नई दिल्ली में आयोजित BRICS Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक को लेकर विदेश मंत्रालय (MEA) ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पीएम मोदी ने बातचीत के दौरान भारत की चिंताओं को उठाया और इस बात पर जोर दिया कि भारत और चीन को एक-दूसरे की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के संबंध तीन महत्वपूर्ण सिद्धांतों—आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता—से निर्देशित होने चाहिए। दोनों नेताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत और चीन के बीच मौजूद मतभेदों को विवाद का रूप नहीं लेना चाहिए और द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक तथा दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
ताइवान और तिब्बत के मुद्दे पर विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से मोदी-जिनपिंग बैठक को लेकर चीन की ओर से जारी बयान के बारे में सवाल पूछा गया। चीनी पक्ष के बयान में ताइवान और तिब्बत से संबंधित मुद्दों पर भारत की नीति का उल्लेख किया गया था।
इस पर रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत के दौरान कई मुद्दे सामने आए थे और भारत पहले ही उनसे संबंधित जानकारी साझा कर चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत में भारतीय चिंताओं का भी उल्लेख किया।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि दोनों पक्षों को एक-दूसरे की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और आपसी सम्मान, आपसी हित तथा आपसी संवेदनशीलता के तीन सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
Bi-Weekly Media Briefing by the Official Spokesperson (September 15, 2026)
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— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) September 15, 2026
12 सितंबर को हुई मोदी-जिनपिंग द्विपक्षीय बैठक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 12 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय बैठक हुई थी। दोनों नेताओं के बीच भारत-चीन संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक का एक प्रमुख संदेश यह रहा कि दोनों देशों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन्हें विवाद में तब्दील होने से रोकना जरूरी है। भारत और चीन दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और महत्वपूर्ण पड़ोसी देश हैं, इसलिए दोनों नेताओं ने संबंधों को दीर्घकालिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
भारत-चीन संबंधों में ‘स्थिर प्रगति’ का स्वागत
बैठक के बाद विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई अपनी पिछली बैठक के बाद से भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में हुई स्थिर प्रगति का स्वागत किया।
मोदी और जिनपिंग ने इस बात की पुष्टि की कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए। दोनों नेताओं ने माना कि मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित को भारत-चीन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण आधार बताया।
सीमा पर शांति को PM मोदी ने बताया जरूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक में भारत-चीन सीमा से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास के लिए आवश्यक आधार है।
भारत और चीन के संबंधों में सीमा विवाद लंबे समय से सबसे संवेदनशील मुद्दों में शामिल रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के आसपास शांति बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
सीमा से जुड़े समझौतों का पालन करने पर जोर
विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में दोनों पक्षों की ओर से सीमा से जुड़े मौजूदा समझौतों और सहमतियों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
दोनों नेताओं ने सीमा प्रश्न का निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान तलाशने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। इसके लिए दोनों देशों के समग्र द्विपक्षीय संबंधों के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य और भारत तथा चीन की जनता के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखने की बात कही गई।
व्यापार असंतुलन पर भी हुई चर्चा
भारत-चीन के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंध भी मोदी-जिनपिंग बैठक का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की आर्थिक चिंताओं को दूर करने की जरूरत पर जोर दिया।
विशेष रूप से संरचनात्मक व्यापार असंतुलन और सप्लाई चेन से संबंधित मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत लंबे समय से चीन के साथ बड़े व्यापार घाटे और भारतीय उत्पादों के लिए बेहतर बाजार पहुंच का मुद्दा उठाता रहा है।
दोनों नेताओं ने सार्थक और पूर्वानुमानित मार्केट एक्सेस को सुगम बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसका उद्देश्य व्यापारिक संबंधों को अधिक संतुलित और स्थिर बनाना है।
सांस्कृतिक और कारोबारी संबंध बढ़ाने पर सहमति
मोदी और जिनपिंग ने दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क में हुई प्रगति पर भी गौर किया। बैठक में सांस्कृतिक आदान-प्रदान, कारोबारी संबंधों और भारत तथा चीन के नागरिकों की अधिक आवाजाही को प्रोत्साहित करने की जरूरत पर चर्चा हुई।
People-to-People Contact को दोनों देशों के रिश्तों में विश्वास बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। पर्यटन, शिक्षा, संस्कृति और व्यापार जैसे क्षेत्रों में लोगों के बीच संपर्क बढ़ने से द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर साझा आधार बढ़ाने पर जोर
विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया। दोनों नेताओं ने माना कि भारत और चीन को साझा हित वाले मुद्दों पर सहयोग का दायरा बढ़ाना चाहिए और चुनौतियों से निपटने के लिए संवाद जारी रखना चाहिए।
दुनिया की दो बड़ी आबादी और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के रूप में भारत और चीन का वैश्विक राजनीति, व्यापार और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसे में दोनों देशों के संबंधों का असर केवल एशिया ही नहीं, बल्कि व्यापक वैश्विक व्यवस्था पर भी पड़ता है।
जयशंकर और अजीत डोभाल भी बैठक में रहे मौजूद
प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की इस महत्वपूर्ण बैठक में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल समेत भारत के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
BRICS Summit 2026 के दौरान हुई इस मुलाकात में सीमा विवाद से लेकर व्यापार असंतुलन, सप्लाई चेन, बाजार पहुंच और People-to-People संबंधों तक कई महत्वपूर्ण विषय सामने आए। भारत की ओर से मुख्य संदेश यही रहा कि द्विपक्षीय रिश्तों में आगे बढ़ने के लिए सीमा पर शांति के साथ एक-दूसरे की चिंताओं और हितों के प्रति संवेदनशीलता जरूरी है।
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