ब्रिटेन के पीटरबरो शहर में करीब चार दशक से संचालित हिंदू मंदिर और सामुदायिक केंद्र की संपत्ति एक इस्लामिक संगठन को बेचने के फैसले पर कानूनी विवाद गहरा गया है। भारत हिंदू समाज (Bharat Hindu Samaj–BHS) ने पीटरबरो सिटी काउंसिल के निर्णय को लंदन हाई कोर्ट में न्यायिक समीक्षा के जरिए चुनौती दी है।
विवाद न्यू इंग्लैंड कॉम्प्लेक्स की फ्रीहोल्ड संपत्ति से जुड़ा है, जहां भारत हिंदू समाज वर्ष 1986 से मंदिर और सामुदायिक केंद्र संचालित कर रहा है। पीटरबरो सिटी काउंसिल ने 10 फरवरी 2026 को इस परिसर को यूनाइटेड किंगडम इस्लामिक मिशन (UKIM) को बेचने का निर्णय बरकरार रखा था। UKIM यहां मस्जिद और इस्लामिक सेंटर विकसित करना चाहता है।
हाई कोर्ट में काउंसिल ने फैसले को बताया कानूनी
हाई कोर्ट में पीटरबरो सिटी काउंसिल की ओर से पेश बैरिस्टर कैथरीन रोलैंड्स ने कहा कि बिक्री का निर्णय गैरकानूनी नहीं है और काउंसिल ने सार्वजनिक क्षेत्र की समानता संबंधी जिम्मेदारियों का उल्लंघन नहीं किया।
काउंसिल का तर्क है कि निर्णय से किसी संरक्षित धार्मिक समुदाय पर प्रभाव पड़ना अपने आप में फैसले को गैरकानूनी नहीं बनाता। काउंसिल को हिंदू समुदाय के हितों और धार्मिक पहचान पर विचार करना आवश्यक था, लेकिन यह अकेला पहलू संपत्ति बिक्री के अंतिम निर्णय को निर्धारित नहीं कर सकता।
काउंसिल ने दावा किया कि उसने मंदिर के महत्व को ध्यान में रखते हुए वर्षों तक भारत हिंदू समाज से बातचीत की और संपत्ति बिक्री की प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष तथा कानून के अनुरूप रही।
पुनर्विकास तक परिसर में रह सकेगा मंदिर
काउंसिल ने अदालत को बताया कि भारत हिंदू समाज का किरायेदारी अधिकार तब तक सुरक्षित रहेगा, जब तक UKIM परिसर का पुनर्विकास शुरू नहीं करता।
पुनर्विकास शुरू होने के बाद मंदिर और सामुदायिक केंद्र को परिसर खाली करना होगा। काउंसिल ने यह भी कहा कि वह हिंदू समुदाय के लिए पीटरबरो शहर में ही कोई वैकल्पिक परिसर खोजने की कोशिश कर रही है।
हालांकि अदालत में उपस्थित हिंदू समुदाय के लोगों ने काउंसिल के इस दावे पर असहमति जताई। जब काउंसिल की ओर से कहा गया कि पीटरबरो बड़ा शहर है और वहां अन्य परिसर उपलब्ध हो सकते हैं, तो दर्शक दीर्घा में बैठे लोगों ने विरोध जताया।
जज ने 2035 की फंडिंग योजना पर पूछा सवाल
सुनवाई के दौरान जस्टिस मॉरिस ने सवाल किया कि यदि UKIM ने परियोजना के लिए वर्ष 2035 तक धन जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, तो मंदिर को इतनी जल्दी वैकल्पिक स्थान देने की तैयारी क्यों की जा रही है।
काउंसिल की वकील ने जवाब दिया कि परियोजना किसी भी समय आगे बढ़ सकती है और धन अपेक्षा से पहले भी जुटाया जा सकता है। इस मुद्दे से अदालत में इस बात पर चर्चा हुई कि मंदिर को वास्तव में परिसर खाली करने की जरूरत कब पड़ सकती है।
भारत हिंदू समाज ने निर्णय प्रक्रिया पर उठाए सवाल
भारत हिंदू समाज ने स्पष्ट किया है कि उसका विरोध UKIM या मुस्लिम समुदाय से नहीं है। संगठन का कहना है कि उसकी कानूनी चुनौती केवल काउंसिल की निर्णय प्रक्रिया, बोली मूल्यांकन और कानूनी जिम्मेदारियों से जुड़ी है।
BHS के वकील टोबी फिशर ने अदालत में दलील दी कि काउंसिल अधिकारियों के मूल्यांकन और तर्क में गंभीर खामियां थीं। उनका आरोप है कि निर्वाचित काउंसिल सदस्यों ने अधिकारियों की सिफारिशों को पर्याप्त स्वतंत्र समीक्षा के बिना स्वीकार कर लिया।
संगठन न्यायिक समीक्षा के माध्यम से काउंसिल के बिक्री निर्णय को रद्द कराने और पूरी प्रक्रिया पर पुनर्विचार की मांग कर रहा है।
1986 से परिसर में चल रहा है हिंदू मंदिर
भारत हिंदू समाज वर्ष 1986 से न्यू इंग्लैंड कॉम्प्लेक्स की यूनिट-6 में मंदिर और सामुदायिक केंद्र संचालित कर रहा है।
