मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। मंगलवार को बीजेपी ने कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि जब कांग्रेस खुद मतदाता सूची में फर्जी और डुप्लीकेट वोटरों की मौजूदगी के आरोप लगाती रही है, तो अब वोटर लिस्ट की जांच और पुनरीक्षण की प्रक्रिया का विरोध क्यों किया जा रहा है।
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के रुख को विरोधाभासी बताते हुए कहा कि पार्टी को स्पष्ट करना चाहिए कि SIR को लेकर उसका वास्तविक स्टैंड क्या है।
SIR पर कांग्रेस से BJP का सीधा सवाल
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से मतदाता सूची में बड़ी संख्या में फर्जी और डुप्लीकेट नाम होने की बात करती रही है। अब जब मतदाता सूची में दर्ज नामों की जांच की जा रही है और मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित या डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान की जा रही है, तब कांग्रेस इसी प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है।
बीजेपी ने दावा किया कि SIR के दौरान हटाए गए नामों में मृत मतदाता, दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके लोग, डुप्लीकेट प्रविष्टियां और ऐसे मतदाता शामिल हैं जिनका सत्यापन नहीं हो पाया। पार्टी ने इसी आधार पर कांग्रेस से पूछा कि ऐसे नामों की जांच किए जाने का विरोध क्यों किया जा रहा है।
#WATCH | Delhi: On INDIA bloc MPs' protest march to ECI, BJP national spokesperson and MP Sudhanshu Trivedi says, "I would like to clearly ask Congress. Who do they want to benefit by giving voting rights to the absent, shifted, dead and duplicate voters without any… pic.twitter.com/nIANOQkInS
— ANI (@ANI) October 6, 2026
‘कांग्रेस बताए, बिना जांच नाम बने रहने से किसे फायदा?’
त्रिवेदी ने कांग्रेस से सवाल किया कि बिना सत्यापन के अनुपस्थित, स्थान बदल चुके, मृत या डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बने रहने से आखिर किसे फायदा होगा।
उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी के SIR को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर निशाना साधते हुए कहा कि एक तरफ विपक्ष मतदाता सूची में गड़बड़ी और कथित ‘वोट चोरी’ की बात करता है, जबकि दूसरी तरफ मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाता है।
राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ आरोपों पर पलटवार
राहुल गांधी पिछले कुछ समय से चुनाव आयोग और मतदाता सूची को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाए हैं। बीजेपी इन आरोपों को खारिज करती रही है।
बीजेपी का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें मौजूद अपात्र या डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान करना है। कांग्रेस दूसरी ओर SIR की प्रक्रिया, उससे मतदाताओं पर पड़ने वाले प्रभाव और चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर सवाल उठा रही है।
Form 6 को लेकर भी बढ़ा विवाद
SIR के साथ Form 6 को लेकर भी राजनीतिक और कानूनी विवाद चल रहा है। Form 6 का इस्तेमाल नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए किया जाता है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि Form 6 में गैरकानूनी और एकतरफा बदलाव किए गए। चुनाव आयोग ने इन आरोपों को भ्रामक बताते हुए कहा है कि मूल Form 6 में बदलाव नहीं किया गया था, बल्कि SIR के दौरान उसके साथ एक अतिरिक्त declaration जोड़ा गया था।
चुनाव आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, SIR के लिए जोड़ा गया declaration मूल Form 6 से अलग था। आयोग का कहना है कि मूल वैधानिक Form 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया।
Supreme Court ने क्या कहा?
Form 6 का मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने किसी संशोधित Form 6 को मंजूरी नहीं दी थी और संबंधित रिकॉर्ड देखने की बात कही।
इसके बाद राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा। चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों को ‘misleading’ बताया और कहा कि SIR के दौरान Form 6 के साथ जोड़े गए declaration और मूल Form 6 के बीच अंतर किया जाना चाहिए।
चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का मार्च
SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर मंगलवार को विपक्षी सांसदों ने दिल्ली में चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर मार्च भी किया। विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
इस दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेता मार्च में शामिल हुए। पुलिस ने कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में भी लिया।
SIR बना बड़ा सियासी मुद्दा
Special Intensive Revision अब मतदाता सूची के तकनीकी पुनरीक्षण से आगे बढ़कर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
दूसरी ओर बीजेपी का कहना है कि मतदाता सूची को सटीक बनाने के लिए मृत, डुप्लीकेट, स्थानांतरित और अन्य अपात्र प्रविष्टियों की पहचान जरूरी है। Form 6 से जुड़ा विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने और विपक्ष के चुनाव आयोग के खिलाफ सड़क पर उतरने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है।
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