अमेरिका की संघीय जाँच एजेंसी FBI ने भारतीय मूल के कथित गैंगस्टर नीतीश कौशल को अपनी मोस्ट वांटेड सूची में शामिल किया है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि नीतीश कौशल, जग्गू भगवानपुरिया ऑर्गनाइज्ड क्राइम ग्रुप यानी भगवानपुरिया OCG से जुड़ा हुआ था और संगठन की ओर से हिंसक तथा संगठित आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा।
FBI के अनुसार, भगवानपुरिया OCG की शुरुआत भारत के पंजाब राज्य में हुई थी, लेकिन समय के साथ इसका नेटवर्क अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड सहित कई देशों तक फैल गया। अमेरिकी जाँच एजेंसियों ने इस नेटवर्क पर हत्या, अपहरण, रंगदारी, ड्रग्स तस्करी, हथियारों की सप्लाई, मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में शामिल होने का आरोप लगाया है।
Nitish Kaushal is #wanted by the #FBI for his alleged involvement in a transnational criminal organization engaged in, among other things, acts involving murder, kidnapping, drug trafficking, extortion, weapons trafficking, money laundering, and human smuggling. This… pic.twitter.com/xuEXpJIx6u
— FBI Most Wanted (@FBIMostWanted) July 14, 2026
नीतीश कौशल पर क्या हैं आरोप?
FBI का आरोप है कि नीतीश कौशल ने भगवानपुरिया OCG की ओर से अपहरण, हमले और अन्य हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया। उसके खिलाफ 25 जून 2026 को कैलिफोर्निया के लॉस एंजिलिस स्थित यूनाइटेड स्टेट्स डिस्ट्रिक्ट कोर्ट, सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट ऑफ कैलिफोर्निया ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।
यह वारंट रैकेटियर इन्फ्लुएंस्ड एंड करप्ट ऑर्गनाइजेशंस यानी RICO कानून के तहत संगठित अपराध से जुड़ी साजिश के आरोपों के बाद जारी किया गया। अमेरिकी एजेंसियों का दावा है कि कौशल भगवानपुरिया गैंग के हिंसक ऑपरेशनों में सक्रिय भूमिका निभाता था।
कौन है गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया?
जग्गू भगवानपुरिया का असली नाम जगदीप सिंह है। वह पंजाब के गुरदासपुर जिले के बटाला क्षेत्र स्थित भगवानपुर गाँव का रहने वाला है। गाँव के नाम के कारण ही वह अपराध की दुनिया में जग्गू भगवानपुरिया के नाम से पहचाना जाने लगा।
बताया जाता है कि जग्गू वर्ष 2012 से संगठित अपराध की दुनिया में सक्रिय हुआ। उसके खिलाफ हत्या, अपहरण, जबरन वसूली, हाईवे लूट, हथियारों की तस्करी और आर्म्स एक्ट से जुड़े करीब 128 आपराधिक मामले दर्ज होने का दावा किया जाता है। इसके अलावा, उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत भी कई मामले दर्ज बताए गए हैं।
पंजाब पुलिस ने जग्गू भगवानपुरिया को वर्ष 2015 में गिरफ्तार किया था। इसके बाद से वह जेल में बंद है। हालाँकि, जाँच एजेंसियों का आरोप है कि जेल में रहने के बावजूद वह अवैध मोबाइल फोन और अपने सहयोगियों के माध्यम से गैंग की गतिविधियों को संचालित करता रहा।
पंजाब से विदेशों तक कैसे फैला गैंग का नेटवर्क?
