मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले से वन्यजीवों की मौत का बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। कालापीपल तहसील के खरदौनकलां गांव में खेत के एक कुएं से 13 कृष्णमृग और एक आवारा कुत्ता मृत पाए गए हैं।
प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि आवारा कुत्तों से अपनी जान बचाने के लिए भागते समय कृष्णमृगों का झुंड खेत में बने कुएं में गिर गया। कुएं की मुंडेर का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त मिला है। आशंका है कि तेज रफ्तार में भाग रहे वन्यजीव इसी हिस्से से कुएं में जा गिरे। एक आवारा कुत्ते का शव भी कुएं से बरामद हुआ है।
इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। सूचना मिलने के बाद वन विभाग, पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और स्थानीय लोगों की सहायता से शवों को कुएं से बाहर निकाला गया।
खेत से दुर्गंध आने पर हुआ घटना का खुलासा
घटना का पता रविवार को उस समय चला, जब खेत मालिक राजेश पाटीदार के परिवार को खेत में बने कुएं से तेज दुर्गंध महसूस हुई।
परिवार के सदस्यों ने जब कुएं के भीतर देखा तो बड़ी संख्या में वन्यजीवों के शव पड़े दिखाई दिए। इसके बाद स्थानीय प्रशासन और वन विभाग को तुरंत घटना की जानकारी दी गई।
सूचना मिलते ही वन विभाग, पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। कुएं से एक-एक कर 13 कृष्णमृगों और एक आवारा कुत्ते के शव बाहर निकाले गए।

मृत कृष्णमृगों में 9 मादा और 4 नर
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मृत मिले 13 कृष्णमृगों में चार नर और नौ मादा शामिल हैं।
एक साथ इतनी बड़ी संख्या में वन्यजीवों की मौत से वन विभाग के अधिकारी भी चिंतित हैं। घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है।
वन विभाग की प्रारंभिक जांच में किसी शिकार की घटना के बजाय हादसे की आशंका जताई गई है।
आवारा कुत्तों से बचते हुए कुएं में गिरने की आशंका
प्रारंभिक परिस्थितियों के आधार पर माना जा रहा है कि कृष्णमृगों का झुंड आवारा कुत्ते या कुत्तों के झुंड से बचने के लिए तेजी से भाग रहा था।
इसी दौरान पूरा झुंड खेत में बने कुएं तक पहुंच गया। कुएं की मुंडेर का एक हिस्सा टूटा हुआ था। तेज रफ्तार के कारण कृष्णमृग समय रहते खुद को रोक नहीं पाए और एक के बाद एक कुएं में जा गिरे।
कुएं से एक आवारा कुत्ते का शव भी मिला है। इससे यह आशंका और मजबूत हुई है कि वन्यजीवों का पीछा करने के दौरान कुत्ता भी कुएं में गिर गया होगा।
हालांकि वन विभाग ने अभी इसे प्रारंभिक आशंका बताया है। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
गहरा कुआं बना 13 वन्यजीवों के लिए मौत का जाल
कुएं में गिरने के बाद कृष्णमृग बाहर नहीं निकल सके। घटना का तुरंत पता नहीं चलने के कारण समय रहते बचाव अभियान भी शुरू नहीं हो पाया।
कुछ समय बाद शवों के सड़ने से दुर्गंध फैलने पर घटना की जानकारी सामने आई।
वन विभाग का मानना है कि हादसा शव मिलने से पहले हुआ था। घटना के सटीक समय और मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम कराया गया।
वन विभाग, पुलिस और प्रशासन ने निकाले शव
घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग के साथ पुलिस और प्रशासन की टीमें खरदौनकलां गांव पहुंचीं।
स्थानीय ग्रामीणों की मदद से कुएं से सभी 13 कृष्णमृगों और कुत्ते के शव बाहर निकाले गए। इसके बाद पंचनामा और अन्य आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं।
घटना की गंभीरता को देखते हुए वन्यजीवों का पशु चिकित्सकों की टीम से पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम के बाद शवों का नियमानुसार निस्तारण किया गया।
DFO हेमलता शाह ने क्या कहा?
शाजापुर की डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर यानी DFO हेमलता शाह के अनुसार, मामले की जांच की जा रही है।
प्रारंभिक परिस्थितियों में आशंका है कि कृष्णमृग आवारा कुत्तों से बचने की कोशिश के दौरान कुएं में गिर गए। कुएं की मुंडेर का हिस्सा भी क्षतिग्रस्त पाया गया है।
हालांकि वन विभाग पोस्टमार्टम और जांच के सभी पहलुओं के आधार पर घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट करेगा।
हादसे ने खुले और असुरक्षित कुओं पर खड़े किए सवाल
एक साथ 13 कृष्णमृगों की मौत ने खेतों में मौजूद खुले और क्षतिग्रस्त कुओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।
ग्रामीण और वन्यजीव क्षेत्रों के आसपास बने खुले कुएं वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। विशेष रूप से रात के समय या किसी शिकारी जानवर और आवारा कुत्तों से बचकर भागते वन्यजीव ऐसे कुओं को समय रहते नहीं देख पाते।
खरदौनकलां की घटना में भी कुएं की टूटी हुई मुंडेर को हादसे की संभावित वजहों में देखा जा रहा है।
कृष्णमृगों के लिए गंभीर खतरा बन रहे आवारा कुत्ते
ग्रामीण और वन्यजीव क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी जंगली जानवरों के लिए बढ़ती चुनौती बनती जा रही है।
आवारा कुत्ते कई बार हिरण, कृष्णमृग और अन्य छोटे वन्यजीवों का पीछा करते हैं। ऐसे में जान बचाकर भाग रहे जानवर सड़क हादसों, खुले कुओं और अन्य खतरनाक स्थानों का शिकार हो सकते हैं।
शाजापुर की यह घटना वन्यजीवों और मानव बस्तियों के आसपास मौजूद खतरों के बीच बढ़ते टकराव की एक दर्दनाक तस्वीर पेश करती है।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल वन विभाग ने पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम से मौत के कारणों को लेकर अधिक जानकारी मिलने की उम्मीद है।
अधिकारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि 13 कृष्णमृग एक साथ किन परिस्थितियों में कुएं तक पहुंचे और क्या भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्षेत्र के खुले तथा असुरक्षित कुओं को सुरक्षित करने की जरूरत है।
एक साथ 13 बेजुबान वन्यजीवों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है।
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