भारत और नेपाल के बीच रिश्तों को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (Rastriya Swatantra Party) के अध्यक्ष रवि लामिछाने से मुलाकात के बाद दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता जताई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक संदेश साझा करते हुए कहा कि उन्हें रवि लामिछाने से मिलकर बेहद खुशी हुई और वह साझा तथा समृद्ध भविष्य के लिए उनके साथ मिलकर काम करने की इच्छा का स्वागत करते हैं।
Delighted to meet the Chairman of the Rastriya Swatantra Party of Nepal Mr. Rabi Lamichhane. I welcome and fully share his desire to work closely together for a shared and prosperous future.
Nepal is a priority partner under our Neighbourhood First policy and we look forward to… pic.twitter.com/ZMjpGthKTX
— Narendra Modi (@narendramodi) June 3, 2026
पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में लिखा:
“नेपाल की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष श्री रवि लामिछाने से मिलकर मुझे बहुत खुशी हुई। मैं एक साझा और समृद्ध भविष्य के लिए मिलकर काम करने की उनकी इच्छा का स्वागत करता हूँ और पूरी तरह से उनके साथ हूँ।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत की “नेबरहुड फर्स्ट” (Neighbourhood First) नीति के तहत नेपाल एक प्राथमिकता वाला साझेदार है।
‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत अपनी पड़ोसी देशों के साथ सहयोग और साझेदारी को प्राथमिकता देता है। उन्होंने कहा कि नेपाल भारत की विदेश नीति में विशेष महत्व रखता है और दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और आर्थिक संबंध बेहद गहरे हैं।
मोदी ने कहा कि भारत नेपाल की नई सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक है, ताकि दोनों देशों के विशेष और बहुआयामी संबंधों को और मजबूत बनाया जा सके।
भारत-नेपाल संबंधों के लिए क्यों अहम है यह मुलाकात?
भारत और नेपाल के बीच खुले सीमा संबंध, सांस्कृतिक निकटता, धार्मिक आस्था और आर्थिक सहयोग लंबे समय से दोनों देशों की साझेदारी की आधारशिला रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी और रवि लामिछाने की मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब नेपाल की राजनीति में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच संवाद भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दे सकता है।
व्यापार, कनेक्टिविटी और विकास पर रहेगा फोकस
भारत और नेपाल के बीच हाल के वर्षों में कई बड़े बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स पर काम हुआ है। इनमें सड़क, रेलवे, ऊर्जा, पेट्रोलियम पाइपलाइन और सीमा व्यापार से जुड़े कई प्रोजेक्ट शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में दोनों देश निम्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा सकते हैं:
- सीमा कनेक्टिविटी
- ऊर्जा और जलविद्युत परियोजनाएँ
- व्यापार और निवेश
- पर्यटन
- शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान
- डिजिटल और तकनीकी सहयोग
नेपाल भारत का रणनीतिक साझेदार
नेपाल दक्षिण एशिया में भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार माना जाता है। दोनों देशों के बीच लोगों से लोगों का संपर्क (People-to-People Connect) भी बेहद मजबूत है।
हर वर्ष बड़ी संख्या में नेपाली नागरिक भारत में शिक्षा, रोजगार और व्यवसाय के लिए आते हैं, जबकि भारतीय श्रद्धालु नेपाल के धार्मिक स्थलों का दौरा करते हैं।
नई सरकार के साथ सहयोग बढ़ाने की तैयारी
प्रधानमंत्री मोदी के बयान से यह संकेत मिलता है कि भारत नेपाल में नई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच सहयोग का दायरा बढ़ाने के पक्ष में है।
विश्लेषकों का मानना है कि “नेबरहुड फर्स्ट” नीति के तहत नेपाल के साथ संबंधों को मजबूत करना भारत की क्षेत्रीय कूटनीति का अहम हिस्सा बना रहेगा।
आने वाले समय में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद और विकास परियोजनाओं में सहयोग बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
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