दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित मोएट्स रेस्टोरेंट के बाहर गुरुवार को एक कश्मीरी युवक के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। श्रीनगर निवासी फहीम नजीर ने कांग्रेस समर्थकों पर मारपीट करने का आरोप लगाया है। घटना उस समय हुई, जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसी रेस्टोरेंट में INDIA गठबंधन के नेताओं के लिए लंच का आयोजन किया था। फहीम नजीर का कहना है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में और राहुल गांधी से सवाल पूछने के लिए वहां पहुंचे थे। उन्होंने दावा किया कि बिना किसी गाली-गलौज के उनके साथ मारपीट की गई। घटना के बाद उन्होंने कहा कि वह भारत को नेपाल या बांग्लादेश जैसी स्थिति में नहीं जाने देंगे।
कनॉट प्लेस में कश्मीरी युवक से कथित मारपीट, कांग्रेस समर्थकों पर लगे आरोप
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कनॉट प्लेस में गुरुवार को उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा आयोजित INDIA गठबंधन के नेताओं के लंच कार्यक्रम से पहले एक कश्मीरी युवक और कुछ लोगों के बीच कहासुनी हो गई। इसके बाद युवक के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई।
मारपीट का आरोप लगाने वाले युवक की पहचान जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर निवासी फहीम नजीर के रूप में हुई है। फहीम का आरोप है कि कांग्रेस समर्थकों ने उनके साथ मारपीट की, जबकि वह केवल अपनी राजनीतिक राय व्यक्त कर रहे थे।
जानकारी के मुताबिक, फहीम नजीर मोएट्स रेस्टोरेंट के बाहर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में नारे लगा रहे थे। उनके हाथ में एक पोस्टर भी था। इसी दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों से उनका विवाद हो गया, जो कथित रूप से मारपीट में बदल गया। हालांकि, मारपीट करने वाले व्यक्तियों की पहचान और उनके कांग्रेस से संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
#WATCH | Delhi | The youth, who was roughed up by protestors in CP, says, "I raised question – when the Opposition wins, then there are no problems with the EVMs. Who brought EVMs? It was Rajiv Gandhi in 1998. I am from Kashmir. I did not abuse Rahul Gandhi. I am a citizen of… pic.twitter.com/XapB7lT6jK
— ANI (@ANI) October 8, 2026
‘मैंने राहुल गांधी को गाली नहीं दी, फिर भी मुझे बुरी तरह पीटा गया’
घटना के बाद फहीम नजीर ने मीडिया से बातचीत में अपने साथ हुई कथित मारपीट पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, ‘आप सभी के पास फुटेज है। मैंने राहुल गांधी को गाली नहीं दी, लेकिन मुझे बुरी तरह पीटा गया।’
फहीम ने दावा किया कि वह किसी राजनीतिक नेता के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं कर रहे थे। उनका उद्देश्य केवल कुछ सवाल उठाना और अपनी राजनीतिक राय व्यक्त करना था।
उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां हर नागरिक को अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। ऐसे में किसी व्यक्ति के विचारों से असहमति होने पर उसके साथ मारपीट करना उचित नहीं है। फहीम ने सवाल उठाया कि क्या लोकतंत्र में किसी व्यक्ति को केवल इसलिए पीटा जा सकता है क्योंकि वह किसी राजनीतिक दल या नेता की आलोचना कर रहा है?
EVM विवाद पर राहुल गांधी और कांग्रेस से पूछे सवाल
फहीम नजीर ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर विपक्ष के रुख पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि जब विपक्षी दल चुनाव जीतते हैं, तब ईवीएम को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताई जाती, लेकिन चुनाव हारने के बाद मशीनों और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए जाते हैं। फहीम ने सवाल किया कि जब विपक्ष चुनाव जीतता है, तब ईवीएम में कोई समस्या क्यों नहीं दिखाई देती?
