राजस्थान के झुंझुनूं जिले के मंडावा क्षेत्र में बुधवार, 8 जुलाई 2026 को बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला। भारतीय वायुसेना के 22 वर्षीय जवान आर्यन झाझड़िया का पार्थिव शरीर जब तिरंगे में लिपटकर उनके पैतृक गांव पीपल का बास पहुंचा तो पूरा इलाका शोक में डूब गया।
हजारों लोग युवा जवान के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। मंडावा से पीपल का बास तक निकाली गई अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने फूल बरसाए और हाथ जोड़कर आर्यन को श्रद्धांजलि दी। “भारत माता की जय” और “आर्यन अमर रहे” के नारों के बीच उनका सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
आर्यन झाझड़िया का 5 जुलाई को चेन्नई में ड्यूटी के दौरान पानी में डूबने से निधन हो गया था। वह भारतीय वायुसेना में कार्यरत थे और वर्तमान में चेन्नई में तैनात थे। जवान की असमय मौत की खबर मिलते ही परिवार के साथ पूरा पीपल का बास गांव शोक में डूब गया था।
तिरंगे में लिपटकर पैतृक गांव पहुंचा आर्यन का पार्थिव शरीर
आर्यन झाझड़िया का पार्थिव शरीर मंगलवार रात विमान से दिल्ली लाया गया। वहां से बुधवार को सड़क मार्ग से उनके पैतृक क्षेत्र पहुंचाया गया।
जैसे ही तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह गांव पहुंची, परिवार और ग्रामीणों का सब्र टूट गया। घर के आंगन से लेकर गांव की गलियों तक मातम छा गया। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे पहुंचे।
जिस बेटे के जल्द छुट्टी पर घर लौटने का परिवार इंतजार कर रहा था, उसे अंतिम बार तिरंगे में लिपटा देखकर हर आंख नम हो गई।
मंडावा से पीपल का बास तक निकली तिरंगा यात्रा
आर्यन को अंतिम विदाई देने के लिए मंडावा से उनके पैतृक गांव पीपल का बास तक तिरंगा यात्रा निकाली गई।
रास्ते भर लोग सड़क के दोनों ओर खड़े होकर युवा जवान के अंतिम दर्शन करते रहे। कई स्थानों पर लोगों ने पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किए।
गांव की छतों, गलियों और सड़कों पर बड़ी संख्या में लोग दिखाई दिए। अंतिम यात्रा के दौरान “भारत माता की जय” और “आर्यन अमर रहे” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
5 जुलाई को चेन्नई में हुआ था हादसा
आर्यन झाझड़िया का 5 जुलाई 2026 को चेन्नई में निधन हुआ था।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ड्यूटी के दौरान पानी में डूबने से उनकी जान चली गई। घटना के बाद आवश्यक प्रक्रियाएं और पोस्टमार्टम पूरा किया गया। परिवार की ओर से उनके मामा चेन्नई पहुंचे थे।
इसके बाद भारतीय वायुसेना की व्यवस्था के तहत पार्थिव शरीर को पहले दिल्ली और फिर पैतृक गांव लाया गया।
वायुसेना की टुकड़ी ने दिया गार्ड ऑफ ऑनर
अंतिम संस्कार स्थल पर भारतीय वायुसेना के जवानों ने अपने दिवंगत साथी आर्यन झाझड़िया को सैन्य परंपराओं के अनुसार अंतिम सलामी दी।
गार्ड ऑफ ऑनर के दौरान वहां मौजूद हजारों लोग भावुक हो उठे। सैन्य सम्मान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आर्यन की पार्थिव देह का अंतिम संस्कार किया गया।
पैतृक गांव में राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ हुए अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने अर्पित की श्रद्धांजलि
अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार में स्थानीय विधायक रीटा चौधरी समेत विभिन्न जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी रही।
प्रतिनिधियों ने पुष्प अर्पित कर युवा वायुसेना जवान को श्रद्धांजलि दी और शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया। स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधियों ने भी आर्यन के निधन को पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
14 जुलाई को आने वाला था 23वां जन्मदिन
आर्यन की मौत से जुड़ी सबसे भावुक बात यह है कि 14 जुलाई को उनका 23वां जन्मदिन आने वाला था।
