सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से तीन अहम आश्वासनों को पूरा करने की प्रतिबद्धता जताए जाने के बाद CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित अपने प्रदर्शन और मार्च को वापस लेने का ऐलान कर दिया है। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार के प्रतिनिधियों और CJP नेताओं के बीच बातचीत हुई है और केंद्र उन तीनों वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिन पर सहमति बनी थी।
इन आश्वासनों में छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेना, आगे नई FIR दर्ज नहीं करना और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा देना शामिल है। सरकार के रुख के बाद CJP ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वह 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च को वापस ले रही है।
छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने पर सरकार सहमत
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई बातचीत में तीन प्रमुख बिंदुओं पर भरोसा दिया गया था। जिन छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज की गई हैं, उन्हें वापस लिया जाएगा। इसके अलावा भविष्य में छात्रों के खिलाफ नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।
मेहता ने अदालत को यह भी बताया कि दिल्ली पुलिस छात्रों से संबंधित 13 FIR को आगे नहीं बढ़ाना चाहती है। हालांकि, पुलिस ऐसे 2,873 लोगों के खिलाफ एक अलग FIR दर्ज करने की अनुमति चाहती है, जिनके बारे में आपराधिक इतिहास होने की बात कही गई है।
सॉलिसिटर जनरल के मुताबिक बिहार, महाराष्ट्र, असम और पश्चिम बंगाल की ओर से भी इसी तरह की अर्जियां दाखिल की गई हैं। उन्होंने यह संभावना भी जताई कि अन्य राज्यों में भी संबंधित FIR दर्ज हो सकती हैं।
अनुच्छेद 142 के तहत FIR रद्द करने की अपील
सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए अदालत 20 जुलाई से संबंधित सभी FIR को रद्द करने का आदेश जारी कर सकती है।
उन्होंने कहा कि इससे अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और सरकार तथा प्रदर्शनकारियों के बीच बनी सहमति को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा।
आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मिलेगा मुआवजा
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने यह भी दोहराया कि आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा देने के वादे से सरकार पीछे नहीं हट रही है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मुआवजा देने के लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया और व्यवस्था तैयार करनी होगी।
सरकार की ओर से इसके लिए तीन महीने का समय मांगा गया। CJP की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने सवाल किया कि क्या तीन महीने की अवधि के भीतर केवल योजना तैयार होगी या मुआवजे का भुगतान भी कर दिया जाएगा।
इस पर सॉलिसिटर जनरल ने स्पष्ट किया कि तीन महीने के भीतर भुगतान भी किया जाएगा। उन्होंने अदालत में कहा कि सरकार अपने दिए गए आश्वासनों को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
केंद्र के भरोसे के बाद CJP ने वापस लिया 5 सितंबर का मार्च
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने CJP द्वारा 5 सितंबर को प्रस्तावित प्रदर्शन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार जब अपने आश्वासनों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, तब CJP नेताओं को अपने प्रस्तावित मार्च को लेकर निर्णय करना चाहिए।
इसके बाद CJP नेता सौरभ दास ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि संगठन ने 5 सितंबर के प्रस्तावित दिल्ली मार्च को वापस लेने का फैसला किया है।
सौरभ दास ने अदालत में सरकार के प्रयासों और सकारात्मक रुख की सराहना भी की। उन्होंने अपने वकीलों का आभार जताते हुए कहा कि सरकार के सकारात्मक आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट की ओर से पारित किए जा रहे न्यायिक आदेश को देखते हुए CJP ने मार्च का आह्वान वापस लेना उचित समझा है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने भी सरकार और CJP के रुख पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि दोनों पक्ष अच्छी भावना और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ें तो विवादों का समाधान निकाला जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में हुई इस सुनवाई के बाद अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि छात्रों पर दर्ज FIR को वापस लेने, आगे नई FIR नहीं करने और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने से जुड़े आश्वासनों को सरकार किस तरह और कितनी जल्दी लागू करती है।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel