अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तीन व्यावसायिक जहाजों पर हमलों के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के 80 से ज्यादा ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने इस सैन्य कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि करते हुए हमलों का वीडियो भी जारी किया है।
अमेरिका का दावा है कि यह कार्रवाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे व्यावसायिक जहाजों पर ईरान के हमलों के तत्काल जवाब में की गई। वहीं ईरान ने अमेरिकी आरोपों को लेकर अपना अलग पक्ष रखते हुए अमेरिका पर अंतरिम समझौते और युद्धविराम के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
ताजा घटनाक्रम में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी हमलों के बाद बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। इससे जून में बनी नाजुक शांति व्यवस्था पर गंभीर संकट पैदा हो गया है और मध्य पूर्व में व्यापक सैन्य संघर्ष का खतरा एक बार फिर बढ़ गया है।
JUST IN: The Pentagon confirms the US military struck OVER 80 targets in Iran via precision strikes tonight after the regime attacked multiple civilian vessels in the Strait
“U.S. forces struck Iranian air defense systems, command and control networks, coastal radar sites,… pic.twitter.com/PcxJ3HYzL1
— Paul White Gold Eagle (@PaulGoldEagle) July 8, 2026
ईरान के 80 से ज्यादा ठिकानों पर अमेरिकी हमला
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 7 जुलाई 2026 को जारी आधिकारिक बयान में कहा कि अमेरिकी बलों ने ईरान के 80 से ज्यादा लक्ष्यों पर सटीक हथियारों से हमला किया।
CENTCOM के मुताबिक, इस सैन्य कार्रवाई में ईरान के:
एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क, तटीय रडार केंद्र, एंटी-शिप मिसाइल क्षमताएं और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC की 60 से ज्यादा छोटी सैन्य नौकाएं निशाना बनाई गईं।
अमेरिकी सेना का कहना है कि हमलों का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना था, जिसका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के खिलाफ किया जा सकता है।
U.S. Central Command forces have begun launching a series of powerful strikes against Iran to impose heavy costs for targeting and attacking commercial shipping crewed by innocent civilians in an international waterway. The U.S. strikes are in response to Iranian attacks on three…
— U.S. Central Command (@CENTCOM) July 7, 2026
CENTCOM ने जारी किया हमलों का वीडियो
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सैन्य कार्रवाई की घोषणा के साथ आधिकारिक वीडियो भी जारी किया है। CENTCOM ने हमलों को व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों की तत्काल जवाबी कार्रवाई बताया।
अमेरिकी सेना ने कहा कि उसकी सेनाएं क्षेत्र में तैनात हैं और समझौते का पालन नहीं होने की स्थिति में ईरान को जवाबदेह ठहराने के लिए तैयार हैं।
तीन व्यावसायिक जहाजों पर हमले के बाद कार्रवाई
CENTCOM ने जिन तीन जहाजों पर ईरान के हमले का आरोप लगाया, उनकी पहचान इस प्रकार बताई है:
M/T Al Rekayyat, M/T Wedyan और M/T Cyprus Prosperity।
अमेरिकी सेना के अनुसार, Al Rekayyat Marshall Islands के झंडे वाला जहाज है, Wedyan सऊदी अरब के झंडे वाला टैंकर है और Cyprus Prosperity लाइबेरियाई झंडे के तहत संचालित होता है।
हालांकि स्वतंत्र रिपोर्टिंग में जिम्मेदारी को लेकर कुछ सावधानी बरती गई है। Reuters के अनुसार हमलों की तत्काल जिम्मेदारी किसी संगठन या देश ने औपचारिक रूप से नहीं ली थी, लेकिन अमेरिका के एक अधिकारी ने कहा कि शुरुआती संकेत ईरान की ओर इशारा कर रहे हैं। कतर और सऊदी अरब ने भी अपने जहाजों पर हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है।
भारत आ रहा LNG जहाज भी बना निशाना
इन घटनाओं में भारत से जुड़ा एक बड़ा मामला भी सामने आया है। LNG से लदा विशाल टैंकर Al Rekayyat कतर के रास लफ्फान से गुजरात के दहेज की ओर जा रहा था।
रिपोर्टों के अनुसार, जहाज पर संदिग्ध ड्रोन हमले के बाद इंजन रूम में आग और भारी धुआं फैल गया। जहाज पर कुल 29 क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें चार भारतीय नागरिक शामिल थे। सभी भारतीयों और अन्य क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बताया गया है।
कतर ने जहाज पर हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए गंभीर खतरा बताया। कतर के विदेश मंत्रालय ने इस हमले के लिए ईरान को कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया।
आग लगने के बाद विस्फोट का भी था खतरा
Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, LNG से लदे Al Rekayyat के बाईं ओर हमला हुआ और उसके इंजन रूम में आग लग गई। एक समय जहाज में बड़े विस्फोट का भी खतरा बताया गया था।
हालांकि क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बताया गया और उन्हें जहाज से निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हमलों के बाद समुद्री सुरक्षा का खतरा स्तर “Severe” यानी गंभीर कर दिया गया।
सऊदी अरब का विशाल तेल टैंकर भी क्षतिग्रस्त