यह स्थान केवल दैनिक पूजा और धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं है। यहां सांस्कृतिक कार्यक्रम, सामाजिक सेवाएं, वरिष्ठ नागरिकों के लिए गतिविधियां, योग, भाषा कक्षाएं और सामुदायिक सहायता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार मंदिर पीटरबरो के अलावा कैम्ब्रिजशायर, नॉरफॉक और लिंकनशायर सहित आसपास के क्षेत्रों के करीब 13,000 हिंदुओं की सेवा करता है। इसे ईस्ट एंग्लिया क्षेत्र का प्रमुख हिंदू धार्मिक एवं सामुदायिक केंद्र माना जाता है।
दस वर्षों से परिसर खरीदने की कोशिश
BHS का कहना है कि वह लंबे समय से काउंसिल के साथ परिसर खरीदने को लेकर बातचीत कर रहा था। अदालती दलीलों के अनुसार संगठन वर्ष 2017 से संपत्ति के पूरे या कुछ हिस्से को खरीदने के विकल्प पर काउंसिल के संपर्क में था।
इसके बाद UKIM की ओर से 2023 में प्रस्ताव आने और सितंबर 2025 में अंतिम बोलियां आमंत्रित किए जाने के बाद प्रतिस्पर्धी बिक्री प्रक्रिया शुरू हुई।
मंदिर के ट्रस्टियों का कहना है कि उन्हें पहले लगा था कि परिसर खरीदने की कीमत पर सहमति बन चुकी है, लेकिन बाद में संपत्ति को खुले बाजार की प्रक्रिया के तहत अन्य बोलीदाता को देने का फैसला किया गया।
UKIM और भारत हिंदू समाज की बोलियों में कितना अंतर?
अदालत में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार UKIM ने परिसर के लिए लगभग 14 लाख पाउंड की नकद बोली लगाई। संगठन ने करीब 54 लाख पाउंड उपलब्ध धनराशि का प्रमाण भी दिया।
दूसरी ओर भारत हिंदू समाज ने लगभग 9 लाख पाउंड की नकद बोली के साथ अपनी सामुदायिक सेवाओं के आधार पर करीब 5.04 लाख पाउंड की सामाजिक मूल्य राशि जोड़ने का प्रस्ताव रखा।
भारतीय मुद्रा में ये आंकड़े विनिमय दर के अनुसार बदल सकते हैं, इसलिए इन्हें केवल अनुमानित रूप में प्रस्तुत किया जाना उचित होगा।
काउंसिल ने आर्थिक संकट का दिया हवाला
पीटरबरो सिटी काउंसिल ने कहा कि वह गंभीर वित्तीय दबाव का सामना कर रही है और सार्वजनिक संपत्ति बेचते समय करदाताओं के लिए अधिकतम आर्थिक मूल्य प्राप्त करना उसका कानूनी दायित्व है।
काउंसिल के अनुसार अधिक नकद मूल्य और वित्तीय क्षमता वाले प्रस्ताव को प्राथमिकता देना शहर के आर्थिक हित में था। स्थानीय प्रशासन ने दावा किया कि संपत्ति बिक्री से कर्ज कम करने और वित्तीय स्थिति संभालने में मदद मिलेगी।
‘सोशल वैल्यू’ को पर्याप्त महत्व नहीं देने का आरोप
भारत हिंदू समाज का मुख्य आरोप है कि काउंसिल ने उसकी सामाजिक और सामुदायिक सेवाओं के मूल्य को उचित महत्व नहीं दिया।
BHS का कहना है कि मंदिर पिछले 40 वर्षों से धार्मिक गतिविधियों के साथ स्थानीय समुदाय को सामाजिक, सांस्कृतिक और कल्याणकारी सेवाएं प्रदान कर रहा है। यदि इन सेवाओं का आर्थिक और सामाजिक मूल्य सही तरीके से जोड़ा जाता, तो उसकी बोली अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकती थी।
संगठन का दावा है कि बोली की स्कोरिंग प्रणाली, अधिकारियों के मूल्यांकन और अंतिम कैबिनेट निर्णय में खामियां थीं।
Equality Act के उल्लंघन का भी दावा
BHS ने हाई कोर्ट में यह भी तर्क दिया कि काउंसिल ने Equality Act 2010 के तहत अपनी सार्वजनिक समानता संबंधी जिम्मेदारी का ठीक तरीके से पालन नहीं किया।
संगठन का कहना है कि परिसर खाली होने पर स्थानीय हिंदू समुदाय के पास आसपास कोई समान धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र नहीं रहेगा। मंदिर बंद होने का प्रभाव विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और नियमित धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने वाले लोगों पर पड़ेगा।
