प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो कुछ समय के लिए फेसबुक से हटाए जाने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। संसद की संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा के CEO मार्क जकरबर्ग से व्यक्तिगत रूप से माफी मांगने को कहा है। साथ ही कंपनी को घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने मेटा को चेतावनी दी है कि संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने पर कंपनी को भारत में मिलने वाले ‘सेफ हार्बर’ संरक्षण की समीक्षा की जा सकती है। समिति ने प्रधानमंत्री का वीडियो हटाए जाने को गंभीर मामला बताते हुए कहा कि किसी निर्वाचित प्रधानमंत्री की आधिकारिक सामग्री पर इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था और डिजिटल जवाबदेही से जुड़े सवाल खड़े करती है।
तेलंगना पुलिस द्वारा किए गए @Meta पर केस जिसमें प्रधानमंत्री मोदी जी के खिलाफ AI generated objectionable content हैं, बच्चों के,महिलाओं के content है तथा उसी हैदराबाद पुलिस द्वारा वित्तीय धोखाधड़ी के एप @Google पर किये केस पर भारत सरकार Safe harbour protection IT act 79, 79(1),…
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) August 5, 2026
मार्क जकरबर्ग से व्यक्तिगत माफी की मांग
मेटा के प्रतिनिधियों ने संसदीय समिति के सामने वीडियो हटाए जाने को लेकर खेद जताया था। हालांकि समिति ने कंपनी के सामान्य स्पष्टीकरण और माफी को पर्याप्त नहीं माना। समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा कि मेटा के संस्थापक और CEO मार्क जकरबर्ग को इस घटना की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए व्यक्तिगत रूप से माफी मांगनी चाहिए।
समिति चाहती है कि मेटा केवल तकनीकी गड़बड़ी बताकर मामले को समाप्त न करे, बल्कि यह भी स्पष्ट करे कि प्रधानमंत्री के आधिकारिक अकाउंट पर पोस्ट किए गए वीडियो के खिलाफ कार्रवाई कैसे और किस स्तर पर हुई। इसके साथ ही वीडियो हटाने के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों या अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी भी मांगी गई है।
क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वीडियो से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे युवाओं और ‘Gen Z’ को संबोधित किया था। प्रधानमंत्री ने वीडियो के माध्यम से युवाओं की चिंताओं को स्वीकार करते हुए पेपर लीक के मामलों में सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था।
वीडियो को पहले इंस्टाग्राम और बाद में फेसबुक पर साझा किया गया था। इसके बाद प्रधानमंत्री का वीडियो कुछ घंटों के लिए फेसबुक पर उपलब्ध नहीं रहा। रिपोर्टों के अनुसार मेटा ने संसदीय समिति के सामने माना कि पोस्ट करीब पांच घंटे तक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं थी। बाद में वीडियो को दोबारा बहाल कर दिया गया।
घटना सामने आने के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मेटा के अधिकारियों से जवाब मांगा था। मंत्रालय ने सवाल उठाया था कि भारत के प्रधानमंत्री के अधिकृत अकाउंट से प्रकाशित सामग्री को कंपनी की प्रणाली ने किस आधार पर प्रतिबंधित या हटाया।
Meta ने वीडियो हटने की क्या वजह बताई?
मेटा ने सरकार और संसदीय समिति को बताया कि प्रधानमंत्री के वीडियो पर हुई कार्रवाई किसी नीतिगत निर्णय का परिणाम नहीं थी। कंपनी के अनुसार ऑटोमैटेड कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम और तकनीकी प्रक्रिया में हुई गलती के कारण वीडियो अस्थायी रूप से हट गया या प्रतिबंधित हो गया था।
मेटा ने घटना पर खेद व्यक्त करते हुए भविष्य में इस तरह की गलती रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करने का भरोसा दिया है। कंपनी ने यह भी संकेत दिया कि प्रधानमंत्री, संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों और अन्य हाई-प्रोफाइल सत्यापित अकाउंट्स से जुड़ी सामग्री पर कार्रवाई से पहले वरिष्ठ स्तर पर समीक्षा की व्यवस्था मजबूत की जाएगी।
हालांकि आईटी मंत्रालय और संसदीय समिति ने मेटा के शुरुआती स्पष्टीकरण को अपर्याप्त माना। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना था कि केवल तकनीकी गड़बड़ी का हवाला देना पर्याप्त नहीं है और कंपनी को अपनी कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली की जवाबदेही तय करनी होगी।
क्या होता है ‘सेफ हार्बर’ संरक्षण?
