अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य टकराव तेज होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने बुधवार, 8 जुलाई 2026 को कहा कि ईरान के साथ संघर्ष समाप्त करने के लिए बना अंतरिम समझौता अब उनके हिसाब से खत्म हो चुका है। उन्होंने तेहरान के नेतृत्व के साथ आगे बातचीत को लेकर भी गहरी निराशा जाहिर की।
तुर्की की राजधानी अंकारा में NATO शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप से पूछा गया कि क्या ईरान के साथ युद्धविराम अब समाप्त हो चुका है। इस पर उन्होंने कहा, “For me, I think it’s over.” यानी, “मेरे हिसाब से यह खत्म हो गया है।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह तेहरान के साथ आगे जुड़ने में दिलचस्पी नहीं रखते।
ट्रंप का यह बयान अमेरिका द्वारा ईरान के 80 से ज्यादा सैन्य लक्ष्यों पर बड़े हमले के बाद आया है। वहीं ईरान ने जवाबी कार्रवाई में बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाने का दावा किया है। इससे मध्य पूर्व में व्यापक युद्ध की आशंका एक बार फिर बढ़ गई है।
अंकारा में ट्रंप का बड़ा बयान- ‘मेरे हिसाब से समझौता खत्म’
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समय तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित NATO नेताओं के शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। इसी दौरान पत्रकारों ने उनसे ईरान के साथ बनी अंतरिम व्यवस्था के भविष्य को लेकर सवाल किया।
ट्रंप ने कहा कि संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से ईरान के साथ हुआ Memorandum of Understanding अब खत्म हो चुका है। Reuters के अनुसार उन्होंने तेहरान के साथ आगे जुड़ने में रुचि नहीं होने की बात भी कही।
यह बयान इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले महीने बनी अंतरिम व्यवस्था का उद्देश्य सैन्य संघर्ष रोकना और आगे की बातचीत के लिए जगह बनाना था। अब नए हमलों के बाद वही व्यवस्था गंभीर संकट में पड़ गई है।
ईरानी नेतृत्व को ट्रंप ने बताया ‘बीमार’
अंकारा में ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को लेकर भी बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल किया। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने ईरान के नेतृत्व को “sick people” कहा और संकेत दिया कि उनके साथ व्यवहार करना बेहद मुश्किल है।
ट्रंप का यह रुख पहले की तुलना में अधिक कठोर माना जा रहा है। कुछ दिन पहले तक अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी समाधान की संभावनाओं को लेकर बातचीत की कोशिशें जारी थीं, लेकिन होर्मुज में जहाजों पर हमले और उसके बाद हुए सैन्य टकराव ने हालात पूरी तरह बदल दिए हैं।
अमेरिका ने ईरान के 80 से ज्यादा ठिकानों पर किए हमले
अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है कि 7 जुलाई को अमेरिकी बलों ने ईरान के 80 से ज्यादा लक्ष्यों पर सटीक हथियारों से हमला किया।
CENTCOM के अनुसार अमेरिकी हमलों में ईरान के:
- एयर डिफेंस सिस्टम,
- कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क,
- तटीय रडार केंद्र,
- एंटी-शिप मिसाइल क्षमताएं,
- और IRGC की 60 से ज्यादा छोटी सैन्य नौकाएं
निशाना बनाई गईं।
अमेरिकी सेना का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने की ईरानी क्षमता को कमजोर करना था।
तीन कमर्शियल जहाजों पर हमले के बाद अमेरिका का पलटवार
CENTCOM का दावा है कि ईरानी बलों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे तीन व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया था। अमेरिकी सेना ने इन जहाजों की पहचान M/T Al Rekayyat, M/T Wedyan और M/T Cyprus Prosperity के रूप में की।
अमेरिका ने इन हमलों को युद्धविराम का स्पष्ट उल्लंघन बताते हुए जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू की। CENTCOM ने कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और नौवहन को खतरा पहुंचाने वाली गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए तैयार है।
हालांकि जहाजों पर हमले की पूरी जिम्मेदारी को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे मौजूद हैं। इसलिए इसे अमेरिकी सरकार और CENTCOM के आरोप के रूप में ही प्रस्तुत करना अधिक तथ्यात्मक है।
ईरान का पलटवार, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकाने निशाने पर
अमेरिकी हवाई हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी सैन्य कार्रवाई की। Associated Press और Reuters की रिपोर्टों के अनुसार ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया।
इस दौरान खाड़ी के कई इलाकों में अलर्ट बढ़ाया गया। बहरीन और कुवैत में सुरक्षा गतिविधियां तेज हुईं और क्षेत्र में नए सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गई।
