डिजिटल भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में एक ऐसा विधेयक पेश किया है, जिससे भविष्य में UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस सहित चुनिंदा डिजिटल पेमेंट्स पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू करने का रास्ता खुल सकता है।
हालांकि, इस विधेयक में न तो MDR की दर तय की गई है और न ही इसे लागू करने की किसी तारीख का उल्लेख किया गया है। प्रस्तावित कानूनी बदलाव के बाद सरकार भविष्य में अधिसूचना जारी करके यह तय कर सकेगी कि किन डिजिटल ट्रांजैक्शंस पर MDR लगाया जाएगा और किन भुगतानों को इससे छूट मिलेगी।
अभी UPI पेमेंट पर नहीं लगता MDR
मौजूदा व्यवस्था के तहत UPI के जरिए किए जाने वाले भुगतान पर MDR नहीं लगाया जाता। कोई ग्राहक दुकान, पेट्रोल पंप, रेस्टोरेंट या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर UPI से भुगतान करता है तो कारोबारी को उस ट्रांजैक्शन पर बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को MDR नहीं देना पड़ता।
इसके विपरीत, क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड से किए जाने वाले भुगतान पर आमतौर पर MDR लागू होता है। बैंक और पेमेंट कंपनियां डिजिटल ट्रांजैक्शन की सुविधा देने के बदले कारोबारियों से जो शुल्क वसूलती हैं, उसे मर्चेंट डिस्काउंट रेट कहा जाता है।
क्या ग्राहकों को देना होगा UPI चार्ज?
प्रस्तावित बदलाव का अर्थ यह नहीं है कि UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों से तुरंत शुल्क लिया जाएगा। मौजूदा नियमों के अनुसार कारोबारी MDR का बोझ सीधे ग्राहक पर नहीं डाल सकता।
इसलिए भविष्य में UPI ट्रांजैक्शंस पर MDR लागू भी किया जाता है तो वर्तमान नियमों के तहत इसका भुगतान कारोबारी या मर्चेंट को करना होगा, ग्राहक को नहीं। हालांकि, भुगतान व्यवस्था में होने वाले किसी भी बड़े बदलाव का अप्रत्यक्ष असर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
विधेयक में MDR की दर तय नहीं
लोकसभा में पेश विधेयक में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि UPI या अन्य डिजिटल भुगतान पर MDR की दर कितनी होगी। बिल में यह भी नहीं बताया गया कि नई व्यवस्था कब से लागू की जा सकती है।
यह विधेयक फिलहाल सरकार को भविष्य में अधिसूचना के जरिए MDR से जुड़े नियम तय करने की शक्ति देने का रास्ता बनाता है। सरकार बाद में अलग-अलग श्रेणियों के डिजिटल भुगतान के लिए अलग नियम जारी कर सकती है।
किन ट्रांजैक्शंस पर लग सकता है MDR?
यदि सरकार भविष्य में MDR लागू करने का निर्णय लेती है तो वह कई आधारों पर नियम बना सकती है। इनमें भुगतान का माध्यम, ट्रांजैक्शन की राशि, कारोबारी का आकार और व्यापार की श्रेणी शामिल हो सकती है।
सरकार यह भी तय कर सकती है कि छोटे दुकानदारों को MDR से छूट दी जाए या केवल बड़ी राशि वाले UPI ट्रांजैक्शंस पर शुल्क लगाया जाए। इसके अलावा कुछ विशेष क्षेत्रों या डिजिटल भुगतान सेवाओं के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित की जा सकती हैं।
हालांकि, फिलहाल इनमें से किसी भी व्यवस्था की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
छोटे कारोबारियों पर पड़ सकता है असर
UPI पर MDR लागू होने की स्थिति में सबसे ज्यादा चर्चा छोटे और मध्यम कारोबारियों पर इसके प्रभाव को लेकर हो सकती है। किराना दुकानदार, स्ट्रीट वेंडर, छोटे रेस्टोरेंट और स्थानीय व्यापारी बड़ी संख्या में UPI भुगतान स्वीकार करते हैं।
यदि प्रत्येक डिजिटल ट्रांजैक्शन पर कारोबारियों को शुल्क देना पड़ा तो उनकी संचालन लागत बढ़ सकती है। छोटे मार्जिन पर कारोबार करने वाले व्यापारियों के लिए यह अतिरिक्त खर्च महत्वपूर्ण हो सकता है।
ऐसी स्थिति में सरकार छोटे कारोबारियों, कम मूल्य वाले लेनदेन या विशेष श्रेणी के व्यापारियों को छूट देने जैसे विकल्पों पर विचार कर सकती है।
पेमेंट इंडस्ट्री क्यों चाहती है MDR?
डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री लंबे समय से UPI व्यवस्था को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए किसी प्रकार के शुल्क या प्रोत्साहन तंत्र की मांग करती रही है।
बैंक, फिनटेक कंपनियां और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स UPI नेटवर्क के संचालन, साइबर सुरक्षा, तकनीकी ढांचे, सर्वर क्षमता, फ्रॉड मॉनिटरिंग और ग्राहक सहायता पर बड़ी राशि खर्च करते हैं। इंडस्ट्री का तर्क है कि MDR जैसी व्यवस्था से डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
दूसरी ओर, जीरो-MDR व्यवस्था को भारत में UPI के तेजी से विस्तार का एक बड़ा कारण माना जाता है। शुल्क लागू होने से छोटे व्यापारियों के बीच डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की गति प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा सकती है।
क्या UPI भुगतान तुरंत महंगा हो जाएगा?
नहीं। लोकसभा में विधेयक पेश होने भर से UPI भुगतान पर तत्काल कोई शुल्क लागू नहीं हुआ है। इसके लिए सरकार को आगे नियम बनाने और आधिकारिक अधिसूचना जारी करने की आवश्यकता होगी।
फिलहाल UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों के लिए मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी। जब तक सरकार अलग से अधिसूचना जारी नहीं करती, तब तक UPI ट्रांजैक्शंस पर MDR लागू नहीं माना जाएगा।
बिल पास होने के बाद क्या होगा?
विधेयक को कानून बनने के लिए संसद के दोनों सदनों से मंजूरी और राष्ट्रपति की स्वीकृति की आवश्यकता होगी। इसके बाद सरकार नियमों या अधिसूचना के माध्यम से यह तय कर सकेगी कि डिजिटल भुगतान पर MDR लागू करना है या नहीं।
यदि सरकार भविष्य में MDR लागू करती है तो अधिसूचना में शुल्क की दर, लागू होने की तारीख, भुगतान की श्रेणी, लेनदेन की सीमा और छूट प्राप्त कारोबारियों के बारे में जानकारी दी जा सकती है।
ग्राहकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
ग्राहकों को फिलहाल किसी वायरल मैसेज या अफवाह के आधार पर यह नहीं मानना चाहिए कि हर UPI भुगतान पर नया चार्ज लग गया है। अभी केवल भविष्य में MDR से संबंधित नियम बनाने का कानूनी रास्ता खोले जाने की बात सामने आई है।
किसी भी शुल्क के लागू होने से पहले सरकार, संबंधित मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक या भुगतान प्रणाली से जुड़ी संस्था की आधिकारिक अधिसूचना देखना जरूरी होगा।
निष्कर्ष
लोकसभा में पेश विधेयक से भविष्य में UPI सहित डिजिटल भुगतान पर MDR लागू करने की संभावना का रास्ता खुल सकता है। लेकिन अभी न कोई शुल्क तय हुआ है, न लागू होने की तारीख घोषित की गई है और न ही ग्राहकों से किसी प्रकार का चार्ज वसूलने का फैसला हुआ है।
मौजूदा नियमों के अनुसार MDR का भुगतान कारोबारी करता है, ग्राहक नहीं। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार भविष्य में डिजिटल भुगतान के लिए किस प्रकार की अधिसूचना और नियम जारी करती है।
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