राम मंदिर के चढ़ावे में कथित करोड़ों रुपये की चोरी को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के दावे के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है। हालांकि, इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भी ऐसे आरोपों को खारिज किया है।
विवाद तब शुरू हुआ जब अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और चोरी का मुद्दा उठाया। इसके बाद सोशल मीडिया पर यह विषय तेजी से वायरल हो गया और ट्रस्ट से जवाब मांगा जाने लगा।
ट्रस्ट ने आरोपों को बताया आधारहीन
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव Champat Rai ने स्पष्ट किया कि मंदिर के चढ़ावे में चोरी या गड़बड़ी की कोई जानकारी उनके संज्ञान में नहीं आई है।
ट्रस्ट की ओर से कहा गया कि दान और चढ़ावे की गिनती निर्धारित प्रक्रिया और बैंकिंग प्रणाली के तहत होती है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है।
पुलिस ने भी गिरफ्तारी की खबरों का किया खंडन
सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में चढ़ावे की कथित चोरी के संबंध में गिरफ्तारी की बातें भी सामने आई थीं। हालांकि पुलिस ने बाद में स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।
इसके बाद पूरे विवाद को लेकर कई सवाल खड़े होने लगे और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए।
राम मंदिर को लेकर पहले भी उठते रहे हैं विवाद
राम मंदिर परियोजना को लेकर अतीत में भी विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा सवाल उठाए जाते रहे हैं। समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी नेताओं ने समय-समय पर भूमि खरीद, परियोजना लागत और प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर सवाल खड़े किए हैं।
हालांकि कई मामलों में जांच एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद आरोपों को लेकर अलग-अलग निष्कर्ष सामने आए हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट के पास कितना है फंड?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिसंबर 2025 तक ट्रस्ट को दान, ब्याज और अन्य स्रोतों से कुल लगभग 4,575 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे।
ट्रस्ट के अनुसार, मंदिर निर्माण, परिसर विस्तार, भूमि अधिग्रहण और अन्य विकास कार्यों पर लगभग 2,475 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
इस प्रकार ट्रस्ट के पास उस समय लगभग 2,100 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध बताई गई थी।
सालाना दान और आय का विवरण
वित्त वर्ष 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रस्ट की कुल आय लगभग 327 करोड़ रुपये रही।
इसमें:
- लगभग 153 करोड़ रुपये दान के रूप में प्राप्त हुए।
- करीब 173 करोड़ रुपये बैंक जमा पर मिले ब्याज से आए।
रिपोर्ट के अनुसार, औसतन प्रतिदिन लगभग 42 लाख रुपये का चढ़ावा मंदिर में प्राप्त हुआ।
कैसे होती है दान की गिनती?
राम मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए कई दान पात्र स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा ऑनलाइन दान और कंप्यूटरीकृत काउंटरों की भी व्यवस्था है।
दान राशि की गिनती के लिए 14 सदस्यीय टीम बनाई गई है, जिसमें बैंक कर्मचारी और ट्रस्ट प्रतिनिधि शामिल होते हैं। ट्रस्ट का दावा है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और रिकॉर्ड आधारित होती है।
राजनीतिक बहस के केंद्र में राम मंदिर
राम मंदिर देश की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक परियोजनाओं में से एक माना जाता है। ऐसे में मंदिर प्रबंधन, चढ़ावे और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े किसी भी दावे का राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव व्यापक होता है।
फिलहाल चढ़ावा चोरी के आरोपों को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है और संबंधित पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। आने वाले दिनों में यदि कोई जांच या आधिकारिक रिपोर्ट सामने आती है तो स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
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