अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ अंतरिम सीजफायर व्यवस्था को खत्म घोषित किए जाने के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी सेना ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए।
ताजा हमलों में अमेरिका ने ईरान के करीब 90 ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें सैन्य रनवे, मिसाइल लॉन्चर, ड्रोन से जुड़े ठिकाने, पुल और अन्य रणनीतिक सैन्य ढांचे शामिल बताए गए हैं। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों की आवाजाही को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच चुका है।
ईरान के कई शहरों और बंदरगाह क्षेत्रों में धमाके
ताजा अमेरिकी हमलों के बाद ईरान के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में धमाकों की खबरें सामने आईं। रिपोर्टों के मुताबिक, बुशेहर, चाबहार, बंदर अब्बास, जास्क, सीरिक और अबू मूसा द्वीप के आसपास हमलों या विस्फोटों की सूचना मिली।
इनमें से कई इलाके होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी के बेहद करीब हैं। रणनीतिक दृष्टि से यह पूरा क्षेत्र ईरान की नौसैनिक क्षमता और अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। चाबहार के कुछ हिस्सों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने और अलग-अलग क्षेत्रों में हताहतों की खबरें भी सामने आई हैं।
According to a release from U.S. Central Command, in the most recent wave of U.S. strikes against Iran in response to the Iranian targeting of commercial shipping, 90 military targets, including military logistics infrastructure, missile and drone storage sites, air defense… pic.twitter.com/c1sRyvbN5H
— OSINTdefender (@sentdefender) July 9, 2026
लगभग 90 ठिकानों पर हमला, अमेरिका ने क्या-क्या निशाना बनाया?
अमेरिका की ओर से किए गए हमलों में करीब 90 लक्ष्यों को निशाना बनाए जाने की पुष्टि अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में की गई है।
बताया गया है कि हमले मुख्य रूप से इन ठिकानों पर केंद्रित थे:
- सैन्य रनवे
- मिसाइल लॉन्चिंग साइट्स
- ड्रोन से जुड़े सैन्य ठिकाने
- रणनीतिक पुल और अन्य बुनियादी ढांचा
- होर्मुज के आसपास ईरान की सैन्य क्षमता से जुड़े लक्ष्य
अमेरिका का कहना है कि उसकी कार्रवाई ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने और होर्मुज में व्यापारिक जहाजों पर कथित हमलों का जवाब देने के लिए की गई।
ट्रंप ने कहा- ईरान के साथ अंतरिम समझौता ‘खत्म’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 8 जुलाई 2026 को अंकारा में NATO शिखर सम्मेलन के दौरान घोषणा की कि ईरान के साथ बनी अंतरिम व्यवस्था अब खत्म हो चुकी है।
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान की मध्यस्थता से बने इस अंतरिम समझौते में 60 दिनों की संघर्षविराम अवधि तय की गई थी, ताकि स्थायी समाधान के लिए बातचीत हो सके। हालांकि अप्रत्यक्ष वार्ता में प्रगति नहीं हुई और होर्मुज में जहाजों पर हमलों के बाद हालात फिर बिगड़ गए।
ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए संकेत दिया था कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है। कुछ ही घंटों बाद ईरान के खिलाफ नए अमेरिकी हमले शुरू हो गए।
होर्मुज में तीन तेल टैंकरों पर हमले के बाद अमेरिकी जवाबी कार्रवाई
अमेरिका ने ताजा हमलों को होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के खिलाफ हुई घटनाओं से जोड़कर देखा है।
अमेरिकी पक्ष का आरोप है कि ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों को निशाना बनाया। तीन टैंकरों से जुड़ी घटनाओं के बाद वाशिंगटन ने इसे वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए गंभीर खतरा बताया। इसके बाद अमेरिका ने लगातार दूसरी रात ईरानी ठिकानों पर हमले किए।
अमेरिका का दावा- होर्मुज पर ईरान की पकड़ कमजोर करना जरूरी
अमेरिका ने कहा है कि उसकी सैन्य कार्रवाई का प्रमुख उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को बाधित करने की ईरानी क्षमता को कम करना है।
होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री मार्गों में से एक है। यहां किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष या नौवहन बाधा का असर कच्चे तेल, गैस, खाद, कंटेनर कार्गो और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। ताजा संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों और समुद्री परिवहन को लेकर चिंता बढ़ गई है।
जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा किया
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। ईरान के अनुसार, उसने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। दोनों देशों में संभावित हवाई या मिसाइल हमलों की चेतावनी के लिए सायरन बजाए जाने की खबरें भी सामने आईं।
कुछ रिपोर्टों में ईरान की ओर से खाड़ी के अन्य अमेरिकी हितों पर भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया गया है।
अब्बास, जास्क और चाबहार क्यों हैं बेहद महत्वपूर्ण?
