पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े जोखिमों के बीच भारत के लिए खाड़ी देशों तक सामान पहुंचाने के वैकल्पिक रास्तों की अहमियत बढ़ गई है। इस बदलते कारोबारी और रणनीतिक माहौल में ओमान का सोहर पोर्ट (Sohar Port) भारत के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभर रहा है। होर्मुज के सबसे संकरे हिस्से से बाहर स्थित सोहर भारतीय कंपनियों को समुद्री मार्ग के साथ सड़क और भविष्य में रेल नेटवर्क के जरिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब और खाड़ी के दूसरे बाजारों तक पहुंचने का अतिरिक्त रास्ता उपलब्ध करा सकता है।
सोहर पोर्ट की बढ़ती अहमियत केवल मौजूदा संकट तक सीमित नहीं है। भारत और ओमान के बीच लंबे समय से मजबूत रणनीतिक और कारोबारी संबंध हैं। बदलते भू-राजनीतिक हालात, सप्लाई चेन की सुरक्षा और खाड़ी के बड़े बाजारों तक वैकल्पिक कनेक्टिविटी की जरूरत ने सोहर को भारत के लिए और महत्वपूर्ण बना दिया है।
होर्मुज संकट के बीच क्यों बढ़ी सोहर पोर्ट की अहमियत?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार और ऊर्जा मार्गों में शामिल है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की स्थिति में इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों के लिए सुरक्षा, शिपिंग लागत और इंश्योरेंस प्रीमियम जैसी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
ऐसी परिस्थितियों में ओमान का सोहर पोर्ट अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण महत्वपूर्ण हो जाता है। यह होर्मुज के सबसे संकरे और संवेदनशील हिस्से के बाहर स्थित है। भारतीय बंदरगाहों से सामान सोहर पहुंचाने के बाद उसे दूसरे समुद्री मार्गों या सड़क नेटवर्क के जरिए खाड़ी के विभिन्न बाजारों तक भेजा जा सकता है।
इससे भारतीय निर्यातकों को पारंपरिक समुद्री मार्गों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय एक अतिरिक्त लॉजिस्टिक्स विकल्प मिल सकता है।
भारत-सोहर फीडर शिप सर्विस में चार गुना बढ़ोतरी
रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में संकट शुरू होने के बाद भारत और सोहर के बीच चलने वाली फीडर शिप सेवाओं में करीब चार गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि कारोबारी कंपनियां वैकल्पिक सप्लाई रूट के तौर पर सोहर का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं।
पहले जिन भारतीय उत्पादों को बड़े जहाजों के जरिए सीधे खाड़ी के विभिन्न बंदरगाहों तक पहुंचाया जाता था, उनमें से कुछ कार्गो को अब सोहर पहुंचाकर वहां से आगे भेजने का विकल्प इस्तेमाल किया जा रहा है।
यह व्यवस्था संकट के समय सप्लाई चेन में विविधता लाने में मदद कर सकती है। खासकर उन भारतीय कंपनियों के लिए यह महत्वपूर्ण हो सकती है जिनका UAE, सऊदी अरब और दूसरे खाड़ी देशों में बड़ा बाजार है।
भारतीय कंपनियों को आकर्षित कर रहा ओमान
ओमान अब भारतीय कंपनियों को केवल सोहर पोर्ट इस्तेमाल करने के लिए ही नहीं, बल्कि बंदरगाह से जुड़े Sohar Freezone में निवेश के लिए भी आकर्षित कर रहा है।
सितंबर में नई दिल्ली में ASSOCHAM और Federation of Indian Export Organisations (FIEO) के साथ आयोजित कार्यक्रमों में सोहर की कनेक्टिविटी, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय बाजारों तक पहुंच की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
सोहर फ्रीजोन के CEO रैद अल रुबैई ने भारतीय निवेश के महत्व पर जोर देते हुए भारत और ओमान के कारोबारी संबंधों को औद्योगिक निवेश और मजबूत सप्लाई चेन के जरिए आगे बढ़ाने की संभावनाओं की बात कही।
सोहर इकोसिस्टम में 30 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश
सोहर पोर्ट और इससे जुड़े औद्योगिक तथा फ्रीजोन इकोसिस्टम में 30 अरब डॉलर से अधिक का निवेश होने की बात कही गई है। बंदरगाह की वार्षिक कार्गो क्षमता भी 7.2 करोड़ टन से अधिक बताई जाती है।
साल 2026 की पहली छमाही में सोहर पोर्ट के कंटेनर ट्रैफिक में सालाना आधार पर करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज किए जाने की जानकारी है। कंटेनर यातायात में यह बढ़ोतरी बताती है कि क्षेत्रीय व्यापार और बदलती सप्लाई चेन में सोहर की भूमिका तेजी से बढ़ रही है।
भारत जैसे बड़े निर्यातक और आयातक देश के लिए ऐसी अतिरिक्त पोर्ट क्षमता भविष्य में रणनीतिक रूप से उपयोगी हो सकती है।
कच्चे तेल के लिए भी अहम ट्रांजिट पॉइंट बन रहा सोहर
सोहर की अहमियत केवल कंटेनर और भारतीय निर्यात तक सीमित नहीं है। ऊर्जा व्यापार के लिहाज से भी ओमान का यह क्षेत्र महत्वपूर्ण बनता दिखाई दे रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब अपने कच्चे तेल के निर्यात के लिए ओमान के तट के पास Ship-to-Ship Transfer व्यवस्था का इस्तेमाल कर रहा है। सितंबर और अक्टूबर के दौरान करीब 6 करोड़ बैरल सऊदी क्रूड को सोहर के आसपास शिप-टू-शिप ट्रांसफर के जरिए आगे भेजे जाने की योजना की बात कही गई है।
इस व्यवस्था में कच्चे तेल को एक जहाज से दूसरे जहाज में समुद्र में ही ट्रांसफर किया जाता है। इससे ऊर्जा कंपनियों को क्षेत्रीय परिस्थितियों के मुताबिक अपने शिपिंग नेटवर्क को अधिक लचीला बनाने का विकल्प मिलता है।
भारत के लिए तेल और शिपिंग के लिहाज से क्यों महत्वपूर्ण?
