मेघालय की राजधानी शिलांग में नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल (NEC) के 73वें पूर्ण सत्र की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। यह महत्वपूर्ण बैठक शुक्रवार को शिलांग के स्टेट कन्वेंशन सेंटर में केंद्रीय गृह मंत्री और नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल (NEC) के अध्यक्ष अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित की जाएगी।
इस उच्चस्तरीय बैठक में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) के केंद्रीय मंत्री और NEC के उपाध्यक्ष Jyotiraditya M. Scindia, DoNER राज्य मंत्री Sukanta Majumdar, पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री, परिषद के सदस्य तथा केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे।
पूर्वोत्तर विकास एजेंडे पर रहेगा फोकस
73वें पूर्ण सत्र में पूर्वोत्तर भारत के समग्र विकास, बुनियादी ढांचे, सड़क एवं रेल कनेक्टिविटी, डिजिटल नेटवर्क, निवेश, पर्यटन, कौशल विकास और रोजगार सृजन से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।
बैठक में विभिन्न विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी और आने वाले वर्षों के लिए नई रणनीतियों पर विचार-विमर्श होगा।
#WATCH | Shillong, Meghalaya: Preparations are underway at the State Convention Centre in Shillong for the 73rd Plenary Session of the North East Council (NEC).
The North Eastern Council (NEC) will hold its 73rd Plenary Session tomorrow in Shillong, Meghalaya, under the… pic.twitter.com/55CoHh5fgC
— ANI (@ANI) June 3, 2026
आठ राज्यों के प्रतिनिधि होंगे शामिल
बैठक में पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों—
- Assam
- Arunachal Pradesh
- Manipur
- Meghalaya
- Mizoram
- Nagaland
- Sikkim
- Tripura
के राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों की भागीदारी रहेगी।
पूर्वोत्तर में विकास परियोजनाओं की होगी समीक्षा
बैठक में केंद्र सरकार द्वारा पूर्वोत्तर क्षेत्र में संचालित विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट पर भी चर्चा होगी। इसमें विशेष रूप से परिवहन, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और औद्योगिक विकास से जुड़े कार्यक्रमों की समीक्षा की जाएगी।
सरकार का लक्ष्य पूर्वोत्तर राज्यों को देश के विकास इंजन के रूप में स्थापित करना और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को और मजबूत करना है।
NEC की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण?
नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल (NEC) पूर्वोत्तर भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए कार्य करने वाली एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय संस्था है। यह परिषद क्षेत्रीय विकास योजनाओं के समन्वय, नीति निर्माण और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
73वां पूर्ण सत्र ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब केंद्र सरकार पूर्वोत्तर क्षेत्र में बुनियादी ढांचे, निवेश और सीमा क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है।
पूर्वोत्तर विकास को मिलेगी नई दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि शिलांग में होने वाला यह सत्र पूर्वोत्तर राज्यों के लिए विकास की नई प्राथमिकताओं और भविष्य की योजनाओं को अंतिम रूप देने में अहम साबित हो सकता है। बैठक से क्षेत्रीय सहयोग, आर्थिक विकास और बेहतर कनेक्टिविटी को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय सामने आने की उम्मीद है।
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