अमेरिकी अभियोजकों के अनुसार, भगवानपुरिया गैंग ने पंजाब से विदेश जाने वाले अपने भरोसेमंद सदस्यों और सहयोगियों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तैयार किया। गैंग से जुड़े लोग कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन में जाकर बस गए और वहीं से ड्रग्स की तस्करी, हथियारों की आपूर्ति, रंगदारी की रकम वसूलने तथा अपराध से कमाए गए पैसे को ठिकाने लगाने का काम करने लगे।
अमेरिकी चार्जशीट में दावा किया गया है कि भगवानपुरिया नेटवर्क के भारत, कनाडा, अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में एक हजार से अधिक सदस्य और सहयोगी हैं। अकेले अमेरिका में सौ से अधिक लोगों के इस नेटवर्क से जुड़े होने का आरोप है।
कैलिफोर्निया को इस नेटवर्क का प्रमुख केंद्र बताया गया है। जाँच एजेंसियों के अनुसार, कोकीन, मेथामफेटामाइन और हेरोइन जैसी ड्रग्स को अमेरिका के अलग-अलग हिस्सों में पहुँचाकर कनाडा भेजा जाता था।
गैंग पर रियल एस्टेट कारोबारियों, शराब कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों और स्थानीय व्यापारियों से रंगदारी माँगने का भी आरोप है।
सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम से युवाओं की भर्ती
अमेरिकी चार्जशीट के अनुसार, गैंग आर्थिक रूप से कमजोर, नाराज या अपराध से प्रभावित युवाओं और नाबालिगों को निशाना बनाता था। उन्हें जल्दी पैसा कमाने, समाज में पहचान बनाने और गैंग में ताकतवर स्थान दिलाने का लालच दिया जाता था।
आरोप है कि गैंग के प्रति वफादारी साबित करने वाले युवाओं को कनाडा, अमेरिका या ब्रिटेन भेजने का वादा किया जाता था। विदेश पहुँचने के बाद उन्हें ड्रग्स तस्करी, वसूली, हथियारों की सप्लाई और अन्य अंतरराष्ट्रीय अपराधों में शामिल किया जाता था।
इंस्टाग्राम को भर्ती का एक प्रमुख माध्यम बताया गया है। सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ तस्वीरें, धमकियाँ, हत्याओं की जिम्मेदारी लेने वाली पोस्ट और गैंगस्टरों का महिमामंडन करने वाली सामग्री साझा की जाती थी। इन पोस्ट का इस्तेमाल लोगों में डर फैलाने के साथ-साथ युवाओं को गैंग की ओर आकर्षित करने के लिए भी किया जाता था।
पंजाब पुलिस के अधिकारी पर भी गंभीर आरोप
अमेरिका के कैलिफोर्निया सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की संघीय अदालत में दाखिल चार्जशीट में पंजाब पुलिस के इंस्पेक्टर गुरिंदरजीत सिंह नागरा का नाम भी शामिल किया गया है।
FBI का आरोप है कि भगवानपुरिया गैंग से जुड़े लोग अपने विरोधियों, पुलिस के संभावित मुखबिरों और रंगदारी के लिए चुने गए व्यक्तियों की जानकारी कुछ भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों को देते थे। इसके बाद उन्हें या उनके परिवार के सदस्यों को हत्या जैसे गंभीर मामलों में झूठा फँसाने की धमकी दी जाती थी।
यह मामला पंजाब के होशियारपुर जिले के मियानी गाँव में 15 जनवरी 2026 को हुई हार्डवेयर कारोबारी बलविंदर सिंह की हत्या से जुड़ा बताया गया है। हत्या के बाद भगवानपुरिया गैंग ने सोशल मीडिया पर इसकी जिम्मेदारी लेने का दावा किया था।
चार्जशीट के अनुसार, गैंग से जुड़े एक व्यक्ति ने कथित तौर पर एक पीड़ित की जानकारी इंस्पेक्टर नागरा को दी। इसके बाद पीड़ित और उसके परिवार को हत्या के मामले में फँसाने की धमकी देकर पैसे माँगे गए।
अमेरिकी चार्जशीट सामने आने के बाद पंजाब पुलिस ने नागरा को टांडा थाने के SHO पद से हटाकर पुलिस लाइंस भेज दिया और विभागीय जाँच के आदेश दिए।
‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ में 24 लोगों की गिरफ्तारी
अमेरिकी न्याय विभाग ने भारतीय मूल के कथित गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ नाम दिया है। इस अभियान के तहत कुल 24 आरोपितों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई है।
