भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता यानी India-UK Free Trade Agreement (FTA) बुधवार, 15 जुलाई 2026 से लागू हो गया। दोनों देशों ने इस समझौते पर 24 जुलाई 2025 को हस्ताक्षर किए थे। जरूरी कानूनी और घरेलू प्रक्रियाएँ पूरी होने के बाद अब इसके प्रावधान प्रभावी हो गए हैं।
इस समझौते के लागू होने से भारत और ब्रिटेन के बीच हजारों उत्पादों पर आयात शुल्क तत्काल या चरणबद्ध तरीके से कम होगा। भारत में ब्रिटिश स्कॉच व्हिस्की, जिन, चॉकलेट, बिस्कुट, कॉस्मेटिक्स, मेडिकल उपकरण, प्रीमियम कारें और लग्जरी मोटरसाइकिलें सस्ती हो सकती हैं। दूसरी ओर, भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन के बाजार में लगभग शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी।
समझौते के तहत भारत से ब्रिटेन जाने वाले लगभग 99 प्रतिशत टैरिफ उत्पादों को शून्य या रियायती शुल्क का लाभ मिलेगा। इससे कपड़ा, चमड़ा, फुटवियर, रत्न एवं आभूषण, समुद्री उत्पाद, दवाइयाँ, केमिकल, इंजीनियरिंग सामान, ऑटो पार्ट्स और प्रसंस्कृत खाद्य उद्योग को बड़ा फायदा होने की संभावना है।
भारत-UK व्यापार समझौते से क्या बदलेगा?
India-UK FTA केवल वस्तुओं पर सीमा शुल्क कम करने वाला समझौता नहीं है। इसमें सेवाओं, डिजिटल व्यापार, वित्तीय सेवाओं, दूरसंचार, सरकारी खरीद, बौद्धिक संपदा, नवाचार, छोटे एवं मध्यम उद्योगों और पेशेवरों की अस्थायी आवाजाही से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं।
समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच कारोबार को सस्ता और आसान बनाना, कंपनियों को स्पष्ट व्यापारिक नियम देना तथा निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाना है।
ब्रिटिश सरकार का अनुमान है कि इस व्यापार समझौते से दीर्घ अवधि में भारत और ब्रिटेन के बीच सालाना व्यापार में करीब 25.5 अरब पाउंड की वृद्धि हो सकती है। समझौता ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में सालाना करीब 4.8 अरब पाउंड और भारत की अर्थव्यवस्था में करीब 5.1 अरब पाउंड का अतिरिक्त योगदान कर सकता है।
भारतीय निर्यातकों को मिलेगा बड़ा बाजार
भारत के लिए समझौते का सबसे महत्वपूर्ण लाभ ब्रिटेन के बाजार में लगभग सभी प्रमुख उत्पादों के लिए ड्यूटी-फ्री या रियायती पहुंच है।
इससे विशेष रूप से रोजगार आधारित क्षेत्रों को फायदा हो सकता है, जिनमें शामिल हैं:
- कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट
- चमड़ा और फुटवियर
- रत्न एवं आभूषण
- समुद्री और कृषि उत्पाद
- खेल का सामान और खिलौने
- इंजीनियरिंग वस्तुएँ
- ऑटोमोबाइल कलपुर्जे
- रसायन और फार्मास्यूटिकल उत्पाद
- इलेक्ट्रॉनिक्स और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद
ब्रिटेन भारत के लिए एक बड़ा और अधिक खर्च करने वाला उपभोक्ता बाजार है। शुल्क समाप्त होने से भारतीय वस्तुएँ ब्रिटेन में उन देशों के उत्पादों से बेहतर मुकाबला कर सकेंगी, जिन्हें पहले से रियायती बाजार पहुंच मिली हुई थी।
भारत-UK वस्तु व्यापार 25 अरब डॉलर के पार
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और ब्रिटेन के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर करीब 25.13 अरब डॉलर हो गया। इस अवधि में भारत ने ब्रिटेन को लगभग 13.44 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि ब्रिटेन से करीब 11.68 अरब डॉलर का आयात किया गया।
