उत्तर प्रदेश के संभल में वर्ष 1978 के सांप्रदायिक दंगों से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। दंगों में मारे गए रामशरण दास रस्तोगी के परिवार को प्रशासन द्वारा 100 गज जमीन का पट्टा दिया जा रहा है, ताकि परिवार दोबारा अपने पैतृक क्षेत्र में बस सके।
संभल प्रशासन के अनुसार, यह भूमि आलम सराय क्षेत्र में स्थित सरकारी जमीन से आवंटित की जा रही है, जिसे हाल ही में अतिक्रमण मुक्त कराया गया था।
डीएम और एसपी की मौजूदगी में होगा पट्टा वितरण
प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, 3 जून 2026 को संभल के जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई की मौजूदगी में पीड़ित परिवार को भूमि का पट्टा सौंपा जाएगा।
बताया जा रहा है कि यह वही मामला है जिसे लेकर रस्तोगी परिवार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर पुनर्वास और न्याय की मांग की थी।
मुख्यमंत्री योगी से की थी न्याय की अपील
रामशरण रस्तोगी के पौत्र कपिल रस्तोगी ने अपनी बुजुर्ग माता के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर परिवार के विस्थापन और संपत्ति से जुड़े मुद्दों को उठाया था।
इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच कराई। प्रशासनिक जांच में यह पुष्टि हुई कि रस्तोगी परिवार 1978 के दंगों के बाद संभल छोड़ने को मजबूर हुआ था।
कैसे तैयार की गई जमीन?
राजस्व विभाग की जांच के बाद आलम सराय क्षेत्र में स्थित सरकारी भूमि का सीमांकन किया गया।
प्रशासन के अनुसार, लगभग तीन बीघा सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतें थीं। जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद जमीन को कब्जामुक्त कराया गया और उसमें से 100 गज भूमि रस्तोगी परिवार को देने का निर्णय लिया गया।
कौन थे रामशरण रस्तोगी?
परिवार के अनुसार, रामशरण रस्तोगी संभल के मोहल्ला ठेर क्षेत्र में परचून व्यवसाय चलाते थे।
1978 के सांप्रदायिक दंगों के दौरान उनकी हत्या कर दी गई थी। परिवार का आरोप है कि दंगों के दौरान उनकी दुकान लूटी गई, आग लगा दी गई और हत्या के बाद शव को छिपाने का प्रयास किया गया।
दंगों के बाद पूरा परिवार संभल छोड़कर दिल्ली में बस गया था।
1978 के संभल दंगे क्यों रहे चर्चित?
संभल में 29 मार्च 1978 को हुए सांप्रदायिक दंगे उत्तर प्रदेश के इतिहास के चर्चित दंगों में गिने जाते हैं।
विभिन्न रिपोर्टों और अभिलेखों के अनुसार, दंगे कई दिनों तक चले थे और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। इसके बाद लंबे समय तक कर्फ्यू लागू रहा और कई परिवारों को विस्थापित होना पड़ा।
दंगे से जुड़े कई मुकदमे दर्ज हुए, हालांकि वर्षों बाद अनेक मामलों में कानूनी कार्रवाई समाप्त हो गई या आरोपितों को अदालत से राहत मिल गई।
तुलसीराम परिवार को भी मिला था पुनर्वास
रस्तोगी परिवार से पहले इसी दंगे से प्रभावित तुलसीराम के परिवार को भी प्रशासन ने भूमि वापस दिलाई थी।
जनवरी 2025 में प्रशासनिक कार्रवाई के बाद तुलसीराम परिवार को कथित रूप से उनकी जमीन का कब्जा दिलाया गया था। यह कार्रवाई भी राजस्व विभाग और पुलिस की निगरानी में हुई थी।
संभल में पुनर्वास और अतिक्रमण हटाने का अभियान
पिछले कुछ समय से संभल प्रशासन सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों और राजस्व अभिलेखों से जुड़े मामलों की समीक्षा कर रहा है।
प्रशासन का कहना है कि जिन परिवारों के दावे दस्तावेजों और जांच में सही पाए जाएंगे, उनके मामलों पर कानून के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बना मामला
रस्तोगी परिवार को भूमि आवंटन का मामला राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
समर्थकों का कहना है कि यह दंगा पीड़ित परिवारों के पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जबकि आलोचकों का कहना है कि ऐसे मामलों में सभी प्रभावित परिवारों के लिए समान और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
फिलहाल प्रशासन भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर रहा है और रस्तोगी परिवार करीब पांच दशक बाद अपने पैतृक क्षेत्र में दोबारा बसने की तैयारी कर रहा है।
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