काउंसिल ने इस आरोप से इनकार करते हुए कहा कि उसने मंदिर के महत्व और हिंदू समुदाय पर पड़ने वाले प्रभाव को निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया था।
मंदिर बिक्री पर हाई कोर्ट की अंतरिम रोक
फरवरी 2026 के अंत में हाई कोर्ट ने पीटरबरो सिटी काउंसिल को संपत्ति बिक्री से जुड़ा कोई अपरिवर्तनीय कदम उठाने से रोक दिया था।
मिस्टर जस्टिस फोर्डहम ने अंतरिम निषेधाज्ञा जारी करते हुए कहा था कि न्यायिक समीक्षा के नतीजे से पहले बिक्री पूरी होने पर कानूनी चुनौती निरर्थक हो सकती है। यह आदेश अंतिम निर्णय नहीं था, बल्कि मामले की विस्तृत सुनवाई तक मौजूदा स्थिति बनाए रखने के लिए दिया गया था।
इस अंतरिम रोक के कारण फिलहाल संपत्ति का हस्तांतरण और पुनर्विकास आगे नहीं बढ़ सकता।
मंदिर से संघर्ष नहीं, काउंसिल की प्रक्रिया से शिकायत
भारत हिंदू समाज के प्रतिनिधियों ने कई बार कहा है कि उनका विवाद मुस्लिम समुदाय या प्रस्तावित मस्जिद से नहीं है।
संगठन का कहना है:
“हमारी लड़ाई मस्जिद से नहीं, काउंसिल के फैसले और प्रक्रिया से है।”
BHS का तर्क है कि धार्मिक समुदायों के बीच टकराव के रूप में मामले को प्रस्तुत करना गलत होगा, क्योंकि न्यायिक समीक्षा का मुख्य प्रश्न प्रशासनिक निर्णय की वैधता और निष्पक्षता है।
वैकल्पिक मंदिर कितनी दूरी पर?
हाई कोर्ट की सुनवाई में यह बात सामने आई कि पीटरबरो के लगभग 35 मील यानी करीब 56 किलोमीटर के दायरे में दूसरा हिंदू मंदिर उपलब्ध नहीं है।
यदि BHS को परिसर छोड़ना पड़ता है, तो श्रद्धालुओं को पूजा और सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए कैंब्रिज या अन्य दूर के शहरों में जाना पड़ सकता है। काउंसिल का कहना है कि वह शहर के भीतर विकल्प तलाश रही है, लेकिन अभी तक कोई स्थायी वैकल्पिक परिसर तय होने की पुष्टि नहीं हुई है।
प्रधानमंत्री मोदी से भी की गई थी अपील
विवाद बढ़ने के बाद मंदिर समर्थकों और ब्रिटेन के कुछ हिंदू संगठनों ने भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले पर ध्यान देने की अपील की थी।
हालांकि यह ब्रिटेन की स्थानीय संपत्ति बिक्री और प्रशासनिक कानून से जुड़ा मामला है। इसका अंतिम निर्णय इंग्लैंड और वेल्स की हाई कोर्ट को करना है।
कोर्ट किन मुद्दों पर करेगा फैसला?
हाई कोर्ट की न्यायिक समीक्षा मुख्य रूप से यह देखेगी कि:
- काउंसिल की बोली प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी थी या नहीं
- अधिकारियों ने बोलियों का सही मूल्यांकन किया या नहीं
- कैबिनेट सदस्यों ने स्वतंत्र रूप से निर्णय लिया या केवल अधिकारियों की सिफारिश स्वीकार की
- BHS की सामाजिक सेवाओं के मूल्य को उचित महत्व मिला या नहीं
- Equality Act 2010 की जिम्मेदारियों का पालन हुआ या नहीं
- हिंदू समुदाय पर पड़ने वाले प्रभाव को पर्याप्त रूप से ध्यान में रखा गया या नहीं
- संपत्ति से अधिकतम आर्थिक मूल्य हासिल करने की कानूनी जिम्मेदारी का सही इस्तेमाल हुआ या नहीं
अभी बिक्री का अंतिम फैसला नहीं
हाई कोर्ट ने अभी यह तय नहीं किया है कि न्यू इंग्लैंड कॉम्प्लेक्स UKIM को बेचा जा सकता है या नहीं।
फिलहाल बिक्री पर अंतरिम रोक लागू है। जस्टिस मॉरिस की अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद लिखित फैसला जारी करेगी। अदालत या तो काउंसिल के फैसले को वैध ठहरा सकती है या उसे रद्द करके बिक्री प्रक्रिया पर दोबारा विचार करने का निर्देश दे सकती है।
यह मामला ब्रिटेन में धार्मिक स्थलों, सामुदायिक संपत्तियों और स्थानीय निकायों की आर्थिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन का महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है।
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