हालांकि आयात में तेज वृद्धि के कारण भारत का ब्रिटेन के साथ वस्तु व्यापार अधिशेष घटकर करीब 1.76 अरब डॉलर रह गया। नए व्यापार समझौते से भारतीय निर्यात को गति मिलने और व्यापार संतुलन में सुधार की उम्मीद की जा रही है।
स्कॉच व्हिस्की पर शुल्क 150% से घटकर 75%
समझौते का सबसे चर्चित प्रावधान ब्रिटिश स्कॉच व्हिस्की और जिन पर लगने वाले सीमा शुल्क में कटौती है।
भारत में ब्रिटिश व्हिस्की पर अब तक लगभग 150 प्रतिशत आयात शुल्क लगता था। FTA लागू होते ही यह घटकर 75 प्रतिशत हो गया है। इसके बाद अगले दस वर्षों में इसे चरणबद्ध तरीके से घटाकर 40 प्रतिशत किया जाएगा। जिन पर भी इसी प्रकार शुल्क में कटौती होगी।
इस कटौती से आयातित स्कॉच व्हिस्की के दाम कम होने की संभावना है। हालांकि खुदरा कीमतों में 50 प्रतिशत की सीधी गिरावट जरूरी नहीं है, क्योंकि शराब पर राज्यों का उत्पाद शुल्क, वितरण लागत, स्थानीय टैक्स और विक्रेताओं का मार्जिन भी लागू होता है।
ब्रिटिश कारों पर शुल्क घटकर 10% तक आएगा
ब्रिटेन में बनी पूरी तरह तैयार कारों पर भारत में अभी 110 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता है। समझौते के तहत निर्धारित कोटा व्यवस्था में चुनिंदा ब्रिटिश कारों पर यह शुल्क चरणबद्ध तरीके से घटकर 10 प्रतिशत तक आ सकता है।
यह रियायत सभी आयातित कारों पर असीमित रूप से लागू नहीं होगी। केवल तय संख्या में वाहनों को कम शुल्क का लाभ मिलेगा।
इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के लिए भी चरणबद्ध तथा कोटा आधारित व्यवस्था बनाई गई है। इसका उद्देश्य भारतीय ऑटो और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को अचानक बढ़ने वाली विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाना है।
चॉकलेट, बिस्कुट और कॉस्मेटिक्स भी हो सकते हैं सस्ते
समझौते के तहत भारत करीब 90 प्रतिशत ब्रिटिश टैरिफ लाइनों पर शुल्क कम या समाप्त करेगा। इनमें से लगभग 64 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर तत्काल शुल्क-मुक्त प्रवेश दिया गया है, जबकि चरणबद्ध कटौती के बाद करीब 85 प्रतिशत उत्पाद पूरी तरह शुल्क-मुक्त हो जाएंगे।
भारत में सस्ते हो सकने वाले ब्रिटिश उत्पादों में शामिल हैं:
- चॉकलेट और मीठे बिस्कुट
- स्कॉच व्हिस्की और जिन
- कॉस्मेटिक्स और टॉयलेटरी उत्पाद
- मेडिकल और वैज्ञानिक उपकरण
- मशीनरी और इंजीनियरिंग उपकरण
- चुनिंदा ऑटो पार्ट्स
- प्रीमियम कारें और मोटरसाइकिलें
- कुछ मछली, मांस और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद
कॉस्मेटिक्स के कई उत्पादों पर शुल्क तत्काल या अगले दस वर्षों में समाप्त किया जाएगा। कुछ परफ्यूम और सौंदर्य उत्पादों पर शुल्क को चरणबद्ध तरीके से आधा किया जाएगा।
कृषि और डेयरी क्षेत्र को सुरक्षा
भारत ने अपने संवेदनशील कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों को समझौते में पूरी तरह नहीं खोला है।
डेयरी उत्पाद, सेब और चीज जैसे संवेदनशील उत्पादों को व्यापक शुल्क रियायतों से बाहर रखा गया है। चीनी, चावल, चिकन, अंडे और कुछ अन्य कृषि उत्पादों पर भी सुरक्षा उपाय या सीमित बाजार पहुंच लागू रहेगी।
भारत का डेयरी उद्योग करोड़ों छोटे किसानों और ग्रामीण परिवारों की आजीविका से जुड़ा है। इसलिए समझौते में भारतीय डेयरी बाजार को विदेशी प्रतिस्पर्धा से सुरक्षित रखा गया है।
भारतीय IT कंपनियों और पेशेवरों को फायदा