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। खाड़ी क्षेत्र भारत के ऊर्जा आयात के लिए महत्वपूर्ण स्रोतों में से एक है। इसलिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास लंबे समय तक तनाव बने रहने का असर केवल तेल की उपलब्धता तक सीमित नहीं रह सकता।
तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, जहाजों के मालभाड़े, इंश्योरेंस लागत और डिलीवरी समय पर असर पड़ सकता है। इसका प्रभाव भारतीय आयात के साथ निर्यातकों की लागत पर भी पड़ सकता है। ऐसे में सोहर जैसे वैकल्पिक लॉजिस्टिक्स हब भारत को सप्लाई चेन के जोखिम को बांटने का एक अतिरिक्त विकल्प दे सकते हैं।
Sohar से सड़क के जरिए UAE और सऊदी अरब तक पहुंच
ओमान सोहर को केवल एक समुद्री बंदरगाह के बजाय मल्टीमॉडल ट्रेड और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित कर रहा है। यहां समुद्री मार्ग से पहुंचने वाले कार्गो को सड़क नेटवर्क के जरिए UAE और सऊदी अरब की ओर भेजा जा सकता है।
यह भारतीय कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे सामान को सोहर तक समुद्री रास्ते से पहुंचाने के बाद खाड़ी के अंदर सड़क के जरिए अंतिम बाजार तक ले जाने की संभावना बनती है। इस तरह सोहर भारत के लिए Sea-to-Road मॉडल के जरिए खाड़ी बाजारों में प्रवेश का वैकल्पिक गेटवे बन सकता है।
Oman-UAE Rail Project से और मजबूत हो सकती है कनेक्टिविटी
भविष्य में प्रस्तावित ओमान-UAE रेल कनेक्टिविटी सोहर की रणनीतिक अहमियत और बढ़ा सकती है। रेल नेटवर्क विकसित होने के बाद बंदरगाह पर पहुंचने वाले माल को रेल के जरिए UAE के प्रमुख औद्योगिक और कारोबारी केंद्रों तक पहुंचाना आसान हो सकता है।
समुद्र, सड़क और रेल—तीनों परिवहन साधनों का एकीकृत नेटवर्क विकसित होने पर सोहर की भूमिका एक पारंपरिक पोर्ट से आगे बढ़कर क्षेत्रीय लॉजिस्टिक्स हब की हो सकती है। भारतीय निर्यातकों के लिए इसका मतलब खाड़ी बाजारों तक पहुंचने के लिए ज्यादा विकल्प और सप्लाई चेन में अधिक लचीलापन हो सकता है।
भारत-ओमान का व्यापार 11.19 अरब डॉलर
भारत और ओमान के मजबूत राजनीतिक संबंधों के साथ दोनों देशों के बीच कारोबारी साझेदारी भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक FY 2025-26 में भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 11.19 अरब डॉलर रहा।
दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, निवेश, लॉजिस्टिक्स और रणनीतिक क्षेत्रों में पहले से सहयोग मौजूद है। ऐसे में सोहर पोर्ट को लेकर बढ़ती कारोबारी दिलचस्पी को केवल मौजूदा होर्मुज संकट से जोड़कर देखना पर्याप्त नहीं होगा।
लंबी अवधि में यह बंदरगाह भारत-ओमान आर्थिक साझेदारी और भारत की खाड़ी देशों के साथ सप्लाई चेन को और मजबूत करने में भूमिका निभा सकता है।
क्या भारत के लिए नया Gulf Gateway बन सकता है सोहर पोर्ट?
सोहर पोर्ट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज या खाड़ी के मौजूदा बंदरगाहों का पूर्ण विकल्प बन जाएगा, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी। हालांकि इसकी भौगोलिक स्थिति, पोर्ट क्षमता, फ्रीजोन, सड़क संपर्क और भविष्य की रेल कनेक्टिविटी इसे भारतीय कारोबारियों के लिए एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक गेटवे जरूर बनाती है।
पश्चिम एशिया में अस्थिरता ने इस विकल्प की उपयोगिता को तेजी से सामने ला दिया है। अगर भारत-सोहर समुद्री कनेक्टिविटी और मजबूत होती है तथा ओमान-UAE रेल और सड़क नेटवर्क का विस्तार होता है, तो सोहर भारतीय कंपनियों के लिए UAE, सऊदी अरब और व्यापक खाड़ी बाजार तक पहुंचने वाली सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
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