बंदर अब्बास ईरान के सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह क्षेत्रों में शामिल है और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित होने के कारण इसका सैन्य और व्यापारिक महत्व बहुत बड़ा है। जास्क ईरान की समुद्री रणनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है, जबकि चाबहार हिंद महासागर से जुड़े रणनीतिक समुद्री नेटवर्क का हिस्सा है।
अमेरिकी हमलों का इन तटीय क्षेत्रों तक पहुंचना यह संकेत देता है कि मौजूदा संघर्ष अब केवल सीमित सैन्य ठिकानों तक नहीं रहा, बल्कि ईरान की व्यापक समुद्री और सैन्य क्षमता को निशाना बनाया जा रहा है।
अली खामेनेई की अंतिम यात्रा के बीच बढ़ा तनाव
ताजा अमेरिकी कार्रवाई ऐसे समय हुई जब ईरान में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की छह दिन लंबी अंतिम यात्रा चल रही थी और 9 जुलाई को मशहद में उन्हें दफनाए जाने का कार्यक्रम था।
खामेनेई की अंतिम यात्रा तेहरान से शुरू होकर मशहद तक पहुंचनी थी। ईरानी पक्ष ने दावा किया कि कुछ अमेरिकी हमलों ने मशहद की ओर जाने वाले मार्गों और बुनियादी ढांचे को प्रभावित किया। इस विशिष्ट दावे की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है, इसलिए इसे ईरानी पक्ष का दावा ही माना जाना चाहिए।
IRGC ने बदला लेने की धमकी दी
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में और हमलों की चेतावनी दी है।
ईरानी नेतृत्व और सैन्य अधिकारियों ने साफ किया है कि अमेरिकी हमलों का जवाब दिया जाएगा। वहीं अमेरिका ने भी संकेत दिया है कि यदि होर्मुज में जहाजों पर हमले जारी रहे तो और सैन्य कार्रवाई हो सकती है। इससे संघर्ष के और व्यापक होने का खतरा बढ़ गया है।
भारतीय तेल टैंकर को वापस भेजने का दावा
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव का असर भारत से जुड़े समुद्री व्यापार पर भी दिखाई दे रहा है। ईरान की अर्ध-सरकारी फार्स न्यूज एजेंसी के हवाले से रिपोर्ट किया गया कि ओमानी मार्ग से होर्मुज पार करने की कोशिश कर रहे एक भारतीय तेल टैंकर को वापस भेज दिया गया।
ईरानी पक्ष ने जहाजों से ओमान की ओर वाले मार्ग के बजाय उसके द्वारा नियंत्रित मार्ग का इस्तेमाल करने की मांग की है।
वैश्विक जहाजरानी और तेल बाजार पर संकट
होर्मुज में बढ़ते तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही बाधित हुई है। कई टैंकरों को अपना मार्ग बदलना पड़ा है और कुछ जहाजों ने यू-टर्न भी लिया। इस स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को चिंता में डाल दिया है। तेल और गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ा है, जबकि शिपिंग और बीमा लागत में भी वृद्धि का खतरा है।
खाड़ी में फंसे जहाजों के लिए वैकल्पिक समुद्री व्यवस्था
होर्मुज संकट के बीच ओमान और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संस्थाओं की ओर से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर काम किया जा रहा है।
इसका उद्देश्य संकटग्रस्त क्षेत्र में फंसे टैंकरों और व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराना है। हालांकि स्थिति लगातार बदल रही है और समुद्री मार्गों की सुरक्षा अभी भी बड़े सवालों के घेरे में है।
क्या फिर पूर्ण युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं अमेरिका और ईरान?
अंतरिम सीजफायर व्यवस्था खत्म होने, अमेरिका द्वारा 90 ठिकानों पर हमले और ईरान की खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के दावों ने पूर्ण युद्ध की आशंका को फिर बढ़ा दिया है। सबसे बड़ा खतरा यह है कि संघर्ष केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित न रहकर बहरीन, कुवैत, कतर और पूरे फारस की खाड़ी क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है। वर्तमान संकट का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी और एशिया की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel