मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित मध्यप्रदेश मंत्रिपरिषद की बैठक में विकास, कृषि, अधोसंरचना, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कैबिनेट मंत्री चैतन्य काश्यप ने बैठक के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि भोपाल मेट्रो परियोजना के लिए 3052 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की गई है। इसके अलावा किसानों को राहत देने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और सोलर ऊर्जा विस्तार को लेकर भी अहम निर्णय लिए गए हैं।
भोपाल मेट्रो परियोजना को मिली बड़ी वित्तीय मंजूरी
मध्यप्रदेश सरकार ने राजधानी भोपाल में निर्माणाधीन मेट्रो परियोजना के लिए 3052 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की है। सरकार का मानना है कि इस वित्तीय सहायता से परियोजना के कार्यों में तेजी आएगी और राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप मिलेगा।
भोपाल मेट्रो को राज्य की प्रमुख अधोसंरचना परियोजनाओं में शामिल किया गया है, जिससे यातायात व्यवस्था में सुधार और प्रदूषण में कमी आने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेश के विकास एवं जनकल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।@DrMohanYadav51 #MadhyaPradesh #CabinetDecisionsMP #CabinetMP pic.twitter.com/vdfM9azakc
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कपास उत्पादक किसानों को बड़ी राहत
कैबिनेट ने किसानों को राहत देते हुए कपास पर लगने वाले मंडी शुल्क को 1 प्रतिशत से घटाकर 0.5 प्रतिशत करने का फैसला लिया है।
सरकार के अनुसार, इस निर्णय से कपास उत्पादक किसानों का आर्थिक बोझ कम होगा और उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। इससे कृषि क्षेत्र में सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।
मंडी शुल्क संशोधन से सरकार को होगी अतिरिक्त आय
कपास पर शुल्क कम करने के साथ-साथ कुछ अन्य कृषि उत्पादों पर मंडी शुल्क को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत किया गया है।
सरकार का अनुमान है कि इस संशोधन से राज्य को लगभग 800 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। इस राशि का उपयोग मंडी अधोसंरचना विकास, कृषि सुविधाओं के विस्तार और किसानों के कल्याणकारी कार्यक्रमों में किया जाएगा।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य कुमार काश्यप द्वारा कैबिनेट बैठक में हुए महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी#MPCabinetDecisions https://t.co/AyjXJhfsIE
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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को 235 करोड़ की मंजूरी
मंत्रिपरिषद ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की विभिन्न योजनाओं के संचालन के लिए 235 करोड़ रुपये की निरंतरता को भी मंजूरी दी है।
इन योजनाओं का उद्देश्य अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति और वैज्ञानिक गतिविधियों को बढ़ावा देना बताया गया है। सरकार राज्य में नवाचार आधारित विकास मॉडल को मजबूत करना चाहती है।
उर्वरक आपूर्ति पर विशेष निगरानी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक में कहा कि प्रदेश में वर्तमान समय में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है।
उन्होंने निर्देश दिए कि आगामी कृषि सत्र से प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएं, जो किसानों की खाद, बीज और पंजीयन से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करेंगे।
15 जून तक पूरी होगी ट्रांसफर प्रक्रिया
कैबिनेट बैठक में मंत्रियों को निर्देश दिए गए कि स्थानांतरण नीति से जुड़े सभी मामलों का निपटारा 15 जून तक सुनिश्चित किया जाए।
सरकार प्रशासनिक प्रक्रियाओं को समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरा करने पर जोर दे रही है।
प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा
सरकार ने प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए राज्यव्यापी अभियान चलाने का निर्णय लिया है।
इंदौर में आयोजित होने वाले BRICS कृषि सम्मेलन के दौरान प्राकृतिक खेती पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही प्रदेश के सभी जिलों में किसानों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
पीएम मोदी के 12 वर्ष पूरे होने पर आयोजन
कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर बधाई प्रस्ताव भी पारित किया गया।
राज्य सरकार ने जानकारी दी कि मध्यप्रदेश में इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।
सोलर ऊर्जा को जनआंदोलन बनाने की तैयारी
मध्यप्रदेश सरकार ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाने का निर्णय लिया है।
सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत अब तक राज्य के लगभग 2 लाख घरों में रूफटॉप सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं। आने वाले समय में इस योजना को और व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा।
विकास, कृषि और ऊर्जा क्षेत्र पर सरकार का फोकस
कैबिनेट के फैसलों से स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश सरकार अधोसंरचना विकास, किसानों की आय बढ़ाने, तकनीकी नवाचार, प्राकृतिक खेती और नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार को प्राथमिकता दे रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन निर्णयों का राज्य की अर्थव्यवस्था, कृषि उत्पादन और रोजगार सृजन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
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