राजस्थान में आगामी नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं। जयपुर स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को आयोजित जयपुर संभाग की महत्वपूर्ण बैठक में चुनावी रणनीति, युवाओं से संवाद, स्थानीय निकायों की समस्याओं और प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक के दौरान भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री अजेय कुमार ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को युवाओं के लिए “Gen Z” शब्द का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और पार्टी की विचारधारा के अनुरूप युवाओं को “युवा शक्ति” कहकर संबोधित किया जाना चाहिए।
‘Gen Z क्या होता है, युवा शक्ति कहिए’
बैठक में संगठन महामंत्री अजेय कुमार निकाय चुनावों को लेकर नेताओं और पदाधिकारियों से लगातार सुझाव मांग रहे थे। इसी दौरान एक पदाधिकारी ने सुझाव दिया कि चुनावों से पहले पार्टी को “Gen Z” को भी अपने साथ जोड़ना होगा।
इस पर अजेय कुमार ने कथित तौर पर पूछा, “यह Gen Z क्या होता है?” इसके बाद उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि विदेशी शब्दावली के स्थान पर भारतीय संस्कृति से जुड़े शब्दों का प्रयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी नेताओं को युवाओं के लिए “Gen Z” के बजाय “युवा शक्ति” शब्द का इस्तेमाल करना चाहिए।
यह टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है, जब परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए युवा और छात्र प्रदर्शनों के बाद “Gen Z” शब्द राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श का प्रमुख हिस्सा बना हुआ है। इन प्रदर्शनों के दौरान तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई थी और बाद में उन्होंने पद छोड़ दिया था।
मंत्री की कार्यशैली पर भाजपा नेताओं ने जताई नाराजगी
बैठक में केवल युवाओं से जुड़ी रणनीति पर ही नहीं, बल्कि राजस्थान सरकार के नगरीय विकास विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी भाजपा नेताओं की नाराजगी सामने आई।
अलवर उत्तर के भाजपा जिलाध्यक्ष महासिंह चौधरी ने नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने एक स्थानीय निकाय में नियुक्त कार्यकारी अधिकारी यानी ईओ को हटाने का अनुरोध किया था, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने बैठक में कहा कि पार्टी के जिलाध्यक्ष और स्थानीय पदाधिकारी जनता की समस्याएं सरकार तक पहुंचाते हैं, लेकिन कई मामलों में उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। इससे स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं को जनता के सवालों का जवाब देना मुश्किल हो रहा है।
खाली प्रशासनिक पद भरने की मांग
पिलानी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी रहे राजेश दहिया ने भी नगरीय विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निकाय चुनावों में जाने से पहले प्रदेश सरकार को नगर निकायों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरना चाहिए।
उन्होंने कार्यकारी अधिकारी, राजस्व अधिकारी, सहायक अभियंता, कनिष्ठ अभियंता और अन्य प्रशासनिक एवं तकनीकी पदों पर शीघ्र नियुक्तियां करने की मांग रखी।
दहिया के अनुसार, अधिकारियों और कर्मचारियों के पद खाली होने से नगर निकायों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। आम लोगों के छोटे-छोटे काम भी समय पर नहीं हो पा रहे हैं, जिसका सीधा असर सरकार और संगठन की छवि पर पड़ता है।
‘कांग्रेस विचारधारा के अधिकारी प्रमुख पदों पर’
बैठक में कुछ नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के करीब ढाई वर्ष पूरे होने के बाद भी पिछली कांग्रेस सरकार के समय महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किए गए कई अधिकारी अब भी प्रमुख जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।
नेताओं का कहना था कि ऐसे अधिकारियों की कार्यप्रणाली के कारण भाजपा कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की समस्याओं का अपेक्षित समाधान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने निकाय चुनावों से पहले प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा करने और निष्क्रिय या पक्षपातपूर्ण अधिकारियों को बदलने की मांग की।
हालांकि, अधिकारियों पर लगाए गए ये आरोप बैठक में उपस्थित नेताओं के राजनीतिक दावे हैं और संबंधित अधिकारियों की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सड़क, सफाई और स्ट्रीट लाइट पर तुरंत काम करने का सुझाव
बैठक में शामिल कई नेताओं ने आगामी निकाय चुनावों से पहले वार्ड स्तर पर बुनियादी सुविधाओं में सुधार करने पर जोर दिया। नेताओं ने कहा कि शहरों और कस्बों में साफ-सफाई, क्षतिग्रस्त सड़कों, नालियों और खराब स्ट्रीट लाइट से जुड़ी शिकायतों का तत्काल समाधान किया जाना चाहिए।
उनका मानना था कि स्थानीय निकाय चुनावों में मतदाता सबसे पहले अपने आसपास की सड़क, पानी, सफाई और प्रकाश व्यवस्था को देखते हैं। ऐसे में इन सुविधाओं को दुरुस्त किए बिना चुनावी मैदान में उतरना पार्टी के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
बैठक में मौजूद नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने संबंधित अधिकारियों को समस्याओं का शीघ्र समाधान करने और व्यवस्थाओं को सुधारने के निर्देश दिए।
निकाय चुनाव से पहले संगठन की जमीनी तैयारी
जयपुर संभाग की इस बैठक में संभाग के अंतर्गत आने वाले जिलों के प्रभारी मंत्री, विधायक, पिछले विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी, वर्तमान और पूर्व जिलाध्यक्ष तथा भाजपा संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए।
बैठक में बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ताओं की सक्रियता, स्थानीय मुद्दों की पहचान, युवाओं से संवाद और सरकार की योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाने की रणनीति पर भी चर्चा की गई।
अजेय कुमार की “Gen Z” के बजाय “युवा शक्ति” शब्द इस्तेमाल करने की सलाह से यह संकेत मिलता है कि भाजपा निकाय चुनावों में युवाओं को जोड़ने की कोशिश तो करेगी, लेकिन इसके लिए पार्टी भारतीय संस्कृति और अपनी वैचारिक शब्दावली को प्राथमिकता देना चाहती है।
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