राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में विशेष राजकीय रात्रिभोज की मेजबानी की। इस खास डिनर में भारत की विविध पाक संस्कृति की झलक देखने को मिली और खासतौर पर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पारंपरिक व्यंजनों को मेन्यू में प्रमुखता दी गई। राष्ट्रपति मुर्मू ने 5 अक्टूबर को राष्ट्रपति भवन में गाइ पार्मेलिन का स्वागत किया और उनके सम्मान में भोज आयोजित किया।
स्विस राष्ट्रपति और उनकी पत्नी कैरोलिन पार्मेलिन के लिए तैयार मेन्यू में नादुर कबाब, हाक, फायमर और कहवा जैसे प्रसिद्ध व्यंजन शामिल थे। मेन्यू को इस तरह तैयार किया गया था कि हर कोर्स में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की विशिष्ट सामग्री और पाक परंपराओं की झलक दिखाई दे।
लद्दाख से Sea Buckthorn, कश्मीर से केसर और गुच्छी
रात्रिभोज में इस्तेमाल की गई सामग्री भी बेहद खास थी। लद्दाख के ऊंचे पठारी क्षेत्रों से सी बकथॉर्न, खुबानी, जंगली बिछुआ, चीज और जौ जैसी सामग्रियों को शामिल किया गया।
वहीं कश्मीर घाटी के केसर, गुच्छी, कमल ककड़ी और सुगंधित मसालों ने मेन्यू को खास बनाया। जम्मू की मिठाइयों और लोकप्रिय स्ट्रीट फूड परंपराओं को भी भोज में जगह दी गई।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की पाक संस्कृति बनी थीम
पूरे डिनर की थीम जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की पाक परंपराओं पर आधारित थी। बर्फ से ढके पहाड़ों और हरी-भरी घाटियों वाले इन क्षेत्रों के स्थानीय स्वाद को राष्ट्रपति भवन के राजकीय भोज के जरिए विदेशी मेहमानों के सामने पेश किया गया।
मेन्यू में हिमालय और स्विस आल्प्स के बीच भी एक दिलचस्प समानता बताई गई। दोनों पर्वतीय क्षेत्रों की खाद्य संस्कृति में स्थानीय संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और मौसमी उपज के महत्व को रेखांकित किया गया।
लद्दाख का ‘जा थुक’ सूप भी परोसा गया
स्टेट डिनर में लद्दाख का पारंपरिक ‘जा थुक’ भी शामिल था। यह जंगली बिछुआ से तैयार पौष्टिक सूप है। इसमें मटर का इस्तेमाल किया गया और इसे भुने हुए बाजरे के दानों से सजाया गया।
सूप के साथ अलग-अलग तरह की ब्रेड भी परोसी गईं, जिससे लद्दाख की पारंपरिक खाद्य संस्कृति की झलक देखने को मिली।
लाबो-ना त्सोनमा सलाद में दिखी लद्दाख की चीज परंपरा
विशेष मेन्यू में ‘लाबो-ना त्सोनमा’ सलाद भी शामिल किया गया। इसमें लद्दाख के लाबो और छुरपी के साथ जम्मू के प्रसिद्ध कलाड़ी चीज का इस्तेमाल किया गया।
सलाद में सूखे सेब, अखरोट, जंगली केपर्स और लेट्यूस शामिल थे। इसे सी बकथॉर्न और शहद से तैयार ड्रेसिंग के साथ परोसा गया। इसके साथ क्रैकर्स और खुबानी से तैयार जैम भी दिया गया।
जम्मू की किम्ब चाट का भी लिया स्वाद
विदेशी मेहमानों के लिए जम्मू के लोकप्रिय स्ट्रीट फूड को भी राजकीय भोज में जगह मिली। किम्ब चाट में उबली अरबी, शकरकंद और चावल के आटे से बने कुरकुरे टुकड़ों को मीठे दही और इमली की चटनी के साथ पेश किया गया।
इस व्यंजन ने राष्ट्रपति भवन के औपचारिक भोज में जम्मू की स्ट्रीट फूड संस्कृति को भी प्रतिनिधित्व दिया।
कमल ककड़ी से तैयार हुआ Nadur Kebab
कश्मीरी व्यंजनों में सबसे खास आकर्षणों में Nadur Kebab शामिल रहा। नादुर यानी कमल ककड़ी से तैयार कबाब में कश्मीर के सुगंधित मसालों का इस्तेमाल किया गया और इसे अखरोट की चटनी के साथ परोसा गया। नादुर कबाब समेत कई पारंपरिक कश्मीरी-लद्दाखी व्यंजन मेन्यू का हिस्सा थे।
मुख्य व्यंजनों में हाक, दम आलू और गुच्छी पुलाव
मुख्य भोजन में कश्मीर का प्रसिद्ध हाक शामिल था। हरी पत्तेदार सब्जियों को सरसों के तेल और हींग के साथ पारंपरिक तरीके से तैयार किया गया।
इसके साथ कश्मीरी शैली का दम आलू और सुगंधित काना गुच्छ पुलाव भी परोसा गया। पुलाव में कश्मीर की प्रसिद्ध गुच्छी और साबुत मसालों का इस्तेमाल किया गया।
साथ में सफेद मूली और दही से तैयार मुज्ज चटिन, शीरमाल और कतलम जैसी ब्रेड भी मेन्यू का हिस्सा रहीं।
मिठाई में Shufta और Ladakh का फायमर
राष्ट्रपति भवन के इस खास भोज की मिठाइयों में भी हिमालयी स्वाद देखने को मिला। मेहमानों को शुफ्ता परोसा गया, जिसे ड्राई फ्रूट्स और दूसरी सामग्रियों के साथ तैयार किया जाता है।
इसके अलावा लद्दाख की पारंपरिक मिठाई फायमर (Phaymer) भी शामिल थी। इसे भुने हुए जौ, गुड़ और मक्खन से तैयार किया जाता है।
Kahwa और Gur Gur Chai से खत्म हुआ भोज
रात्रिभोज के अंत में कश्मीर की मशहूर कहवा चाय परोसी गई। दालचीनी, इलायची और केसर की खुशबू वाली कहवा के साथ लद्दाख की पारंपरिक गुर गुर चाय और वाइल्ड रोज टी भी मेन्यू का हिस्सा थीं।
भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों पर क्या बोलीं राष्ट्रपति मुर्मू?
राष्ट्रपति मुर्मू ने स्विस राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए भारत और स्विट्जरलैंड के संबंधों को गर्मजोशीपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क समेत कई क्षेत्रों में व्यापक सहयोग है।
राष्ट्रपति ने कहा कि स्विट्जरलैंड भारत का महत्वपूर्ण व्यापार और निवेश साझेदार है। उन्होंने India-European Free Trade Association Trade and Economic Partnership Agreement (TEPA) के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने के और अधिक अवसर पैदा होने की बात कही। दोनों नेताओं ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, इनोवेशन और क्लीन एवं ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई।
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