उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध श्री बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान की रकम के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं को लेकर कार्रवाई तेज हो गई है। श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति यानी BKTC ने अध्यक्ष कार्यालय में तैनात पर्सनल असिस्टेंट प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके बाद उनके खिलाफ बद्रीनाथ पुलिस थाने में आपराधिक मामला भी दर्ज किया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर उत्तराखंड सरकार ने तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की है। इस समिति को 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट और अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपनी होंगी।
सोशल मीडिया के आरोपों से शुरू हुआ बद्रीनाथ चढ़ावा विवाद
यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित अनियमितताओं से जुड़े आरोप सामने आए।
इसके बाद भैरव सेना के संस्थापक संदीप खत्री ने मामले में निष्पक्ष जांच और FIR दर्ज करने की मांग करते हुए शिकायत दी। शिकायत में दावा किया गया कि कथित घटना चढ़ावे की गिनती के दौरान हुई और इससे जुड़े दृश्य CCTV में रिकॉर्ड हुए हो सकते हैं। हालांकि शुरुआत में अधिकारियों ने इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की थी।
विवाद बढ़ने के बाद BKTC ने मामला गंभीरता से लिया और आंतरिक जांच शुरू कर दी।
3 जुलाई को जारी हुआ था कारण बताओ नोटिस
BKTC के अनुसार, प्रमोद नौटियाल के खिलाफ आधिकारिक जिम्मेदारियों के निर्वहन में गंभीर अनियमितताओं के प्रथमदृष्टया आरोप सामने आने के बाद 3 जुलाई 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
इसके साथ ही निष्पक्ष और विस्तृत जांच के लिए चार सदस्यीय आंतरिक जांच समिति का गठन किया गया। समिति ने नौटियाल के जवाब और उपलब्ध प्रारंभिक सामग्री की जांच की।
BKTC के मुताबिक, शुरुआती जांच में आरोपों में प्रथमदृष्टया आधार मिला और समिति ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की।
जांच प्रभावित होने की आशंका पर किया गया सस्पेंड
जांच समिति ने माना कि प्रमोद नौटियाल के वर्तमान पद पर बने रहने से चल रही जांच की निष्पक्षता प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
इसी आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें चमोली जिले के ज्योतिर्मठ स्थित BKTC कार्यालय से संबद्ध किया गया है। उन्हें सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ने और जांच में पूरा सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
निलंबन के बाद प्रमोद नौटियाल पर FIR दर्ज
मामले में अब एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम भी सामने आया है। निलंबन के बाद प्रमोद नौटियाल के खिलाफ बद्रीनाथ पुलिस थाने में FIR दर्ज की गई है।
पुलिस के अनुसार, मामला भारतीय न्याय संहिता की:
धारा 306 — कर्मचारी या सेवक द्वारा नियोक्ता के कब्जे की संपत्ति की चोरी से संबंधित प्रावधान
और
धारा 316(5) — आपराधिक विश्वासघात से संबंधित प्रावधान
के तहत दर्ज किया गया है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि FIR और प्रारंभिक जांच के निष्कर्ष अंतिम दोषसिद्धि नहीं हैं। आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम फैसला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
2 जुलाई की घटना को लेकर क्या है आरोप?
FIR से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, आरोप 2 जुलाई को मंदिर की थाली भेंट यानी चढ़ावे की गिनती से जुड़े एक घटनाक्रम पर केंद्रित हैं।
आरोप है कि सुबह करीब 9 बजे से 9:30 बजे के बीच चढ़ावे की गिनती के दौरान मंदिर की रकम को निर्धारित प्रक्रिया से बाहर ले जाया गया। प्रारंभिक जांच के बाद BKTC ने पहले विभागीय कार्रवाई की और फिर कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस का रुख किया।
फिलहाल पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है और कथित वित्तीय नुकसान की अंतिम राशि की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
चार सदस्यीय BKTC टीम ने शुरू की जांच
मंदिर समिति की चार सदस्यीय टीम बद्रीनाथ पहुंचकर जांच शुरू कर चुकी है। टीम में वित्तीय, कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं से जुड़े अधिकारियों को शामिल किया गया है।
BKTC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोहन सिंह रांगड़ के अनुसार, जांच में CCTV फुटेज, संबंधित कर्मचारियों के बयान और आवश्यक दस्तावेजों तथा रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है। चार लोगों को नोटिस जारी किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
CCTV कैमरे बदलने पर क्यों उठे सवाल?
