महाराष्ट्र के नासिक स्थित TCS विवाद के बाद अब देश की प्रमुख आईटी कंपनियों में शामिल Wipro एक नए विवाद को लेकर चर्चा में है। पुणे की एक पूर्व हिंदू महिला कर्मचारी ने कंपनी के एक सहकर्मी पर कथित रूप से धर्मांतरण का दबाव बनाने, मानसिक उत्पीड़न करने और कार्यस्थल पर प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
मामले को लेकर पुणे के हिंजवड़ी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई है। वहीं पीड़िता की ओर से कंपनी को कानूनी नोटिस भेजकर कार्रवाई की मांग भी की गई है।
क्या हैं महिला कर्मचारी के आरोप?
पीड़िता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दावा किया कि कंपनी में कार्यरत एक सहकर्मी लगातार उस पर इस्लाम स्वीकार करने और एक मुस्लिम युवक के साथ संबंध बनाने का दबाव डालता था।
महिला का आरोप है कि उसने कई बार इसका विरोध किया, लेकिन कथित तौर पर स्थिति में सुधार नहीं हुआ। पीड़िता के अनुसार, जब उसने इस व्यवहार का विरोध किया तो उसे मानसिक दबाव और असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
वरिष्ठ अधिकारियों पर भी लगाए आरोप
महिला ने यह भी आरोप लगाया कि मामले की जानकारी मिलने के बावजूद कंपनी के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया।
पीड़िता का दावा है कि उसकी मदद करने के बजाय उस पर ही दबाव बनाया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।
ऑनलाइन मीटिंग में जबरन इस्तीफा लेने का आरोप
महिला कर्मचारी का आरोप है कि अगस्त 2025 में आयोजित एक ऑनलाइन बैठक के दौरान उससे दबाव बनाकर इस्तीफा लिया गया।
उसका कहना है कि परिस्थितियां ऐसी बनाई गईं कि उसे नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। यह दावा भी जांच के दायरे में है।
कंपनी को भेजा गया लीगल नोटिस
पीड़िता के वकील विवेक भोसले ने बताया कि Wipro को एक कानूनी नोटिस भेजा गया है।
नोटिस में कंपनी से मांग की गई है कि:
- महिला को पुनः नौकरी पर बहाल किया जाए
- कथित मानसिक उत्पीड़न के लिए 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए
- मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए
वकील का कहना है कि यदि 15 दिनों के भीतर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
पुलिस जांच जारी
मामले में हिंजवड़ी पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस सभी आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है।
फिलहाल किसी भी पक्ष के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
Wipro की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान
खबर लिखे जाने तक Wipro की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई थी।
कंपनी की प्रतिक्रिया और पुलिस जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
कार्यस्थल पर उत्पीड़न और धार्मिक स्वतंत्रता पर फिर छिड़ी बहस
इस मामले के सामने आने के बाद कार्यस्थलों पर धार्मिक स्वतंत्रता, कर्मचारी अधिकारों और उत्पीड़न से जुड़े मुद्दों पर चर्चा तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी प्रकार के धार्मिक, सामाजिक या व्यक्तिगत दबाव से मुक्त सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराना प्रत्येक संस्थान की जिम्मेदारी है।
फिलहाल पुलिस जांच, कानूनी प्रक्रिया और कंपनी की संभावित प्रतिक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।
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