इनमें 11 लोगों को कैलिफोर्निया, एक को इंडियाना और एक को जॉर्जिया से पकड़ा गया। तीन गिरफ्तारियाँ कनाडा और एक गिरफ्तारी स्पेन में हुई, जबकि सात आरोपित पहले से हिरासत में बताए गए।
तीन अलग-अलग चार्जशीट में कुल 37 लोगों को आरोपित बनाया गया है। इनमें जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया के नाम भी शामिल हैं। अमेरिकी एजेंसियों का आरोप है कि दोनों जेल में रहते हुए मोबाइल फोन और इंटरनेट के माध्यम से विदेशों में अपने आपराधिक नेटवर्क चला रहे थे।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई के बाद भी दस आरोपित फरार हैं। इनमें सात अमेरिका, दो भारत और एक यूरोप में होने का दावा किया गया है।
ड्रग्स, हथियार और नकदी बरामद करने का दावा
अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, जाँच के दौरान करीब एक हजार किलोग्राम कोकीन, एक किलोग्राम हेरोइन, 40 हजार डॉलर नकद और 12 हथियार जब्त किए गए।
सैक्रामेंटो क्षेत्र में 23 और लॉस एंजिलिस क्षेत्र में 11 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। अमेरिकी अधिकारियों ने इन गिरोहों पर हत्या, सुपारी देकर हत्या, गोलीबारी, अपहरण, रंगदारी, ड्रग्स तस्करी, अवैध हथियार कारोबार और मानव तस्करी में शामिल होने के आरोप लगाए हैं।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग पर भी अमेरिकी कार्रवाई
अमेरिकी अभियोजकों ने लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ नौ आरोपों वाली चार्जशीट दाखिल की है। आरोप है कि बिश्नोई ने सोशल मीडिया पर खुद को देशभक्त, राष्ट्रवादी और धार्मिक व्यक्ति के रूप में पेश किया और इसी छवि के माध्यम से भारत तथा विदेशों में युवाओं को अपने गिरोह से जोड़ा।
चार्जशीट के अनुसार, गोल्डी बराड़ उत्तरी अमेरिका और रोहित गोदारा यूरोप में बिश्नोई गैंग की गतिविधियों को संभालते थे। गैंग पर लॉस एंजिलिस और थाउजेंड ओक्स क्षेत्र में कारोबारियों से करोड़ों डॉलर की रंगदारी माँगने के आरोप भी लगाए गए हैं।
अमेरिकी एजेंसियों का आरोप है कि गैंग ड्रग्स की तस्करी के साथ-साथ दूसरे आपराधिक गिरोहों की ड्रग्स लूटने में भी शामिल था।
रविंदर सिंह ढांडा नेटवर्क पर तीसरी चार्जशीट
तीसरी चार्जशीट रविंदर सिंह ढांडा और उसके सहयोगियों के खिलाफ दाखिल की गई है। आरोप है कि यह नेटवर्क अमेरिका से कनाडा तक हर सप्ताह बड़ी मात्रा में कोकीन और मेथामफेटामाइन पहुँचाता था।
ड्रग्स को ट्रकों और कृषि कार्य में इस्तेमाल होने वाले वाहनों में छिपाकर सीमा पार पहुँचाने का आरोप है। जुलाई 2023 से नवंबर 2024 के बीच करीब 430 किलोग्राम कोकीन की तस्करी किए जाने का दावा किया गया है।
जाँच में FBI, लॉस एंजिलिस पुलिस, कनाडा की रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस, अमेरिका-कनाडा सीमा एजेंसियों और स्पेन सहित अन्य देशों की एजेंसियाँ शामिल रहीं।
अमेरिका की कार्रवाई पर भारत ने क्या कहा?
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 14 जुलाई 2026 को अमेरिकी कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत ने अमेरिकी न्याय विभाग की घोषणाओं का संज्ञान लिया है।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी और अवैध हथियारों का नेटवर्क समाज के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच आतंकवाद तथा अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध से निपटने के लिए मजबूत और लगातार बढ़ते सहयोग की बात भी कही।
आरोप अभी अदालत में साबित होना बाकी
अमेरिकी न्याय विभाग ने स्पष्ट किया है कि चार्जशीट में लगाए गए आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं। दोष सिद्ध होने तक सभी आरोपितों को निर्दोष माना जाएगा।
दोषी पाए जाने पर अलग-अलग आरोपों के आधार पर कई आरोपितों को कम से कम दस वर्ष की जेल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।
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