विवाद के बीच मंदिर परिसर में CCTV कैमरे बदले जाने को लेकर भी सवाल उठे।
BKTC के CEO सोहन सिंह रांगड़ ने स्पष्ट किया कि कैमरों को बदलना नियमित अपग्रेड प्रक्रिया का हिस्सा था। उनके अनुसार मंदिर को नए हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे मिले थे, इसलिए पुराने कैमरों को बदला गया।
उन्होंने यह भी कहा कि पुराने DVR सिस्टम की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी गई है और उसे जांच में इस्तेमाल किया जा सकता है।
धामी सरकार ने बनाई तीन सदस्यीय हाई-लेवल कमेटी
BKTC की आंतरिक जांच के समानांतर उत्तराखंड सरकार ने भी स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय समिति की अध्यक्षता गढ़वाल मंडल के कमिश्नर आनंद स्वरूप करेंगे। समिति में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रबंध निदेशक संदीप तिवारी और स्वास्थ्य महानिदेशालय के निदेशक वित्त जगत सिंह चौहान को सदस्य बनाया गया है।
पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल की ओर से जारी आदेश के तहत समिति पूरे मामले की व्यापक जांच करेगी।
15 दिन में सरकार को सौंपनी होगी रिपोर्ट
सरकारी जांच समिति को 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
समिति केवल यह नहीं देखेगी कि कथित अनियमितता हुई या नहीं, बल्कि मंदिर के चढ़ावे और दान प्रबंधन की मौजूदा व्यवस्था में संभावित कमियों की भी पहचान करेगी।
जांच समिति को आवश्यकता पड़ने पर वित्तीय, तकनीकी, कानूनी या अन्य विशेषज्ञों की मदद लेने की अनुमति दी गई है। उससे भविष्य में दान प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने के उपाय सुझाने को भी कहा गया है।
कौन हैं प्रमोद नौटियाल?
प्रमोद नौटियाल BKTC के कर्मचारी हैं और अध्यक्ष कार्यालय में पर्सनल असिस्टेंट के रूप में तैनात थे।
मीडिया और सोशल मीडिया पर उन्हें कई जगह BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का “पर्सनल सेक्रेटरी” बताया गया। हालांकि हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि नौटियाल उनके निजी तौर पर नियुक्त कर्मचारी नहीं, बल्कि मंदिर समिति के नियमित कर्मचारी हैं।
इसीलिए खबर में “BKTC अध्यक्ष कार्यालय में तैनात पर्सनल असिस्टेंट” लिखना सबसे सटीक होगा।
BKTC अध्यक्ष बोले- भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस
BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा है कि मंदिर समिति भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाती है।
उनके अनुसार जांच में किसी कर्मचारी की दोषपूर्ण भूमिका साबित होने पर उसके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एक साथ चल रही विभागीय, सरकारी और पुलिस जांच
बद्रीनाथ धाम के चढ़ावा विवाद में अब तीन स्तरों पर प्रक्रिया चल रही है।
एक ओर BKTC की चार सदस्यीय समिति विभागीय जांच कर रही है। दूसरी ओर गढ़वाल कमिश्नर की अध्यक्षता वाली सरकारी समिति पूरे मामले की स्वतंत्र जांच करेगी। इसके साथ ही FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने आपराधिक जांच भी शुरू कर दी है।
अब सभी की नजर CCTV रिकॉर्डिंग, कर्मचारियों के बयानों, दान रजिस्टरों, कैश हैंडलिंग प्रक्रिया और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच पर है।
अब 15 दिन की रिपोर्ट पर टिकी नजर
बद्रीनाथ धाम के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के मामले ने मंदिरों में दान प्रबंधन की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
प्रमोद नौटियाल को निलंबित कर दिया गया है, उनके खिलाफ FIR दर्ज हो चुकी है और दो अलग-अलग जांच समितियां मामले की पड़ताल कर रही हैं। हालांकि अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।
अब गढ़वाल कमिश्नर की अध्यक्षता वाली समिति की 15 दिन में आने वाली रिपोर्ट और पुलिस जांच से यह स्पष्ट होगा कि वास्तव में क्या हुआ, किसी वित्तीय नुकसान की सीमा क्या थी और मामले में अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
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