ईरान का कहना है कि उसकी कार्रवाई अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई।
85 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला? ईरान ने किया बड़ा दावा
ईरान ने दावा किया है कि उसने बहरीन और कुवैत में 85 अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों या लक्ष्यों को निशाना बनाया। हालांकि इस संख्या की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
इसलिए खबर में यह लिखना सबसे सटीक होगा कि “ईरान ने 85 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया”, न कि सभी 85 ठिकानों पर सफल हमला होने की पुष्टि की जाए।
ईरानी जवाबी कार्रवाई के वास्तविक नुकसान, हताहतों और निशाना बनाए गए प्रतिष्ठानों की पूरी जानकारी अभी सामने आ रही है।
NATO प्रमुख ने अमेरिकी हमलों का किया समर्थन
अमेरिका के ईरान पर नए हमलों को NATO के महासचिव मार्क रुटे का समर्थन मिला है। अंकारा शिखर सम्मेलन में उन्होंने कहा कि ईरान ने युद्धविराम का उल्लंघन किया था और अमेरिका की कड़ी प्रतिक्रिया जरूरी थी।
रुटे ने यह भी कहा कि NATO देशों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नौवहन की स्वतंत्रता और ईरान की परमाणु क्षमताओं का मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है।
इस समर्थन से साफ है कि अंकारा NATO सम्मेलन में ईरान संकट प्रमुख मुद्दों में शामिल हो गया है।
अंकारा में हो रहा 2026 का NATO शिखर सम्मेलन
तुर्की की राजधानी अंकारा में NATO का दो दिवसीय शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप 7 जुलाई को तुर्की पहुंचे थे, जहां राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने उनका स्वागत किया।
सम्मेलन का मूल एजेंडा NATO की सैन्य क्षमताओं, यूरोप की सुरक्षा और रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ा था, लेकिन अमेरिका-ईरान के बीच ताजा सैन्य टकराव अब चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।
क्या बातचीत के सभी रास्ते बंद हो गए?
ट्रंप ने समझौते को खत्म बताया है और तेहरान के साथ आगे जुड़ने में अनिच्छा दिखाई है। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी पक्ष ने वार्ता की संभावना को पूरी तरह औपचारिक रूप से बंद नहीं किया है।
यानी राजनीतिक स्थिति विरोधाभासी बनी हुई है—एक ओर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई तेज हुई है और ट्रंप समझौते को खत्म बता रहे हैं, दूसरी ओर भविष्य में किसी स्तर पर बातचीत की संभावना पूरी तरह समाप्त घोषित नहीं की गई है।
फिलहाल दोनों देशों के बीच भरोसा लगभग खत्म होता दिखाई दे रहा है।
पिछले महीने बनी थी नाजुक अंतरिम व्यवस्था
अमेरिका और ईरान के बीच जून में एक अंतरिम व्यवस्था बनी थी, जिसका उद्देश्य युद्ध रोकना, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा सुरक्षित बनाना और स्थायी समाधान के लिए बातचीत शुरू करना था।
लेकिन समझौते के बाद भी कई अहम मुद्दे अनसुलझे रहे। इनमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम, तेल बिक्री, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा और अमेरिकी सैन्य मौजूदगी प्रमुख थे।
अब जहाजों पर हमले, अमेरिकी बमबारी और ईरानी पलटवार के बाद वह नाजुक व्यवस्था लगभग टूटती दिखाई दे रही है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर बना संघर्ष का केंद्र
ताजा अमेरिका-ईरान संकट का केंद्र एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बन गया है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा और व्यापारिक समुद्री मार्गों में से एक है।
अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने इस मार्ग से गुजर रहे तीन व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया। इसी घटना को 80 से ज्यादा ईरानी लक्ष्यों पर अमेरिकी कार्रवाई की वजह बताया गया है।
नए सैन्य तनाव का असर खाड़ी के बाजारों और तेल कीमतों पर भी दिखाई दिया। मध्य पूर्व में नए हमलों और ईरानी तेल पर अमेरिकी पाबंदियों से कई खाड़ी शेयर बाजारों पर दबाव पड़ा।
अमेरिका-ईरान के बीच अब आगे क्या?
ट्रंप के ताजा बयान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका फिलहाल ईरान के साथ बनी अंतरिम व्यवस्था को प्रभावी नहीं मान रहा।
अमेरिका ने 80 से ज्यादा ईरानी लक्ष्यों पर हमला किया है। ईरान ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य सुविधाओं पर पलटवार किया है। दोनों देश एक-दूसरे पर समझौता तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह टकराव सीमित जवाबी हमलों तक रहेगा या फिर अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर पूर्ण पैमाने का युद्ध शुरू होगा।
फिलहाल अंकारा NATO सम्मेलन, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और खाड़ी में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।
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