केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। डेढ़ साल के मासूम अर्शिद की मौत के बाद आई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बच्चे के शरीर पर 91 चोटों के निशान मिलने का दावा किया गया है। मामले में पुलिस ने बच्चे की माँ अखिला और उसके लिव-इन पार्टनर अश्कर को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच और पूछताछ में सामने आया है कि बच्चे को लंबे समय से प्रताड़ित किया जा रहा था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गंभीर शारीरिक चोटों के संकेत मिलने के बाद मामला और भी गंभीर हो गया है।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया?
रिपोर्ट्स के अनुसार, पोस्टमॉर्टम जांच में बच्चे के सिर, छाती और शरीर के विभिन्न हिस्सों पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए।
जांच में यह भी सामने आया कि बच्चे की कई पसलियां टूटी हुई थीं और आंतरिक अंगों को नुकसान पहुंचा था। रिपोर्ट में शरीर के संवेदनशील हिस्सों और पैरों के तलवों पर जलने जैसे निशानों का भी उल्लेख किया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक, सभी चोटों का विस्तृत फोरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है।
आरोपी ने क्या कबूला?
पुलिस पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपी अश्कर ने कथित रूप से बच्चे के साथ मारपीट करने की बात स्वीकार की है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी ने बताया कि वह पिछले कुछ समय से बच्चे को प्रताड़ित कर रहा था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि बच्चे के साथ कथित अत्याचार कब से हो रहा था और इसके पीछे क्या कारण थे।
पहले से टूटी हुई थीं बच्चे की हड्डियां
जांच में यह भी सामने आया कि बच्चे के दोनों हाथ पहले से घायल थे और उन पर प्लास्टर चढ़ा हुआ था।
पुलिस के अनुसार, पड़ोसियों और आसपास के लोगों को चोटों के बारे में अलग-अलग कारण बताए जाते थे। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि पुरानी चोटें कैसे लगी थीं और क्या उनके बारे में पहले किसी को जानकारी थी।
माँ की भूमिका पर भी सवाल
पुलिस का कहना है कि बच्चे की माँ अखिला को कथित प्रताड़ना की जानकारी होने के बावजूद उसने बच्चे को बचाने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।
इसी आधार पर पुलिस ने उसे भी मामले में सह-आरोपी बनाया है। दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस डिजिटल तथा फोरेंसिक साक्ष्य भी जुटा रही है।
सोशल मीडिया पर बढ़ा आक्रोश
मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला है। कई लोगों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
बाल अधिकारों से जुड़े संगठनों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच और बच्चों के खिलाफ हिंसा रोकने के लिए मजबूत तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
बाल संरक्षण व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा और बाल संरक्षण तंत्र को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी बच्चे के शरीर पर बार-बार चोटों के निशान दिखाई दें या उसके व्यवहार में असामान्य बदलाव नजर आए, तो पड़ोसियों, शिक्षकों, स्वास्थ्यकर्मियों और परिवार के सदस्यों को सतर्क होना चाहिए।
पुलिस जांच जारी
पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और मामले में आगे की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपपत्र तैयार किया जाएगा।
फिलहाल पूरे केरल में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है और लोग मासूम अर्शिद के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं।
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