20 जुलाई 2026 को दिल्ली में आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कथित ‘संसद चलो’ मार्च को लेकर सोशल मीडिया और जमीनी घटनाक्रम की तस्वीरें एक-दूसरे से काफी अलग दिखाई दीं। इंस्टाग्राम रील्स और कई सोशल मीडिया पोस्ट में प्रदर्शनकारियों को पुलिस कार्रवाई का पीड़ित बताया गया, जबकि दूसरी ओर सामने आए कई वीडियो में पथराव, पुलिसकर्मियों से मारपीट, वाहनों में तोड़फोड़ और पत्रकारों के साथ बदसलूकी के दृश्य दिखाई दिए।
प्रदर्शन के बाद सबसे बड़ा सवाल सोशल मीडिया पर बनाए गए उस नैरेटिव को लेकर खड़ा हुआ, जिसमें कथित रूप से पुलिस की कार्रवाई को प्रमुखता दी गई, लेकिन घायल पुलिसकर्मियों, क्षतिग्रस्त वाहनों और हिंसक प्रदर्शनकारियों के वीडियो को अपेक्षाकृत कम जगह मिली।
सोशल मीडिया एल्गोरिदम पर एकतरफा सामग्री परोसने का आरोप
प्रदर्शन की रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर CJP समर्थक कंटेंट तेजी से वायरल हुआ। बड़ी संख्या में वीडियो में पुलिस की कार्रवाई, बैरिकेडिंग और प्रदर्शनकारियों की चोटों को दिखाया गया। हालांकि, हिंसा के दूसरे पहलुओं से जुड़े वीडियो और तस्वीरें कई यूजर्स की टाइमलाइन से लगभग गायब रहे।
आलोचकों का आरोप है कि इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम ने एकतरफा सामग्री को अधिक बढ़ावा दिया। इससे युवा यूजर्स के सामने पूरे घटनाक्रम के बजाय चयनित तस्वीरें ही पहुंचीं।
#PeekOnGround: While several protesters told Peek TV that they were not aware of where to go during the CJP’s Sansad March, when Peek TV raised the question of mismanagement by the Cockroach Janta Party leadership, several protesters heckled the team, calling them ‘Godi media’. pic.twitter.com/FBZxi91okd
— Peek TV (@PeekTV_in) July 20, 2026
118 से अधिक पुलिसकर्मियों के घायल होने का दावा
दिल्ली पुलिस की ओर से दी गई प्रारंभिक जानकारी में पहले करीब 50 पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात कही गई थी। बाद में यह संख्या बढ़कर 118 से अधिक बताई गई। कई तस्वीरों में पुलिसकर्मियों के सिर, आंख और नाक पर गंभीर चोटें दिखाई दीं।
कुछ वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारियों की भीड़ एक पुलिसकर्मी को घेरकर जमीन पर गिराती और उसके साथ मारपीट करती दिखाई दी। अन्य वीडियो में प्रदर्शनकारी पुलिस वैन पर चढ़े हुए और वाहनों में तोड़फोड़ करते नजर आए।
पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार के घायल पुलिसकर्मियों से अस्पताल में मुलाकात करने की जानकारी भी सामने आई। हालांकि, सभी वायरल वीडियो और सोशल मीडिया दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।
"मोदी मुरादाबाद
केजरीवाल ज़िंदाबाद
उमर खालिद की जय असम देश से अलग हो गया तो क्या हुआ" – युवा कॉकरोच की सोच देखिए pic.twitter.com/JPniL2wAVm— Mamta (@Mamta010619) July 21, 2026
पाकिस्तानी सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच
दिल्ली पुलिस की प्रारंभिक जांच में कुछ पाकिस्तानी सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा प्रदर्शन से जुड़ी कथित भ्रामक जानकारी प्रसारित किए जाने की बात सामने आई। इन पोस्ट्स में सात प्रदर्शनकारियों की मौत, 391 लोगों के घायल होने और 250 लोगों की गिरफ्तारी जैसे दावे किए गए थे।
दिल्ली पुलिस ने कथित मौतों की खबरों का खंडन किया। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि विदेशी सोशल मीडिया अकाउंट्स से गलत जानकारी फैलाने के पीछे कोई संगठित अभियान था या नहीं। पुलिस के मुताबिक करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
https://twitter.com/UnSubtleDesi/status/2079185574091804944
शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसा में कैसे बदला?
