कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्पेशल NIA कोर्ट ने यासीन मलिक समेत सात आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है। आरोप है कि हवाला चैनलों और अन्य माध्यमों के जरिए पाकिस्तान से विदेशी फंडिंग हासिल की गई और इस रकम का इस्तेमाल कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों तथा कथित विध्वंसक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया गया।
मामले में करीब 8,94,87,639 रुपये को अपराध से अर्जित आय यानी ‘Proceeds of Crime’ बताया गया है। आरोप है कि यह रकम विभिन्न माध्यमों से जुटाई गई और बाद में आरोपियों तक पहुंचाई गई।
यासीन मलिक समेत इन आरोपियों पर चलेगा मामला
यासीन मलिक के अलावा इस मामले में जहूर अहमद शाह वटाली, अब्दुल रशीद शेख, शब्बीर अहमद शाह, नवल किशोर कपूर, मसरत आलम भट और ट्रिसन फार्म्स एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड का नाम शामिल है।
अभियोजन का आरोप है कि आरोपी हवाला और दूसरे चैनलों के माध्यम से फंड हासिल करने में शामिल थे। आरोपों के मुताबिक, इस फंडिंग का उद्देश्य अलगाववादी विचारधारा और देश के कानून के खिलाफ गतिविधियों के एजेंडे को आगे बढ़ाना था। कोर्ट का आरोप तय करने का आदेश मुकदमे की प्रक्रिया का हिस्सा है; आरोपों पर अंतिम फैसला ट्रायल और साक्ष्यों के आधार पर होगा।
हवाला के जरिए पाकिस्तान से फंडिंग का आरोप
मामले में आरोप है कि पाकिस्तान स्थित स्रोतों से हवाला नेटवर्क और अन्य चैनलों के माध्यम से धन भारत पहुंचाया गया। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस पैसे को जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को समर्थन देने के लिए इस्तेमाल किया गया।
मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में जांच का केंद्र यह भी है कि कथित अवैध फंडिंग किस रास्ते से भारत पहुंची, किन लोगों या संस्थाओं को रकम मिली और आखिरकार इसका इस्तेमाल कहां किया गया।
Special NIA Court at New Delhi has directed to frame charges against Yasin Malik and 6 others under PMLA for allegedly receiving foreign funding from a Pakistani establishment through Hawala channels.
It is alleged that proceeds of crime of Rs.8,94,87,639 were generated and…
— ANI (@ANI) October 1, 2026
कौन है यासीन मलिक?
यासीन मलिक जम्मू-कश्मीर के प्रमुख अलगाववादी चेहरों में शामिल रहा है। वह जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) का प्रमुख रह चुका है। JKLF कश्मीर में 1980 के दशक के आखिर और 1990 के दशक की शुरुआत में उभरे प्रमुख उग्रवादी संगठनों में शामिल था। भारत सरकार ने JKLF पर प्रतिबंध लगाया हुआ है।
यासीन मलिक फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है। उसके खिलाफ आतंकवाद और अलगाववाद से जुड़े कई मामलों में कानूनी कार्रवाई हुई है।
2022 में यासीन मलिक को मिली थी उम्रकैद
मई 2022 में दिल्ली की एक विशेष NIA अदालत ने यासीन मलिक को आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उसने उस मामले में अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को चुनौती नहीं दी थी और अदालत ने उसे UAPA तथा IPC की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया था।
उस मामले में आतंकवादी और अलगाववादी गतिविधियों के लिए धन जुटाने, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े आरोप शामिल थे। इसके बाद से यासीन मलिक तिहाड़ जेल में बंद है।
IAF के चार जवानों की हत्या के मामले में भी आरोपी
यासीन मलिक के खिलाफ एक अलग मामला जनवरी 1990 में श्रीनगर के रावलपोरा में भारतीय वायुसेना के चार कर्मियों की हत्या से जुड़ा है। उस हमले में यासीन मलिक समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था।
इस पुराने मामले की सुनवाई जम्मू की विशेष TADA अदालत में चलती रही है। मामले में गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। हालांकि, इस केस में हत्या से जुड़े आरोपों पर अंतिम न्यायिक फैसला अभी संबंधित अदालत की प्रक्रिया के अधीन है।
मनी लॉन्ड्रिंग केस में बढ़ीं कानूनी मुश्किलें
PMLA के तहत आरोप तय करने के आदेश के बाद यासीन मलिक और अन्य आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ट्रायल आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ है। अभियोजन पक्ष को अब अदालत में अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने होंगे, जबकि आरोपियों को अपना बचाव रखने का अवसर मिलेगा।
इस मामले का मुख्य फोकस कथित विदेशी फंडिंग, हवाला नेटवर्क और उस रकम के इस्तेमाल पर रहेगा। करीब 8.94 करोड़ रुपये की कथित अपराध से अर्जित आय से जुड़े वित्तीय लेन-देन भी मुकदमे में अहम मुद्दा होंगे।
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