रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 से जारी युद्ध को लेकर पोलैंड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित भूमिका पर बड़ा बयान दिया है। पोलैंड के उप विदेश मंत्री व्लादिस्लाव टेओफिल बार्टोशेव्स्की ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं, जो रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को प्रभावित कर सकते हैं और उन पर युद्ध रोकने के लिए दबाव डाल सकते हैं।
दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान बार्टोशेव्स्की ने भारत और प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीतिक भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि रूस के साथ भारत के पुराने संबंधों और प्रधानमंत्री मोदी के वैश्विक कद के कारण नई दिल्ली यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
‘पुतिन ध्यान से सुनते हैं पीएम मोदी की बात’
पोलैंड के उप विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो भी कहते हैं, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन उस पर ध्यान देते हैं। उनके अनुसार, मोदी उन कुछ वैश्विक नेताओं में शामिल हैं, जिनका पुतिन पर वास्तविक प्रभाव है।
बार्टोशेव्स्की ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी प्रसिद्ध वैश्विक नेता हैं। पुतिन उनकी बातों पर गौर करते हैं। प्रधानमंत्री उन पर दबाव डाल सकते हैं। यह स्पष्ट है कि इस संघर्ष को रोकने के लिए भारत कुछ कर सकता है।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रूस और यूक्रेन के बीच स्थायी एवं टिकाऊ शांति स्थापित करने के लिए भारत की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
#WATCH | Delhi: "I mentioned the role Prime Minister Modi played in stopping Putin from using tactical nuclear weapons in Ukraine at the end of 2022. But it's true, Prime Minister Modi is one of the few people who actually can exert some pressure and influence on President Putin,… pic.twitter.com/SNBcbGf8Pr
— ANI (@ANI) July 15, 2026
परमाणु हथियारों को लेकर भी किया बड़ा दावा
पोलैंड के उप विदेश मंत्री ने दावा किया कि वर्ष 2022 के आखिर में रूस द्वारा यूक्रेन के खिलाफ टैक्टिकल परमाणु हथियारों के संभावित इस्तेमाल को रोकने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूमिका निभाई थी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति को परमाणु हथियार इस्तेमाल नहीं करने के लिए मनाने में योगदान दिया था। हालांकि, यह पोलैंड के मंत्री का दावा है और इसकी स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन अपेक्षाकृत सीमित सैन्य क्षेत्र में इस्तेमाल के लिए बनाए गए परमाणु हथियार होते हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के शुरुआती वर्षों में परमाणु तनाव बढ़ने की आशंका को लेकर कई देशों ने चिंता व्यक्त की थी।
फरवरी 2022 से जारी है रूस-यूक्रेन युद्ध
रूस ने 24 फरवरी 2022 को यूक्रेन के खिलाफ व्यापक सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच युद्ध लगातार जारी है। लड़ाई में बड़ी संख्या में सैनिकों और नागरिकों की मौत हुई है, जबकि लाखों लोगों को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।
युद्ध के दौरान रूस और यूक्रेन ने मिसाइल, ड्रोन, जमीनी और समुद्री हमलों का इस्तेमाल किया है। अलग-अलग देशों की मध्यस्थता और कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद अब तक स्थायी युद्धविराम पर सहमति नहीं बन सकी है।
G7 सम्मेलन में जेलेंस्की से मिले थे पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जून 2026 में फ्रांस के एवियन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने भारत-यूक्रेन संबंधों, व्यापार, आर्थिक सहयोग और संयुक्त परियोजनाओं की संभावनाओं पर चर्चा की थी।
बैठक के दौरान युद्ध के कारण प्रभावित हुए भारत-यूक्रेन व्यापारिक संबंधों को दोबारा मजबूत करने और द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर भारत का पुराना रुख दोहराते हुए कहा था कि भारत शांति, संवाद और कूटनीति का समर्थन करता है तथा मानवता के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
रूस और यूक्रेन दोनों के संपर्क में रहा है भारत
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने दोनों देशों के साथ बातचीत जारी रखी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कई अवसरों पर राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति जेलेंस्की से चर्चा की है।
भारत का कहना रहा है कि युद्ध के मैदान में किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता और संघर्ष को बातचीत तथा कूटनीतिक माध्यमों से समाप्त किया जाना चाहिए। रूस के साथ भारत के पारंपरिक संबंध हैं, वहीं नई दिल्ली ने यूक्रेन को मानवीय सहायता भी उपलब्ध कराई है।
पोलैंड के बयान के क्या हैं मायने?
पोलैंड यूक्रेन का प्रमुख समर्थक और रूस का मुखर आलोचक रहा है। ऐसे में पोलैंड के वरिष्ठ मंत्री द्वारा प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताना भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
पोलैंड के उप विदेश मंत्री के बयान से एक बार फिर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या भारत रूस और यूक्रेन के बीच संवाद स्थापित करने या युद्ध समाप्त कराने की दिशा में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकता है।
फिलहाल भारत ने किसी औपचारिक मध्यस्थता की घोषणा नहीं की है, लेकिन लगातार यह स्पष्ट किया है कि वह शांति बहाली के हर गंभीर प्रयास में सहयोग देने के लिए तैयार है।
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