CJP के नेता बताए जाने वाले अभिजीत दिपके के नेतृत्व में 20 जून 2026 से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू हुआ था। संगठन की ओर से इसे छात्रों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़ा शांतिपूर्ण आंदोलन बताया गया था।
लेकिन 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च में हालात बिगड़ गए। वायरल वीडियो में कुछ लोग ईंट और पत्थर लिए दिखाई दिए। कई प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ने और संसद की ओर बढ़ने का प्रयास किया।
एक छात्र के हवाले से दावा किया गया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने सामान्य छात्रों को भी पथराव के लिए उकसाया। पत्रकार अभिनव पांडे के एक वीडियो में भी प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव होने का दावा किया गया।
कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर पर पथराव का आरोप
प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर की ओर भी पथराव किए जाने का आरोप लगा। वायरल वीडियो में चेहरा ढके कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पर चढ़ते और आगे बढ़ते दिखाई दिए।
हालांकि, मंदिर पर पथराव से जुड़े सभी दावों की आधिकारिक जांच और पुष्टि आवश्यक है। पुलिस अलग-अलग वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान कर रही है।
ईंट लेकर धमकी देने का वीडियो वायरल
चंडीगढ़ से प्रदर्शन में पहुंचे एक युवक का कथित वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें वह हाथ में ईंट लेकर संसद में प्रवेश से रोके जाने पर हमला करने की धमकी देता दिखाई दिया।
वीडियो में युवक की आवाज लड़खड़ाने के आधार पर सोशल मीडिया यूजर्स ने उसके नशे में होने का दावा किया। हालांकि, उसकी मेडिकल जांच से जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
https://twitter.com/ZiviiBloom/status/2079183589460390218
असली छात्रों ने आंदोलन के राजनीतिकरण पर उठाए सवाल
राजस्थान से आए एक युवा प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि वह NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर दिल्ली पहुंचा था, लेकिन प्रदर्शन स्थल पर अलग-अलग राजनीतिक और छात्र संगठनों का प्रभाव दिखाई दिया।
उसने कहा कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों के बजाय राजनीतिक नारेबाजी और अलग-अलग विचारधाराओं का प्रदर्शन अधिक दिखाई दे रहा था। ऐसे में वास्तविक छात्र खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे थे।
True face of cockroaches
It was never for students. 💔 pic.twitter.com/y7b5rOtCTv
— Lala (@FabulasGuy) July 20, 2026
वायरल व्हाट्सऐप चैट्स में हिंसा की तैयारी का आरोप
प्रदर्शन से पहले के कुछ कथित व्हाट्सऐप चैट्स सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इन चैट्स में पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ने, रात में जंतर-मंतर पहुंचने, वैकल्पिक संचार ऐप इस्तेमाल करने और टकराव के लिए तैयार रहने जैसी बातें लिखे होने का दावा किया गया।
एक कथित संदेश में किसी प्रदर्शनकारी की मौत होने पर सरकार पर दबाव बढ़ने की बात लिखी गई थी। इन्हीं संदेशों को प्रदर्शन के दौरान फैलाई गई सात मौतों की झूठी खबर से जोड़कर देखा जा रहा है।
इन चैट्स की प्रामाणिकता और उनके स्रोत की आधिकारिक पुष्टि अभी आवश्यक है।
इंटरनेट बंद होने पर Briar और Bitchat के इस्तेमाल की चर्चा
JNU से जुड़े कुछ कथित छात्र संगठनों के व्हाट्सऐप ग्रुप्स में इंटरनेट सेवा प्रभावित होने की स्थिति में Briar और Bitchat जैसे ब्लूटूथ आधारित ऐप्स इस्तेमाल करने की योजना बनाए जाने का दावा किया गया।
छात्रों को रात दो से तीन बजे तक जंतर-मंतर पहुंचने के लिए कहा गया था, ताकि पुलिस द्वारा विश्वविद्यालय के गेट बंद किए जाने की आशंका से बचा जा सके। पुलिस इन कथित चैट्स और सोशल मीडिया संदेशों की जांच कर सकती है।

प्रदर्शन के दौरान CJP नेतृत्व गायब होने का आरोप
हिंसा और अव्यवस्था के दौरान CJP के प्रमुख नेताओं की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठे। अभिजीत दिपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और संगठन के कई प्रमुख वॉलंटियर्स कथित रूप से मौके पर नजर नहीं आए।
इसी बीच CJP की प्रवक्ता विजेता दहिया का मेट्रो स्टेशन पर बर्गर खाते हुए वीडियो वायरल हुआ। प्रदर्शनकारियों ने उनसे सवाल किया कि छात्रों को आंदोलन में बुलाने के बाद वह प्रदर्शन स्थल से बाहर क्यों थीं।
बाद में विजेता दहिया को प्रवक्ता पद से हटाए जाने की खबर भी सामने आई। हालांकि, संगठन की ओर से इस पर विस्तृत आधिकारिक बयान की प्रतीक्षा है।
CJP में अंदरूनी मतभेद हुए सार्वजनिक
सरकार की ओर से आश्वासन दिए जाने के बावजूद CJP समर्थकों का एक समूह जंतर-मंतर खाली करने को तैयार नहीं बताया जा रहा। दूसरी ओर संगठन में नेतृत्व और राजनीतिक प्रभाव को लेकर मतभेद भी खुलकर सामने आने लगे हैं।
कुछ पूर्व प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि खुद को गैर-राजनीतिक बताने वाला आंदोलन अब राजनीतिक संगठनों और बाहरी तत्वों के प्रभाव में आ गया है।
दिल्ली पुलिस करेगी चेहरों की पहचान
दिल्ली पुलिस वायरल वीडियो, CCTV फुटेज और सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर हिंसा में शामिल लोगों की पहचान करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए फेस रिकग्निशन और अन्य तकनीकी साधनों का इस्तेमाल किए जाने की संभावना है।
पुलिस यह भी जांच सकती है कि हिंसा अचानक भड़की थी या इसे पहले से संगठित रूप से तैयार किया गया था।
निष्कर्ष: सबसे अधिक नुकसान वास्तविक छात्रों का
पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा नुकसान उन छात्रों का हुआ, जो NEET पेपर लीक, परीक्षाओं की पारदर्शिता और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग लेकर प्रदर्शन में शामिल हुए थे।
राजनीतिक नारेबाजी, हिंसा, सोशल मीडिया पर भ्रामक दावे और नेतृत्व की कथित अनुपस्थिति के कारण छात्रों का मूल मुद्दा पीछे छूट गया। सोशल मीडिया पर पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की चोटों की चर्चा तो हुई, लेकिन पुलिसकर्मियों, पत्रकारों और आम नागरिकों के नुकसान का दूसरा पक्ष सीमित रूप से सामने आया।
इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों, भ्रामक सूचना फैलाने वाले अकाउंट्स और आंदोलन की आड़ में छात्रों को भड़काने वाले तत्वों की पहचान हो सके।
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