प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन को लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद संभालने पर बधाई दी है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर संदेश साझा करते हुए भारत और डेनमार्क के बीच मजबूत संबंधों तथा हरित रणनीतिक साझेदारी (Green Strategic Partnership) को और आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और डेनमार्क के रिश्ते आपसी विश्वास, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और टिकाऊ भविष्य के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित हैं।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में लिखा:
“मेरी मित्र सुश्री मेटे फ्रेडरिकसेन को डेनमार्क की प्रधानमंत्री के रूप में लगातार तीसरी बार पदभार ग्रहण करने पर हार्दिक बधाई।”
उन्होंने आगे कहा:
“भारत और डेनमार्क के बीच एक मजबूत साझेदारी है, जो आपसी विश्वास, साझा मूल्यों और एक टिकाऊ भविष्य के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है। मैं प्रधानमंत्री फ्रेडरिकसेन के साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूँ, ताकि भारत-डेनमार्क हरित रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया जा सके और हमारे लोगों के लाभ के लिए हमारे सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाया जा सके।”
भारत-डेनमार्क संबंधों में ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का महत्व
भारत और डेनमार्क ने वर्ष 2020 में ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन, हरित ऊर्जा, स्वच्छ तकनीक, सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाना है।
Congratulations to my friend Ms. Mette Frederiksen on assuming office as the Prime Minister of Denmark for a remarkable third consecutive term.
India and Denmark share an enduring partnership founded on mutual trust, shared values and a common commitment to a sustainable future.…
— Narendra Modi (@narendramodi) June 3, 2026
इस साझेदारी के तहत दोनों देश:
- नवीकरणीय ऊर्जा
- ग्रीन हाइड्रोजन
- जल प्रबंधन
- स्वच्छ प्रौद्योगिकी
- सतत शहरी विकास
- जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीतियों
जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं।
भारत और डेनमार्क के बीच मजबूत आर्थिक संबंध
भारत और डेनमार्क के बीच व्यापार और निवेश संबंध भी लगातार मजबूत हो रहे हैं। डेनमार्क की कई कंपनियाँ भारत में ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, फार्मास्यूटिकल्स और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं।
वहीं भारतीय कंपनियाँ भी यूरोप में अपने विस्तार के लिए डेनमार्क को एक महत्वपूर्ण साझेदार मानती हैं।
जलवायु और हरित विकास पर साझा दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री मोदी और मेटे फ्रेडरिकसेन दोनों ही वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत और डेनमार्क के बीच ग्रीन टेक्नोलॉजी, ऑफशोर विंड एनर्जी और सस्टेनेबल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में सहयोग और बढ़ सकता है।
वैश्विक मंचों पर भी बढ़ रहा सहयोग
भारत और डेनमार्क संयुक्त राष्ट्र, जलवायु सम्मेलन और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी कई वैश्विक मुद्दों पर सहयोग करते हैं।
दोनों देश नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, हरित विकास और टिकाऊ आर्थिक वृद्धि के पक्षधर माने जाते हैं।
नई सरकार के साथ संबंधों को नई ऊँचाई देने की तैयारी
मेटे फ्रेडरिकसेन के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह डेनमार्क के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने का इच्छुक है।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच ऊर्जा, निवेश, नवाचार और हरित विकास से जुड़े नए समझौते देखने को मिल सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का बधाई संदेश इसी दिशा में भारत की सकारात्मक और दीर्घकालिक साझेदारी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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