भारत के सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के अंतर्गत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और दूसरे डिजिटल इंटरमीडियरी को कुछ शर्तों के साथ ‘सेफ हार्बर’ संरक्षण मिलता है। इसके तहत प्लेटफॉर्म को आमतौर पर उसके उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट की गई प्रत्येक सामग्री के लिए सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता।
लेकिन यह कानूनी सुरक्षा बिना शर्त नहीं होती। सोशल मीडिया कंपनियों को भारत के कानूनों, अदालतों और सक्षम सरकारी अधिकारियों के आदेशों का पालन करना होता है। साथ ही उन्हें शिकायत निवारण, अवैध सामग्री पर कार्रवाई और निर्धारित डिजिटल नियमों का अनुपालन भी करना पड़ता है।
संसदीय समिति ने चेतावनी दी है कि मेटा संतोषजनक जवाब और कार्रवाई नहीं देता है तो उसके सेफ हार्बर संरक्षण की समीक्षा की सिफारिश की जा सकती है। ऐसा होने पर फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म और उसके संबंधित अधिकारियों की कानूनी जवाबदेही बढ़ सकती है।
क्या सीधे दर्ज हो सकती है FIR?
सेफ हार्बर संरक्षण की समीक्षा या समाप्ति के बाद किसी प्लेटफॉर्म को अपने उपयोगकर्ताओं की सामग्री से जुड़े मामलों में मिलने वाली कानूनी सुरक्षा कमजोर हो सकती है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर मामले में कंपनी के CEO या अधिकारियों के खिलाफ स्वतः FIR दर्ज हो जाएगी।
किसी अधिकारी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के लिए संबंधित कानून, उसकी भूमिका, जानकारी और मामले में प्रत्यक्ष जिम्मेदारी जैसे तथ्यों की जांच आवश्यक होगी। इसके बावजूद संसदीय समिति की चेतावनी मेटा के लिए गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि भारत फेसबुक और इंस्टाग्राम के सबसे बड़े बाजारों में शामिल है।
Meta की वैश्विक टीम भी तलब
सरकार ने मेटा की वैश्विक टीम को 5 और 6 अगस्त 2026 को अधिकारियों के सामने उपस्थित होकर इस विवाद पर विस्तृत स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया है। बैठक में प्रधानमंत्री की पोस्ट पर हुई कार्रवाई के अलावा सत्यापित अकाउंट्स की सुरक्षा, कंटेंट मॉडरेशन और प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक सामग्री की रोकथाम जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
संसदीय समिति ने घटना को क्यों माना गंभीर?
समिति का कहना है कि प्रधानमंत्री का आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट केवल किसी व्यक्तिगत यूजर का अकाउंट नहीं है। इसके माध्यम से सरकारी नीतियों, राष्ट्रीय मुद्दों और नागरिकों के लिए संदेश साझा किए जाते हैं। ऐसे में किसी ऑटोमैटेड प्रणाली द्वारा सामग्री हटाया जाना मेटा के मॉडरेशन सिस्टम की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।
संसदीय समिति ने कंपनी से यह भी बताने को कहा है कि उसकी AI आधारित प्रणाली राजनीतिक और सरकारी सामग्री की पहचान किस तरह करती है। समिति का जोर इस बात पर है कि अंतरराष्ट्रीय सोशल मीडिया कंपनियों की स्वचालित तकनीकें भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों और संवैधानिक पदों से जुड़ी सामग्री के मामले में मनमानी कार्रवाई न करें।
अब आगे क्या होगा?
मेटा को निर्धारित समय के भीतर संसदीय समिति के सामने अपनी कार्रवाई की जानकारी देनी होगी। कंपनी को यह स्पष्ट करना होगा कि वीडियो हटाने के लिए कौन जिम्मेदार था, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या बदलाव किए गए हैं और क्या मार्क जकरबर्ग व्यक्तिगत रूप से माफी मांगेंगे।
मेटा का जवाब संतोषजनक नहीं होने पर संसदीय समिति कंपनी के खिलाफ कानूनी और नियामक कार्रवाई की सिफारिश कर सकती है। इसमें सेफ हार्बर संरक्षण की समीक्षा सहित अन्य कदम शामिल हो सकते हैं।
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