प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के बलिदान दिवस पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके संघर्ष, त्याग और जनजातीय समाज के प्रति समर्पण को याद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का जीवन जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष तथा जनजातीय समाज के स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने संदेश में कहा कि धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा ने विदेशी शासन के खिलाफ अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया और अपना पूरा जीवन जनजातीय समाज की संस्कृति, पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया।
धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जी के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। उन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए विदेशी हुकूमत के विरुद्ध अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया। उनका पूरा जीवन जनजातीय समाज के स्वाभिमान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा को समर्पित रहा। मातृभूमि के लिए सर्वस्व… pic.twitter.com/C4y15CKfjM
— Narendra Modi (@narendramodi) June 9, 2026
पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में लिखा,
“धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जी के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। उन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए विदेशी हुकूमत के खिलाफ अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया। उनका पूरा जीवन जनजातीय समाज के स्वाभिमान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा को समर्पित रहा। मातृभूमि के लिए सर्वस्व त्याग करने की उनकी गाथा देश की हर पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति का संचार करती रहेगी।”
कौन थे भगवान बिरसा मुंडा?
भगवान बिरसा मुंडा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन महान जननायकों में शामिल हैं जिन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ आदिवासी समाज को संगठित किया। उनका जन्म 15 नवंबर 1875 को वर्तमान झारखंड के उलीहातु गांव में हुआ था।
उन्होंने ब्रिटिश शासन और शोषणकारी व्यवस्था के खिलाफ “उलगुलान” (महाविद्रोह) का नेतृत्व किया, जिसने आदिवासी समाज में स्वतंत्रता और अधिकारों की चेतना जगाई।
जल, जंगल और जमीन की लड़ाई के प्रतीक
बिरसा मुंडा ने आदिवासी समुदायों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उन्होंने अंग्रेजों की नीतियों और जमींदारी व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई तथा जनजातीय समाज को अपनी पहचान और संसाधनों की रक्षा के लिए संगठित किया।
आज भी उन्हें आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और सामाजिक न्याय के सबसे बड़े प्रतीकों में गिना जाता है।
जनजातीय गौरव के प्रतीक हैं बिरसा मुंडा
केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में भगवान बिरसा मुंडा की विरासत को सम्मान देने के लिए कई पहलें की हैं। उनके जन्मदिवस 15 नवंबर को “जनजातीय गौरव दिवस” के रूप में मनाया जाता है।
सरकार का मानना है कि बिरसा मुंडा का जीवन युवाओं और आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र सेवा, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक संरक्षण की प्रेरणा देता रहेगा।
देशभर में याद किए गए धरती आबा
भगवान बिरसा मुंडा के बलिदान दिवस पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जनजातीय समुदायों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया।
विशेष रूप से झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में स्मरण कार्यक्रम आयोजित किए गए।
राष्ट्रभक्ति और संघर्ष की अमर गाथा
भगवान बिरसा मुंडा का जीवन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने अपने अल्प जीवन में जनजातीय समाज को संगठित कर ब्रिटिश शासन को चुनौती दी और स्वतंत्रता की चेतना को नई दिशा दी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनका बलिदान और संघर्ष देश की हर पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति, आत्मसम्मान और मातृभूमि के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता रहेगा।
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