पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है और इसे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, फिरहाद हकीम ने अपना इस्तीफा पार्टी नेतृत्व को सौंप दिया है। इसी बीच TMC के भीतर बढ़ते असंतोष के चलते पार्टी की विभिन्न समितियों को भी भंग किए जाने की खबर सामने आई है।
TMC नेता फिरहाद हकीम ने कोलकाता नगर निगम के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया।
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— ANI_HindiNews (@AHindinews) June 3, 2026
शोभनदेब चट्टोपाध्याय की नियुक्ति से शुरू हुआ विवाद
राजनीतिक संकट की शुरुआत उस समय हुई जब पार्टी नेतृत्व ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नियुक्त करने का फैसला किया।
बताया जा रहा है कि पार्टी के कई विधायक इस फैसले से असहमत थे। असंतोष बढ़ने के बाद वरिष्ठ नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में एक बड़ा गुट खुलकर सामने आया।
ऋतब्रत बनर्जी ने किया बड़ा दावा
रिपोर्ट्स के अनुसार, ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि उन्हें 58 विधायकों का समर्थन प्राप्त है और उन्होंने अपने गुट को “असली TMC” बताया है।
राजनीतिक गलियारों में इस दावे ने नई बहस छेड़ दी है। यदि यह समर्थन संख्या सही साबित होती है, तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़े पुनर्गठन का संकेत हो सकता है।
विधानसभा में बढ़ा सियासी संघर्ष
सूत्रों के अनुसार, विधानसभा के भीतर भी शक्ति प्रदर्शन की स्थिति बनी हुई है। विभिन्न विधायक गुटबाजी के बीच अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद पार्टी संगठन, नेतृत्व और विधानसभा की राजनीति पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
फिरहाद हकीम का इस्तीफा क्यों महत्वपूर्ण?
फिरहाद हकीम TMC के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं और लंबे समय से कोलकाता नगर निगम की राजनीति में अहम भूमिका निभाते रहे हैं।
उनका इस्तीफा पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और नेतृत्व संकट के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पार्टी के भीतर मतभेद और बढ़ते हैं तो इसका असर आगामी राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।
BJP ने साधा निशाना
फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद BJP नेता अमित मालवीय ने TMC पर तीखा हमला बोला।
अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि फिरहाद हकीम का कार्यकाल तुष्टीकरण की राजनीति का प्रतीक रहा और उनके इस्तीफे के साथ कोलकाता प्रशासन में एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है।
हालांकि TMC की ओर से इन आरोपों पर अभी कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बंगाल की राजनीति में क्या होंगे आगे के समीकरण?
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि TMC के भीतर चल रहा यह शक्ति संघर्ष आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।
यदि पार्टी के भीतर दो स्पष्ट गुट बनते हैं, तो इसका असर संगठनात्मक ढांचे, विधानसभा की रणनीति और भविष्य के चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।
फिलहाल सभी की नजर TMC नेतृत्व, ऋतब्रत बनर्जी गुट और आगामी राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई है।
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