पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) द्वारा बुलाए गए विरोध प्रदर्शन और ‘लॉन्ग मार्च’ के दौरान तनाव चरम पर पहुंच गया। विभिन्न स्थानीय दावों और रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में कई लोगों के हताहत और बड़ी संख्या में घायल होने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।
PoK में पिछले कई महीनों से नागरिक अधिकारों, महंगाई, बिजली दरों, सब्सिडी और प्रशासनिक नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी हैं। JAAC इस आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरा है।
क्या है पूरा मामला?
जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) लंबे समय से क्षेत्र में बिजली, गेहूं सब्सिडी, रोजगार और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन चला रही है। संगठन का आरोप है कि पाकिस्तान प्रशासन क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग तो करता है, लेकिन स्थानीय लोगों को उसका लाभ नहीं मिलता।
9 जून को प्रस्तावित “लॉन्ग मार्च” को लेकर प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच पहले से तनाव बना हुआ था।
रावलकोट बना विरोध का केंद्र
रावलकोट और आसपास के क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन सबसे अधिक देखने को मिले। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आंदोलन को रोकने के लिए प्रशासन ने कई प्रतिबंधात्मक कदम उठाए।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इंटरनेट सेवाओं पर भी असर पड़ा, जिससे संचार व्यवस्था प्रभावित हुई। हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
JAAC पर कार्रवाई से बढ़ा विवाद
रिपोर्ट्स के अनुसार, JAAC से जुड़े कई कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई और आंदोलन से जुड़े नेताओं को हिरासत में लेने की भी खबरें सामने आईं।
इस कदम के बाद विरोध और अधिक तेज हो गया तथा विभिन्न क्षेत्रों में लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन शुरू कर दिए।
पहले भी हो चुके हैं बड़े प्रदर्शन
PoK में यह पहली बार नहीं है जब जनता और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बनी हो।
2023 और उसके बाद भी कई बार बिजली दरों, महंगाई और सब्सिडी को लेकर बड़े आंदोलन हुए थे। उन प्रदर्शनों के दौरान भी सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों की घटनाएं सामने आई थीं।
स्थानीय संगठनों का आरोप रहा है कि उनकी मूलभूत मांगों को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है।
क्षेत्र में बढ़ाई गई सुरक्षा
स्थिति को देखते हुए कई संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। प्रशासन की ओर से लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।
विश्लेषकों का मानना है कि PoK में बढ़ता असंतोष आने वाले समय में पाकिस्तान प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है, विशेष रूप से तब जब आर्थिक और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दे लगातार उठाए जा रहे हैं।
आगे क्या?
फिलहाल क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। सुरक्षा एजेंसियां हालात पर नजर रखे हुए हैं और प्रदर्शनकारी संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए हैं।
आने वाले दिनों में प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत होती है या टकराव और बढ़ता है, इस पर पूरे क्षेत्र की नजर बनी हुई है।
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