कर्नाटक के बीदर जिले स्थित सरकारी अस्पताल बीदर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (BRIMS) में एक गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल के एक मॉर्चरी अटेंडेंट को मृत महिलाओं की आपत्तिजनक तस्वीरें कथित तौर पर मोबाइल फोन से लेने और उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
मामले के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन, पुलिस और राज्य महिला आयोग ने कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर आगे की जांच शुरू कर दी है।
अस्पताल प्रशासन ने दर्ज कराई शिकायत
जानकारी के अनुसार, BRIMS में विभागाध्यक्ष डॉ. मोसीनुल हक ने 25 मई 2026 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि अस्पताल में कई वर्षों से कार्यरत मॉर्चरी अटेंडेंट मुनीर अहमद ने पोस्टमार्टम प्रक्रिया के दौरान मृत महिलाओं की तस्वीरें अपने मोबाइल फोन में कैद कीं।
अस्पताल प्रशासन को मामले की जानकारी मिलने के बाद आंतरिक स्तर पर जांच की गई, जिसके बाद पुलिस को शिकायत सौंपी गई।
मोबाइल फोन से मिले कथित सबूत
प्राथमिक जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन जब्त किया। अधिकारियों के अनुसार, मोबाइल फोन की जांच में कई ऐसी तस्वीरें मिलने का दावा किया गया है, जो जांच का हिस्सा बनाई गई हैं।
पुलिस अब डिजिटल फॉरेंसिक जांच के माध्यम से यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि तस्वीरें कब ली गईं, उन्हें कहां साझा किया गया और क्या किसी अन्य व्यक्ति की भी इस मामले में भूमिका थी।
महिला आयोग ने लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य महिला आयोग ने भी संज्ञान लिया। आयोग ने पुलिस और अस्पताल प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
महिला अधिकारों और मानव गरिमा से जुड़े संगठनों ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
अस्पताल की शिकायत के आधार पर बीदर न्यू टाउन पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।
पुलिस ने आरोपी मुनीर अहमद को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
अस्पताल प्रशासन ने शुरू की आंतरिक जांच
BRIMS प्रशासन ने भी इस घटना को गंभीरता से लेते हुए आंतरिक जांच शुरू कर दी है। अस्पताल अधिकारियों का कहना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।
मानव गरिमा और चिकित्सा नैतिकता पर उठे सवाल
इस घटना ने अस्पतालों में मरीजों और मृतकों की गोपनीयता तथा मानव गरिमा की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि चिकित्सा संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों पर नैतिक और कानूनी जिम्मेदारियां होती हैं, जिनका उल्लंघन गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
फिलहाल पुलिस डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
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