परिवार उनके घर आने और जन्मदिन मनाने की तैयारी कर रहा था। रिपोर्टों के मुताबिक आर्यन जल्द छुट्टी पर घर आने वाले थे। लेकिन जिस बेटे के घर आने का परिवार बेसब्री से इंतजार कर रहा था, उसका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर गांव पहुंचा।
इस दृश्य ने पूरे गांव को झकझोर दिया।
भारतीय वायुसेना में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर थे कार्यरत
रिपोर्टों के अनुसार, आर्यन झाझड़िया भारतीय वायुसेना में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत थे।
उन्होंने हनुमानगढ़ के संगरिया स्थित स्कूल से 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद वायुसेना में जाने की तैयारी शुरू की थी। करीब ढाई वर्ष पहले उनका भारतीय वायुसेना में चयन हुआ था।
कम उम्र में देश सेवा का सपना पूरा करने वाले आर्यन को उनके परिचित मेहनती, अनुशासित और मिलनसार युवा के रूप में याद कर रहे हैं।
परिवार का इकलौता बेटा था आर्यन
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, आर्यन अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे और अविवाहित थे। परिवार में उनकी एक बड़ी बहन भी है।
युवा बेटे के असमय चले जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अंतिम विदाई के दौरान परिवार के सदस्यों को संभालना भी मुश्किल हो रहा था।
गांव के लोगों का कहना है कि आर्यन ने बहुत कम उम्र में वायुसेना में चयनित होकर न केवल परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया था।
पूरे गांव के लिए था गर्व का बेटा
पीपल का बास गांव के लोगों के लिए आर्यन केवल एक परिवार का बेटा नहीं बल्कि पूरे गांव का गौरव था।
भारतीय वायुसेना में चयन के बाद से ही गांव के युवाओं के लिए वह प्रेरणा बने हुए थे। उनके निधन की खबर फैलने के बाद आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग परिवार को सांत्वना देने पहुंचे।
बुधवार को अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ ने यह दिखाया कि आर्यन का अपने क्षेत्र के लोगों के साथ कितना गहरा जुड़ाव था।
अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब
आर्यन की अंतिम यात्रा में युवाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। तिरंगा लिए युवा अंतिम यात्रा के साथ चलते रहे।
कई लोगों ने रास्ते में फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी। लोगों ने नम आंखों से युवा वायुसेना जवान को विदाई दी।
स्थानीय मीडिया ने अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ को जनसैलाब के रूप में वर्णित किया।
अधूरा रह गया घर लौटने का इंतजार
आर्यन की कहानी का सबसे दर्दनाक पहलू परिवार का वह इंतजार है, जो कभी पूरा नहीं हो सका।
घर में कुछ ही दिनों बाद आने वाले उनके जन्मदिन की तैयारियों की चर्चा थी। परिवार को उम्मीद थी कि वह छुट्टी लेकर आएंगे और सभी साथ मिलकर खुशियां मनाएंगे।
लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। 22 वर्ष की उम्र में आर्यन का असमय निधन हो गया और वह अंतिम बार तिरंगे में लिपटकर अपने गांव लौटे।
‘भारत माता की जय’ के नारों के बीच अंतिम विदाई
अंतिम यात्रा के दौरान पूरे क्षेत्र में देशभक्ति और शोक का भाव एक साथ दिखाई दिया।
एक तरफ परिवार अपने जवान बेटे को खोने के गहरे दुख में था, तो दूसरी ओर हजारों लोग भारतीय वायुसेना के जवान के सम्मान में हाथों में तिरंगा लेकर खड़े थे।
सैन्य सलामी के बाद आर्यन की पार्थिव देह पंचतत्व में विलीन हो गई। इसके साथ ही मंडावा क्षेत्र ने अपने 22 वर्षीय युवा सपूत को अंतिम विदाई दी।
आर्यन झाझड़िया का असमय निधन उनके परिवार और पूरे झुंझुनूं क्षेत्र के लिए गहरी क्षति है। बेहद कम उम्र में भारतीय वायुसेना का हिस्सा बनकर देश सेवा का सपना पूरा करने वाले आर्यन की स्मृतियां उनके परिवार, गांव और साथियों के बीच हमेशा जीवित रहेंगी।
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