वृंदावन | मथुरा
धर्मनगरी वृंदावन के विश्व प्रसिद्ध ठाकुर बाँके बिहारी मंदिर में इन दिनों भक्ति के साथ-साथ आक्रोश का माहौल बना हुआ है। विवाद की वजह मंदिर परिसर और प्रस्तावित कॉरिडोर में लगाई जा रही स्टील रेलिंग है। मामला तब गरमाया जब यह जानकारी सामने आई कि इस कार्य का ठेका एक मुस्लिम ठेकेदार को दिया गया है।
खबर फैलते ही ब्रज के साधु-संतों और हिंदू संगठनों ने इसे अपनी आस्था पर सीधा प्रहार बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। सोमवार को संतों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर ठेका तत्काल रद्द करने और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
क्या है पूरा विवाद: 21 हजार रेलिंग और ‘कनिका कंस्ट्रक्शन’
श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने बाँके बिहारी मंदिर में दर्शन व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए कतारबद्ध सिस्टम लागू करने का निर्णय लिया था। इसके तहत—
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प्रवेश द्वार से निकास द्वार तक
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करीब 21 हजार स्टील रेलिंग
लगाई जानी हैं। यह ठेका मेरठ स्थित ‘कनिका कंस्ट्रक्शन’ को दिया गया।
विवाद तब शुरू हुआ जब स्थानीय लोगों और संतों को पता चला कि कंपनी के मुख्य पार्टनर सलीम अहमद बताए जा रहे हैं (कुछ रिपोर्ट्स में नाम सलीम खान भी बताया गया है)। संतों का कहना है कि मंदिर जैसे पवित्र स्थान में गैर-सनातनी व्यक्ति को निर्माण कार्य सौंपना परंपराओं के खिलाफ है।
संतों का आरोप: पहचान छिपाकर हासिल किया गया ठेका
संतों का सबसे गंभीर आरोप यह है कि ठेकेदार ने अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर यह काम हासिल किया। उन्होंने मांग की है कि—
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टेंडर प्रक्रिया की गहन जांच हो
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यह स्पष्ट किया जाए कि किस अधिकारी की संस्तुति से ठेका दिया गया
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कथित प्रशासनिक मिलीभगत की जांच की जाए
कुछ संतों ने यह भी दावा किया कि इसी कंपनी को कोविड काल में भोजन वितरण का काम भी दिया गया था।
संतों की तीखी प्रतिक्रिया, आंदोलन की चेतावनी
श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि—
“ब्रजभूमि राधा-कृष्ण की लीला स्थली है। बाँके बिहारी जी के आंगन में सनातन परंपराओं के विपरीत कोई कार्य स्वीकार्य नहीं है।”
संतों ने साफ कहा है कि जब तक यह ठेका निरस्त कर किसी सनातनी ठेकेदार को नहीं दिया जाता, तब तक विरोध जारी रहेगा। फिलहाल, विरोध के चलते रेलिंग लगाने का कार्य रोक दिया गया है।
प्रबंधन समिति की सफाई
बाँके बिहारी मंदिर की हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य शैलेंद्र गोस्वामी ने कहा कि उन्हें आधिकारिक रूप से यह जानकारी नहीं थी कि ठेकेदार मुस्लिम है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐतिहासिक रूप से विभिन्न शासक भी मंदिर दर्शन के लिए आते रहे हैं।
हालांकि, संतों ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि दर्शन और गर्भगृह के पास निर्माण कार्य में बड़ा अंतर है।
प्रशासन का पक्ष: CSR फंड से हो रहा काम
मथुरा के ADM पंकज वर्मा ने स्पष्ट किया कि—
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यह कार्य मंदिर बजट से नहीं
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बल्कि उन बैंकों के CSR फंड से किया जा रहा है
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जिनमें मंदिर का पैसा जमा है
उन्होंने बताया कि बैंक ने कोटेशन प्रक्रिया के आधार पर ‘कनिका कंस्ट्रक्शन’ को चुना। प्रशासन के अनुसार—
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संस्था का संचालन रंजन नामक व्यक्ति कर रहा है
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मंदिर में कार्य की निगरानी फील्ड मैनेजर रुपेश शर्मा कर रहे हैं
अब लखनऊ की ओर टिकी निगाहें
इस संवेदनशील विवाद पर अब सभी की नजरें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फैसले पर टिकी हैं। संत समाज और स्थानीय श्रद्धालुओं ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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