भारत-UK FTA का लाभ केवल वस्तुओं के निर्यात तक सीमित नहीं रहेगा। भारतीय IT कंपनियों, इंजीनियरों, आर्किटेक्ट, चार्टर्ड अकाउंटेंट, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, शिक्षण संस्थानों और परामर्श कंपनियों को ब्रिटिश बाजार में बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
समझौते में सेवाओं से जुड़े कई क्षेत्रों में नियामक स्पष्टता, गैर-भेदभावपूर्ण व्यवहार और आसान कारोबारी प्रक्रियाओं का प्रावधान किया गया है।
व्यापारिक यात्रियों, अनुबंधित सेवा प्रदाताओं और कुछ पेशेवरों की अस्थायी आवाजाही को भी आसान बनाया गया है। हालांकि इसका संबंध स्थायी आव्रजन या ब्रिटेन में स्थायी रूप से बसने के अधिकार से नहीं है।
सामाजिक सुरक्षा में दोहरे भुगतान से राहत
FTA के साथ भारत और ब्रिटेन के बीच Double Contributions Convention यानी DCC भी 15 जुलाई 2026 से लागू हो गया है।
इस व्यवस्था के बाद पात्र कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं को अस्थायी नियुक्ति के दौरान भारत और ब्रिटेन दोनों देशों में एक साथ सामाजिक सुरक्षा योगदान नहीं देना पड़ेगा।
ब्रिटेन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पात्र अस्थायी कर्मचारियों को अधिकतम 60 महीने यानी पांच वर्ष तक अपने मूल देश की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में योगदान जारी रखने की सुविधा मिल सकती है। भारत सरकार के शुरुआती आकलन में करीब 75,000 भारतीय कर्मचारियों और 900 से अधिक कंपनियों को इससे लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई थी।
डिजिटल कारोबार और MSME को भी मिलेगा लाभ
समझौते में डिजिटल अनुबंध, इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणीकरण और ऑनलाइन कारोबार से जुड़ी अनावश्यक बाधाओं को कम करने का प्रावधान है।
छोटे एवं मध्यम उद्यमों के लिए अलग प्रावधान रखे गए हैं, ताकि वे व्यापार समझौते के नियमों को आसानी से समझ सकें और निर्यात में भागीदारी बढ़ा सकें।
उत्पत्ति के नियमों के तहत कई मामलों में निर्यातकों को स्वयं प्रमाणित करने की सुविधा मिलेगी। इससे दस्तावेजी प्रक्रिया आसान होने और छोटे कारोबारियों की लागत कम होने की संभावना है।
2040 तक व्यापार में बड़े उछाल का अनुमान
ब्रिटिश सरकार के आर्थिक आकलन के अनुसार, इस समझौते के कारण दीर्घ अवधि में ब्रिटेन का भारत को निर्यात करीब 59 से 60 प्रतिशत बढ़ सकता है। 2040 के अनुमानित व्यापार स्तर पर यह लगभग 15.7 अरब पाउंड की अतिरिक्त वृद्धि के बराबर होगा।
इसी अवधि में भारत से ब्रिटेन का आयात करीब 25 प्रतिशत, यानी लगभग 9.8 अरब पाउंड बढ़ सकता है। कुल द्विपक्षीय व्यापार में करीब 39 प्रतिशत या 25.5 अरब पाउंड प्रतिवर्ष की अतिरिक्त वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।
भारत के लिए असली अवसर क्या है?
भारत-UK FTA की चर्चा भले ही सस्ती स्कॉच व्हिस्की और ब्रिटिश कारों के कारण हो रही हो, लेकिन भारत के लिए इसका वास्तविक लाभ निर्यात और रोजगार में छिपा है।
ब्रिटेन के विशाल आयात बाजार में लगभग सभी भारतीय उत्पादों को कम या शून्य शुल्क पर प्रवेश मिलने से कपड़ा, दवा, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, केमिकल और ऑटो पार्ट्स उद्योग को अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
समझौते की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भारतीय कंपनियाँ गुणवत्ता मानकों, उत्पादन क्षमता, समयबद्ध आपूर्ति और ब्रिटेन के उपभोक्ता बाजार की आवश्यकताओं के अनुसार खुद को कितनी तेजी से तैयार करती हैं।
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