डेमोक्रेट नेता जोहरान ममदानी ने न्यूयॉर्क सिटी के मेयर पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण के दौरान उन्होंने कुरान पर हाथ रखा। इसके अलावा, एक पॉकेट साइज कुरान उन्होंने अपनी जेब में भी रखी थी। इस तरह दो कुरान लेकर ममदानी अमेरिका के सबसे बड़े शहर के पहले मुस्लिम मेयर बने।
34 वर्षीय जोहरान ममदानी न्यूयॉर्क के सबसे युवा मेयर हैं। उन्हें अटॉर्नी जनरल और उनकी राजनीतिक सहयोगी लेटिशिया जेम्स ने शपथ दिलाई। यह समारोह ऐतिहासिक सिटी हॉल स्टेशन की मेहराबदार छतों के नीचे आयोजित किया गया, जहाँ बड़ी संख्या में समर्थक और आम नागरिक मौजूद थे।
शपथ ग्रहण समारोह के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। कई लोगों ने सवाल उठाया कि खुद को कम्युनिस्ट कहने वाले ममदानी ने शपथ लेते समय कुरान हाथ में क्यों रखी, जबकि शपथ अमेरिकी संविधान की होती है। कुछ यूजर्स ने इसे इस्लामी कानून (शरिया) के प्रति प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में देखा और इसे धर्म व राज्य के पृथक्करण के खिलाफ बताया। वहीं, अन्य लोगों ने यह तर्क भी दिया कि शपथ का मूल उद्देश्य संविधान का पालन करना होता है, चाहे हाथ में कोई भी धार्मिक ग्रंथ क्यों न हो।
ज़ोहरान ममदानी न्यूयॉर्क शहर के पहले मेयर बनकर कुरान पर शपथ लेने वाले हैं।
कुरान पर शपथ लेना इस्लामी कानून (शरिया) के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाता है जो अमेरिकी कानूनों से ऊपर है।
यह चर्च और राज्य के अलगाव को कमजोर करता है, जबकि शपथ संविधान को बनाए रखने की होती है, किताब चाहे जो… pic.twitter.com/GngCp2KDMW
— One India News (@oneindianewscom) January 1, 2026
ममदानी ने खुद को मुस्लिम और भारतीय मूल का बताते हुए न्यूयॉर्क के मुस्लिम और इंडियन वोटर्स से जुड़ने की कोशिश की है। आलोचकों का कहना है कि कुरान हाथ में लेकर शपथ लेना उनके “पक्के इस्लामी” होने का संदेश देने का प्रयास था। उल्लेखनीय है कि जोहरान ममदानी प्रसिद्ध फिल्म निर्माता-निर्देशक मीरा नायर के पुत्र हैं और भारतीय मूल से संबंध रखते हैं।
भारत और हिंदू धर्म से जुड़े उनके बयानों को लेकर पहले भी विवाद हो चुके हैं। ममदानी ने अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन को “मस्जिद विध्वंस का उत्सव” और “हिंदुत्व फासीवाद” का प्रतीक बताया था। आलोचकों के अनुसार, यह बयान सुप्रीम कोर्ट के फैसले और करोड़ों हिंदुओं की आस्था को नकारने जैसा है। जनवरी 2024 में वे न्यूयॉर्क में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के विरोध में हुए प्रदर्शनों में भी शामिल हुए थे, जहाँ कथित तौर पर हिंदुओं के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए गए।
मेयर जोहरान ममदानी के आलोचक और हिंदू समुदाय का एक बड़ा वर्ग उन्हें “हिंदू-विरोधी” और “भारत-विरोधी” मानता है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “वॉर क्रिमिनल” कहकर संबोधित किया था और 2002 के गुजरात दंगों के लिए जिम्मेदार ठहराया था, जबकि भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस मामले में पीएम मोदी को पहले ही क्लीन चिट दी जा चुकी है। इसके अलावा, ममदानी का यह कहना कि गुजरात में कोई मुस्लिम नहीं बचा है, भी व्यापक विवाद और आलोचना का कारण बना।
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