राजस्थान के उदयपुर जिले के ऋषभदेव और खेरवाड़ा क्षेत्र में कथित धर्मांतरण मामले ने नया मोड़ ले लिया है। पुलिस द्वारा 3 पादरियों समेत 11 आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद हिंदू संगठनों ने दावा किया है कि क्षेत्र के 50 से अधिक जनजातीय बहुल गांवों में पिछले करीब एक दशक से सुनियोजित तरीके से धर्मांतरण गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।
मामले की जांच कर रही पुलिस ने बताया कि आरोपितों से पूछताछ जारी है और उनके मोबाइल फोन, बैंक खातों तथा अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। वहीं स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
हर गांव में बनाए गए थे स्थानीय प्रभारी: दावा
स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों का दावा है कि कथित धर्मांतरण अभियान के लिए प्रत्येक गांव में 3 से 4 प्रभावशाली स्थानीय व्यक्तियों को जिम्मेदारी दी गई थी।
आरोप है कि ये लोग पहले ग्रामीणों को मिशनरी समूहों से जोड़ते थे और बाद में आर्थिक सहायता, इलाज, सामाजिक सहयोग तथा अन्य सुविधाओं का भरोसा देकर उन्हें धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रेरित करते थे।
ग्रामीणों का कहना है कि कई मामलों में प्रार्थना सभाओं में शामिल नहीं होने पर दबाव और धमकियों की भी शिकायतें सामने आई हैं।
महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बनाया गया निशाना
स्थानीय लोगों के अनुसार, कथित तौर पर सबसे अधिक फोकस आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और महिलाओं पर किया जाता था।
ग्रामीणों का आरोप है कि शुरुआत में धार्मिक साहित्य, दवाइयां और अन्य सहायता सामग्री वितरित की जाती थी। इसके बाद खेती-किसानी में मदद, आर्थिक सहयोग, स्वास्थ्य सुविधाएं, हैंडपंप और ट्यूबवेल जैसी सुविधाओं का आश्वासन दिया जाता था।
हालांकि कई ग्रामीणों का दावा है कि उन्हें इन वादों का वास्तविक लाभ नहीं मिला।
200 से अधिक लोग प्रार्थना सभा में मिले थे
सूचना मिलने के बाद प्रशासन और संबंधित टीमों ने जिस प्रार्थना सभा स्थल पर कार्रवाई की, वहां 200 से अधिक लोगों की मौजूदगी बताई गई।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सभा में आसपास के 20 से ज्यादा गांवों के लोगों को बुलाया गया था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन कार्यक्रमों का संचालन किस स्तर पर और किन स्रोतों से किया जा रहा था।
सांसद मन्नालाल रावत ने जताई चिंता
उदयपुर सांसद Mannalal Rawat ने मामले को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग की है।
उन्होंने कहा कि यदि बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करने के लिए कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था तो उसकी पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए। सांसद ने इसे संभावित अंतरराज्यीय नेटवर्क से भी जोड़कर जांच की मांग की है।
पुलिस जांच में क्या सामने आया?
ऋषभदेव के पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में कथित रूप से प्रलोभन और दबाव से जुड़े कुछ तथ्य सामने आए हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है और अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएंगे।
गिरफ्तार सभी आरोपित फिलहाल पुलिस रिमांड पर हैं और उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है।
मोबाइल और बैंक खातों की जांच जारी
पुलिस अब आरोपितों के मोबाइल फोन, बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और संपर्कों की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित गतिविधियों के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क या बाहरी फंडिंग तो नहीं थी।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और आने वाले दिनों में मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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