जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के टॉप कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के मारे जाने के पांच दिन बाद पुलिस ने उसके कथित लॉजिस्टिक सपोर्ट नेटवर्क की जांच तेज कर दी है। बडगाम पुलिस ने कवान जंगल इलाके में पलमैदान के पास चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान दवाइयों और खाने-पीने के सामान से भरा एक बैग बरामद किया है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह सामान जंगल में किसके लिए रखा गया था और इसे वहां तक पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका थी।
यह बरामदगी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से जंगलों में छिपे आतंकवादियों को मिलने वाले स्थानीय लॉजिस्टिक सपोर्ट की कड़ियों की जांच कर रही हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस बैग के स्रोत का पता लगने से हाशिम मूसा की मदद करने वाले संभावित नेटवर्क तक पहुंचने में सहायता मिल सकती है।
बडगाम के कवान जंगल में मिला संदिग्ध बैग
पुलिस ने कवान जंगल के पलमैदान इलाके में तलाशी अभियान के दौरान एक बैग बरामद किया, जिसमें दवाइयां और खाने-पीने का सामान रखा हुआ था। पुलिस यह जांच कर रही है कि सामान किसने खरीदा, इसे जंगल तक कौन लेकर गया और इसे वहां कब रखा गया था।
जांचकर्ताओं का ध्यान उन संभावित ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs), सहयोगियों या अन्य लोगों पर भी है, जिन्होंने आतंकवादियों को भोजन, दवाइयां या दूसरी जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने में मदद की हो सकती है। किसी व्यक्ति की भूमिका की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
हाशिम मूसा के लॉजिस्टिक नेटवर्क की जांच तेज
सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि हाशिम मूसा लंबे समय तक दुर्गम और घने जंगलों में कैसे सक्रिय रहा। ऐसे इलाकों में लंबे समय तक छिपे रहने के लिए भोजन, दवाइयों और अन्य आवश्यक सामग्री की नियमित आपूर्ति की जरूरत होती है।
इसी वजह से जांच एजेंसियां संभावित स्थानीय सपोर्ट नेटवर्क की पहचान को बेहद महत्वपूर्ण मान रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि जंगलों में छिपे आतंकवादियों तक रसद पहुंचाने वाली कड़ियों की पहचान कर उन्हें निष्क्रिय किया जाता है, तो आतंकियों की गतिविधियों पर प्रभावी तरीके से अंकुश लगाया जा सकता है।
पीर पंजाल के जंगलों में 35-40 विदेशी आतंकियों के सक्रिय होने का दावा
सुरक्षा एजेंसियों के आकलन के मुताबिक जम्मू-कश्मीर, विशेष रूप से पीर पंजाल क्षेत्र के जंगलों में करीब 35 से 40 विदेशी आतंकवादी सक्रिय हो सकते हैं। घने जंगल, पहाड़ी भूभाग और दुर्गम रास्ते सुरक्षा बलों के लिए ऑपरेशन को चुनौतीपूर्ण बनाते हैं।
इसी कारण आतंकियों को मिलने वाली स्थानीय सहायता और लॉजिस्टिक सपोर्ट को तोड़ना सुरक्षा बलों की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या हाशिम मूसा के लिए काम करने वाला कथित नेटवर्क अन्य आतंकियों को भी इसी तरह की सहायता उपलब्ध करा रहा था।
FIR 181/2026 के तहत जांच
बैग की बरामदगी और उससे जुड़े संभावित नेटवर्क की जांच खानसाहिब पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR नंबर 181/2026 के तहत की जा रही है। जांच में बरामद सामग्री के स्रोत से लेकर उसे जंगल तक पहुंचाने की पूरी कड़ी खंगाली जा रही है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस मामले में किसी ओवरग्राउंड वर्कर या अन्य सहयोगी की भूमिका रही है। सुरक्षा एजेंसियों का उद्देश्य पूरे सप्लाई नेटवर्क की पहचान करना और यह पता लगाना है कि आतंकियों को भोजन, दवाइयां तथा दूसरी आवश्यक सामग्री किस रास्ते से उपलब्ध कराई जा रही थी।
29-30 सितंबर की रात हुआ था एनकाउंटर
हाशिम मूसा के खिलाफ ऑपरेशन 29 और 30 सितंबर 2026 की दरमियानी रात बडगाम जिले के कवान जंगलों में पलमैदान के पास चलाया गया था। यह इलाका घने जंगल और चुनौतीपूर्ण पहाड़ी भूभाग के लिए जाना जाता है।
ऑपरेशन आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में मिली तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी के आधार पर शुरू किया गया था। सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया, जिसके बाद मुठभेड़ हुई।
SOG, सेना और CRPF ने चलाया था संयुक्त ऑपरेशन
हाशिम मूसा के खिलाफ कार्रवाई में स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) बडगाम, भारतीय सेना और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) शामिल थे। संयुक्त अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने हाशिम मूसा को मार गिराया था।
मुठभेड़ के बाद उसका शव और अन्य सामग्री बरामद की गई थी। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके में तलाशी अभियान जारी रखा और मूसा के संपर्कों तथा उसे मिलने वाली संभावित सहायता की जांच शुरू की।
कौन था हाशिम मूसा?
अधिकारियों के अनुसार मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा पाकिस्तान से जुड़ा लश्कर-ए-तैयबा कमांडर था और जम्मू-कश्मीर में सक्रिय प्रमुख वांटेड आतंकियों में शामिल था। बताया गया कि वह लगभग 2022 से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय था।
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक उसने कश्मीर घाटी में सक्रिय होने से पहले पीर पंजाल क्षेत्र, विशेष रूप से पुंछ-राजौरी बेल्ट के ऊंचे पहाड़ी और जंगली इलाकों में काफी समय बिताया था। अधिकारियों के अनुसार वह 2022 से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय LeT के चार प्रमुख कमांडरों के समूह का आखिरी बचा सदस्य था।
अब सपोर्ट नेटवर्क पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर
हाशिम मूसा के मारे जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों का फोकस अब उसके संभावित सपोर्ट सिस्टम को खत्म करने पर है। जंगल से मिले दवाइयों और खाने के बैग को इसी जांच की अहम कड़ी माना जा रहा है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि मूसा को लंबे समय तक भोजन, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान किसने उपलब्ध कराया। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि क्या यही नेटवर्क पीर पंजाल और दूसरे इलाकों में सक्रिय अन्य आतंकियों को भी लॉजिस्टिक सहायता पहुंचा रहा है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों या ठिकानों की जानकारी सामने आ सकती है।
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