साल 2025 देश की सुरक्षा एजेंसियों, खासकर राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के लिए बड़ी कामयाबियों से भरा रहा। इस साल NIA ने न केवल अदालतों में अपने मामलों को मजबूती से रखा, बल्कि देश और विदेश में छिपे आतंकियों व अपराधियों तक भी प्रभावी पहुँच बनाई। आँकड़ों के अनुसार, एजेंसी ने 92 प्रतिशत से अधिक मामलों में दोषियों को सजा दिलवाई, जो उसकी जाँच क्षमता और कानूनी तैयारी की ताकत को दिखाता है।
इस वर्ष NIA की सबसे बड़ी उपलब्धियों में 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण शामिल रहा। अप्रैल 2025 में उसे अमेरिका से भारत लाया गया। तहव्वुर राणा पर 2008 के मुंबई हमलों की साजिश रचने का आरोप है, जिसमें 166 लोगों की जान गई थी। उसका भारत आना उन सैकड़ों परिवारों के लिए इंसाफ की उम्मीद माना जा रहा है, जिन्होंने उस हमले में अपने प्रियजनों को खोया था।
बदलते दौर के साथ NIA ने अपनी जाँच प्रक्रिया को भी पूरी तरह आधुनिक बनाया है। एजेंसी ने दो विशेष डिजिटल डेटाबेस सिस्टम विकसित किए हैं। पहला सिस्टम चोरी या लूटे गए सरकारी हथियारों की निगरानी के लिए बनाया गया है, जिससे किसी भी हथियार की लोकेशन और इस्तेमाल पर तुरंत नजर रखी जा सके। दूसरा सिस्टम अपराधियों और उनके नेटवर्क को ट्रैक करने के लिए है, ताकि राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियाँ आपस में तेजी से सूचनाएँ साझा कर सकें।
डिजिटल अपराध और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए टेरर फंडिंग पर लगाम कसने के लिए भी NIA ने बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने अपने अधिकारियों को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया है, जिससे ऑनलाइन लेन-देन, क्रिप्टो वॉलेट और अंतरराष्ट्रीय फाइनेंशियल नेटवर्क के जरिए होने वाली संदिग्ध गतिविधियों को पकड़ा जा सके।
NIA SUCCESSFULLY WORKS OUT PAHALGAM & DELHI TERROR ATTACK PROBES / NOTCHES MANY MILESTONE SUCCESSES, INCLUDING 26/11 MUMBAI ATTACKS PLOTTER TAHAWWUR RANA’S EXTRADITION, IN 2025. pic.twitter.com/ddZjKEPGZz
— NIA India (@NIA_India) December 31, 2025
आतंकी हमलों की जाँच में भी NIA ने इस साल तेज़ और सटीक कार्रवाई की। अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले की जाँच पूरी कर ली गई है। इस मामले में लश्कर-ए-तैयबा और उससे जुड़े आतंकी संगठन TRF के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। एजेंसी ने उन सभी आतंकियों की पहचान कर ली है, जिन्होंने धर्म के नाम पर निर्दोष लोगों की जान ली।
इसी तरह, दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार बम धमाके के मामले में भी NIA की कार्रवाई बेहद तेज़ रही। हमले के केवल दो महीनों के भीतर एजेंसी ने 9 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जिससे यह साफ हो गया कि बड़े शहरों में हुए आतंकी हमलों पर अब देर नहीं, बल्कि निर्णायक कार्रवाई की जा रही है।
साल 2025 में NIA ने जेल में बैठे गैंगस्टरों और उनके आतंकी नेटवर्क पर भी बड़ा प्रहार किया। इसका सबसे बड़ा उदाहरण गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भाई अनमोल बिश्नोई की गिरफ्तारी रही, जिसे एजेंसी ने विदेश से डिपोर्ट कराकर भारत लाया। इसके साथ ही खालिस्तानी आतंकी नेटवर्क से जुड़े भगोड़े अपराधियों, जैसे गोल्डी बरार, के ठिकानों पर देशभर में छापेमारी कर उनके नेटवर्क को कमजोर किया गया।
आँकड़ों की बात करें तो इस साल NIA ने 55 नए मामले दर्ज किए और 276 आरोपितों को गिरफ्तार किया। यह आंकड़े दिखाते हैं कि एजेंसी अब सिर्फ जाँच तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठित अपराध और आतंकवाद के पूरे ढांचे को तोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।
नक्सलवाद के खिलाफ भी NIA ने सख्त रुख अपनाया है। भारत सरकार ने मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य तय किया है। इसे हासिल करने के लिए NIA ने CRPF और राज्य पुलिस बलों के साथ मिलकर नक्सल प्रभावित इलाकों और जंगलों में बड़े अभियान चलाए हैं।
इसके अलावा, मानव तस्करी और ‘डंकी रूट’ गिरोहों के खिलाफ भी एजेंसी ने कड़ा एक्शन लिया। ये गिरोह युवाओं को गैरकानूनी और खतरनाक रास्तों से विदेश भेजने का लालच देते थे। NIA ने ऐसे कई नेटवर्क का पर्दाफाश कर उनके सरगनाओं को गिरफ्तार किया और इस अमानवीय धंधे पर बड़ी चोट की।
NIA की 2025 की रिपोर्ट कार्ड साफ संकेत देती है कि अब भारत के खिलाफ साजिश रचने वालों के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं बचा है। चाहे अपराधी सात समंदर पार बैठा हो या फिर डिजिटल दुनिया में अपनी पहचान छिपाने की कोशिश कर रहा हो, एजेंसी की तकनीक और अंतरराष्ट्रीय पहुँच उसे ढूँढ निकाल रही है। 92 प्रतिशत की कनविक्शन रेट यह साबित करती है कि NIA न केवल अपराधियों को पकड़ती है, बल्कि उनके खिलाफ इतने मजबूत सबूत पेश करती है कि वे कानून के शिकंजे से बच नहीं पाते।
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