हमलों में सऊदी अरब के झंडे वाला सुपरटैंकर Wedyan भी क्षतिग्रस्त हुआ। यह घटना ओमान के तट के पास हुई।
सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने घटना की निंदा की और ईरान को जहाज को हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया।
इसके अलावा एक अन्य टैंकर पर ड्रोन से हमला होने की भी सूचना सामने आई। जहाज को मामूली नुकसान हुआ, लेकिन वह अपनी यात्रा जारी रखने में सफल रहा।
अमेरिका ने वापस ली ईरानी तेल बिक्री की छूट
जहाजों पर हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान को तेल बेचने की अनुमति देने वाला विशेष लाइसेंस भी रद्द कर दिया।
यह छूट जून में बने अंतरिम समझौते के तहत दी गई थी। इसका उद्देश्य ईरान-अमेरिका संघर्ष को कम करना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री आवाजाही सामान्य करना था।
अमेरिका का कहना है कि जहाजों पर हुए हमले अस्वीकार्य थे और इसके परिणाम होने जरूरी थे।
ईरान बोला- अमेरिका ने तोड़ा Islamabad Memorandum
ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने दावा किया कि तेल प्रतिबंध में दी गई छूट वापस लेना Islamabad Memorandum of Understanding के अनुच्छेद 10 का उल्लंघन है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका के नए सैन्य हमले समझौते के अनुच्छेद 1 और 2 का गंभीर उल्लंघन हैं।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी कि अमेरिका को समझौता तोड़ने के परिणामों की जिम्मेदारी उठानी होगी और तेहरान अपने राष्ट्रीय हितों तथा सुरक्षा की रक्षा के लिए कदम उठाएगा।
ईरान ने बहरीन और कुवैत में किया पलटवार
अमेरिकी हमलों के कुछ ही समय बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया।
बहरीन अमेरिकी नौसेना के 5th Fleet का प्रमुख केंद्र है, जबकि कुवैत में भी अमेरिकी सेना की मौजूदगी है। दोनों देशों में हमलों के दौरान चेतावनी सायरन बजाए गए।
ईरान ने अमेरिकी हवाई हमलों को खुला आक्रमण और युद्धविराम का उल्लंघन बताया। इस नए सैन्य टकराव ने मध्य पूर्व में फिर व्यापक युद्ध की आशंका बढ़ा दी है।
बंदर अब्बास, केश्म और सीरिक में विस्फोट
अमेरिकी हमलों के बाद ईरानी सरकारी मीडिया ने दक्षिणी ईरान के कई इलाकों में विस्फोटों की सूचना दी।
रिपोर्टों के अनुसार बंदर अब्बास, केश्म और सीरिक में धमाकों की आवाज सुनी गई। हालांकि ईरान ने शुरुआती स्तर पर नुकसान या हताहतों की विस्तृत जानकारी जारी नहीं की।
अमेरिकी सेना ने कहा कि उसके हमलों में तटीय सैन्य नेटवर्क और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास ईरान की समुद्री सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया गया।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में शामिल है। फरवरी 2026 में युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के करीब पांचवें हिस्से के तेल और गैस की आपूर्ति इस समुद्री रास्ते से गुजरती थी।
यही कारण है कि यहां किसी भी सैन्य तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर तेजी से पड़ता है। जहाजों पर ताजा हमलों के बाद यहां से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरे का स्तर गंभीर कर दिया गया।
जहाजों की आवाजाही पर पड़ा असर
ताजा हमलों के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। Reuters के अनुसार 7 जुलाई को करीब 16 जहाजों ने स्ट्रेट को पार किया, जो लगभग तीन सप्ताह में सबसे कम संख्या थी।
युद्ध से पहले इस मार्ग से प्रतिदिन औसतन करीब 125 जहाज गुजरते थे। ताजा तनाव के कारण शिपिंग कंपनियों और ऊर्जा व्यापार से जुड़े देशों की चिंता बढ़ गई है।
28 फरवरी को शुरू हुई थी अमेरिका-ईरान जंग
मौजूदा संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी, जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हमला किया।
इन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। ईरानी सरकारी मीडिया ने बाद में उनकी मृत्यु की पुष्टि की थी। इसके बाद ईरान ने इजराइल और अमेरिकी सैन्य मौजूदगी वाले खाड़ी देशों की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
इसके बाद कई महीनों तक संघर्ष, समुद्री नाकेबंदी और ऊर्जा आपूर्ति में बाधा के बाद जून में एक अंतरिम व्यवस्था बनी थी। हालांकि ताजा जहाज हमलों, अमेरिकी हवाई कार्रवाई और ईरानी पलटवार से यह व्यवस्था अब गंभीर संकट में दिखाई दे रही है।
क्या फिर शुरू हो सकता है बड़ा युद्ध?
फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों एक-दूसरे पर युद्धविराम और अंतरिम समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगा रहे हैं।
अमेरिका का दावा है कि ईरान ने व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और नौवहन की स्वतंत्रता को खतरे में डाला। दूसरी ओर ईरान का कहना है कि अमेरिकी हवाई हमले और तेल प्रतिबंध की छूट वापस लेना समझौते का उल्लंघन है।
अब ईरान के बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर पलटवार के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। दोनों पक्षों ने अभी बातचीत से औपचारिक रूप से हटने का संकेत नहीं दिया है, लेकिन नए हमलों ने किसी स्थायी समझौते की राह को बेहद मुश्किल बना दिया है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, खाड़ी क्षेत्र और अमेरिका-ईरान के अगले कदम पर है।
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