मध्य प्रदेश के ग्वालियर में पुलिस और क्राइम ब्रांच ने विशेष अभियान चलाकर 13 लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस को संदेह है कि ये सभी बांग्लादेशी नागरिक हैं और बिना वैध दस्तावेजों के भारत में रह रहे थे। हिरासत में लिए गए लोगों में सात पुरुष, तीन महिलाएं और तीन नाबालिग बच्चे शामिल हैं। हालांकि, उनकी नागरिकता और भारत में रहने की वैधता की अंतिम पुष्टि दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
तीन स्थानों पर पुलिस की कार्रवाई
पुलिस को खुफिया सूचना मिली थी कि ग्वालियर के कुछ इलाकों में संदिग्ध विदेशी नागरिक किराए के मकानों में रह रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमों ने मंगलवार को तीन अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई की।
अभियान के दौरान कुल 13 लोगों को पूछताछ और सत्यापन के लिए हिरासत में लिया गया। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वे भारत में कब और किस रास्ते से आए, ग्वालियर में कितने समय से रह रहे थे तथा उन्हें मकान और रोजगार उपलब्ध कराने में किन लोगों ने सहायता की।
नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों की जांच
प्रारंभिक जांच में हिरासत में लिए गए लोग कथित तौर पर भारतीय नागरिकता या भारत में वैध निवास से संबंधित संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। पुलिस उनके पहचान-पत्र, मोबाइल फोन और स्थानीय संपर्कों की जांच कर रही है।
जांच का एक प्रमुख बिंदु यह भी है कि क्या आरोपितों के पास आधार कार्ड, राशन कार्ड, मतदाता पहचान-पत्र या अन्य भारतीय दस्तावेज मौजूद हैं। ऐसे दस्तावेज मिलने पर उनकी प्रामाणिकता की जांच संबंधित विभागों से कराई जाएगी।
पुलिस यह भी पता लगा रही है कि संदिग्धों को किराए पर मकान किसने दिया और किरायेदार सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की गई थी या नहीं।
बांग्लादेश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने का दावा
पूछताछ के दौरान हिरासत में लिए गए कुछ लोगों ने स्वयं को बांग्लादेश के ढाका, खुलना और अन्य इलाकों का निवासी बताया है। पुलिस ने अभी इनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है।
सुरक्षा एजेंसियां उपलब्ध दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से उनकी पहचान, पारिवारिक पृष्ठभूमि और यात्रा से जुड़ी जानकारी का सत्यापन कर रही हैं। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि उनका संबंध किसी ऐसे एजेंट या संगठित नेटवर्क से तो नहीं है, जो अवैध तरीके से सीमा पार कराने, रोजगार दिलाने या फर्जी दस्तावेज बनवाने में सहायता करता हो।
सत्यापन के बाद होगी कानूनी कार्रवाई
ग्वालियर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह के अनुसार, सभी व्यक्तियों की नागरिकता और दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही उनके खिलाफ नियमानुसार अगली कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि वे विदेशी नागरिक हैं और बिना वैध पासपोर्ट, वीजा या निवास अनुमति के भारत में रह रहे थे, तो संबंधित विदेशी नागरिक कानूनों और सरकारी दिशानिर्देशों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें निर्धारित होल्डिंग या डिटेंशन सेंटर में रखने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।
अक्टूबर 2025 में भी पकड़े गए थे आठ लोग
ग्वालियर में संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ यह पहली कार्रवाई नहीं है। अक्टूबर 2025 में महाराजपुरा क्षेत्र से आठ लोगों को पकड़ा गया था। पुलिस का आरोप था कि वे करीब 12 वर्षों से बिना वैध दस्तावेजों के भारत में रह रहे थे। यह कार्रवाई हरियाणा पुलिस से मिले इनपुट के बाद की गई थी।
महाराजपुरा का इलाका भारतीय वायुसेना स्टेशन के पास स्थित होने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। उस मामले में भी केंद्रीय और राज्य की सुरक्षा एजेंसियों ने पहचान, भारत में प्रवेश के रास्ते और स्थानीय संपर्कों की जांच की थी।
फर्जी दस्तावेज बनाने वाले नेटवर्क पर नजर
वर्तमान मामले में जांच एजेंसियों का ध्यान केवल हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान तक सीमित नहीं है। पुलिस यह पता लगाने में भी जुटी है कि क्या उन्हें भारत में रहने, काम करने या सरकारी सुविधाओं तक पहुंचने के लिए किसी स्थानीय व्यक्ति या गिरोह ने सहायता दी थी।
यदि फर्जी आधार कार्ड, राशन कार्ड या अन्य पहचान-पत्र मिलने की पुष्टि होती है, तो इन्हें तैयार कराने और सत्यापित कराने वाले लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। मोबाइल फोन की कॉल डिटेल, डिजिटल भुगतान, किराया संबंधी रिकॉर्ड और यात्रा इतिहास की जांच से स्थानीय नेटवर्क की जानकारी सामने आने की संभावना है।
किरायेदार सत्यापन पर फिर उठे सवाल
इस कार्रवाई के बाद ग्वालियर में किरायेदार सत्यापन व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस प्रशासन पहले से मकान मालिकों को निर्देश देता रहा है कि किसी व्यक्ति को किराए पर रखने से पहले उसका पहचान-पत्र प्राप्त करें और स्थानीय थाने में जानकारी जमा कराएं।
अधिकारियों के अनुसार, संवेदनशील इलाकों, औद्योगिक क्षेत्रों, रेलवे स्टेशन के आसपास और असंगठित श्रमिक बस्तियों में दस्तावेज सत्यापन अभियान को और तेज किया जा सकता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और पहचान प्रणाली से जुड़ा मामला
अवैध प्रवास का मामला कानून-व्यवस्था के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और पहचान-पत्र प्रणाली की विश्वसनीयता से भी जुड़ा है। हालांकि, किसी व्यक्ति को केवल भाषा, पहनावे, धर्म या क्षेत्र के आधार पर विदेशी अथवा घुसपैठिया नहीं माना जा सकता। नागरिकता का निर्धारण केवल वैधानिक दस्तावेजों और सक्षम एजेंसियों की जांच के आधार पर किया जाता है।
पुलिस ने लोगों से संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने की अपील की है, लेकिन साथ ही अफवाह फैलाने, किसी समुदाय को निशाना बनाने या स्वयं कानून हाथ में लेने से बचने को कहा है।
फिलहाल सभी 13 लोग पुलिस की निगरानी में हैं और दस्तावेजों का सत्यापन जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही उनकी नागरिकता, भारत में प्रवेश के तरीके और संभावित स्थानीय नेटवर्क के बारे में आधिकारिक जानकारी सामने आएगी।
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