यक्रम के बाद प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान एक प्रतिभागी द्वारा भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और असहमति से जुड़े सवाल उठाए गए, जिसके बाद कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और मामला चर्चा का विषय बन गया।
— India in the UK (@HCI_London) June 5, 2026
भारतीय उच्चायोग ने क्या कहा?
भारतीय उच्चायोग ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि मुख्य न्यायाधीश के व्याख्यान के बाद एक सार्थक और सकारात्मक चर्चा हुई, लेकिन एक व्यक्ति द्वारा कार्यक्रम को बाधित करने की कोशिश की गई।
उच्चायोग ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में इस प्रकार का व्यवहार अस्वीकार्य है और लोकतांत्रिक समाज में मतभेदों को सम्मानजनक तथा सभ्य तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए।
Who are the criminals? #FreeAllPoliticalPrisoners #repealUAPA pic.twitter.com/j1TiNccEnP
— Kalpana Wilson (@KalpanaWilson) September 19, 2020
प्रश्नोत्तर सत्र में उठा असहमति का मुद्दा
वायरल वीडियो के अनुसार, प्रश्न पूछने वाली महिला ने भारत में असहमति, लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की।
हालांकि कार्यक्रम के मॉडरेटर ने प्रश्न को मुख्य विषय से असंबंधित बताते हुए आगे बढ़ा दिया। इसके बाद यह घटना सोशल मीडिया और विभिन्न राजनीतिक मंचों पर चर्चा का विषय बन गई।
कौन हैं कल्पना विल्सन?
बाद में रिपोर्टों में महिला की पहचान Kalpana Wilson के रूप में की गई। वह लंदन विश्वविद्यालय के बर्कबेक कॉलेज में सामाजिक विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय विकास से जुड़ी प्रोफेसर हैं।
उनका अकादमिक कार्य अंतरराष्ट्रीय विकास, सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता, श्रम, नस्लीय अध्ययन और दक्षिण एशियाई समाजों पर केंद्रित रहा है। उन्होंने ससेक्स विश्वविद्यालय और SOAS, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से उच्च शिक्षा प्राप्त की है।
वैचारिक और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर चर्चा
कल्पना विल्सन के विभिन्न सार्वजनिक लेखों, अभियानों और मंचों में भागीदारी को लेकर लंबे समय से राजनीतिक और वैचारिक बहस होती रही है।
विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने कई ऐसे मंचों, चर्चाओं और अभियानों में भाग लिया है जहां भारत सरकार, भाजपा, आरएसएस, नागरिकता कानून, कश्मीर, हिजाब विवाद और अन्य राजनीतिक विषयों पर आलोचनात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत किए गए।
उनके आलोचकों का आरोप है कि उनकी गतिविधियां भारत सरकार और कुछ भारतीय संस्थाओं के प्रति अत्यधिक आलोचनात्मक रही हैं, जबकि समर्थकों का कहना है कि वे मानवाधिकार, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर अकादमिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती रही हैं।
In the 1st video, the lady interrupting CJI Suryakant is not a student but a Professor of Geography and anti-India activist, Kalpana Wilson. She is daughter of Amrit Wilson whose OCI was cancelled by GoI few months ago. She is ideologically aligned to India's CPI(ML). She has a… https://t.co/AeXxhRa7Ma
— Stop Hindu Hate Advocacy Network (SHHAN) (@HinduHate) June 7, 2026
सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस
मुख्य न्यायाधीश के कार्यक्रम में हुई इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस देखने को मिली। एक पक्ष ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा सवाल बताया, जबकि दूसरे पक्ष ने इसे एक प्रतिष्ठित न्यायिक कार्यक्रम में अनुचित व्यवधान करार दिया।
भारतीय उच्चायोग के बयान के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?
यह विवाद केवल एक विश्वविद्यालय कार्यक्रम तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसमें न्यायपालिका, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अकादमिक विमर्श और भारत से जुड़े अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श जैसे कई विषय शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक मंचों पर असहमति और संवाद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन उनकी अभिव्यक्ति की शैली और मंच की गरिमा बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
फिलहाल इस मामले को लेकर भारतीय उच्चायोग, अकादमिक जगत और सोशल मीडिया पर बहस जारी है।
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