उन्होंने ईवीएम के इतिहास का जिक्र करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का भी नाम लिया। हालांकि, भारत में ईवीएम के विकास और चुनावों में इसके इस्तेमाल की शुरुआत एक चरणबद्ध प्रक्रिया रही है। इसका प्रारंभिक प्रयोग 1982 में हुआ था, जबकि 1988 के कानूनी संशोधन ने इसके उपयोग के लिए वैधानिक आधार प्रदान किया। फहीम का कहना था कि चुनावी व्यवस्था को लेकर राजनीतिक दलों का रुख एक समान होना चाहिए और आरोपों के समर्थन में प्रमाण भी सामने रखे जाने चाहिए।
‘भारत को नेपाल और बांग्लादेश नहीं बनने दूंगा’ – फहीम नजीर
कथित मारपीट के बाद फहीम नजीर ने अपने बयान में नेपाल और बांग्लादेश का जिक्र करते हुए कहा कि वह भारत में किसी भी प्रकार की राजनीतिक अस्थिरता या हिंसक परिस्थितियां पैदा नहीं होने देना चाहते।
उन्होंने कहा, ‘मैं इस देश का नागरिक हूं और इस देश को दूसरा नेपाल नहीं बनने दूंगा।’ फहीम ने दावा किया कि वह एक ऐसी पहल से जुड़े हैं, जिसका उद्देश्य लोगों को देश में संभावित राजनीतिक अस्थिरता के प्रति जागरूक करना है।
उन्होंने आशंका जताई कि भारत में भी नेपाल और बांग्लादेश जैसी परिस्थितियां पैदा करने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, ऐसी किसी संगठित साजिश का स्वतंत्र प्रमाण उपलब्ध नहीं है। यह फहीम नजीर की व्यक्तिगत आशंका और राजनीतिक टिप्पणी है। उन्होंने कहा कि कथित मारपीट के बावजूद वह अपनी बात रखना जारी रखेंगे और देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा शांति बनाए रखने के पक्ष में आवाज उठाते रहेंगे।
मोदी के समर्थन में नारेबाजी के दौरान बढ़ा विवाद
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फहीम नजीर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में पोस्टर लेकर मोएट्स रेस्टोरेंट के बाहर पहुंचे थे। वह राहुल गांधी और कांग्रेस की राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल उठा रहे थे। इसी दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों के साथ उनकी बहस शुरू हो गई।
फहीम का आरोप है कि विवाद बढ़ने पर कुछ लोगों ने उन्हें पकड़ लिया और उनके साथ मारपीट की। उन्होंने दावा किया कि घटना के समय मौजूद लोगों के पास मारपीट की वीडियो फुटेज भी है।
हालांकि, घटना का पूरा घटनाक्रम, विवाद की शुरुआत और इसमें शामिल व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट करने के लिए वीडियो रिकॉर्डिंग तथा अन्य साक्ष्यों की जांच आवश्यक होगी।
अभिव्यक्ति की आजादी और राजनीतिक असहमति पर उठे सवाल
कनॉट प्लेस की इस घटना ने राजनीतिक असहमति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। भारत के संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, जो संविधान में निर्धारित उचित प्रतिबंधों के अधीन है।
लोकतंत्र में किसी राजनीतिक दल, सरकार या विपक्षी नेता की आलोचना करना नागरिकों के अधिकारों का हिस्सा है। इसी तरह शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराना भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण पहलू है।
हालांकि, राजनीतिक मतभेदों के कारण किसी व्यक्ति के साथ हिंसा या धमकी को उचित नहीं ठहराया जा सकता। यदि फहीम नजीर के साथ मारपीट के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह कानून-व्यवस्था और नागरिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला होगा।
कांग्रेस समर्थकों पर आरोप, आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी नहीं
फहीम नजीर ने अपने साथ हुई कथित मारपीट के लिए कांग्रेस समर्थकों को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में कांग्रेस पार्टी या संबंधित व्यक्तियों की ओर से इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।
इसी तरह पुलिस में शिकायत दर्ज होने, एफआईआर की स्थिति, किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी या घटना की आधिकारिक जांच के संबंध में भी पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मारपीट के आरोपों और आरोपित व्यक्तियों की राजनीतिक संबद्धता के संबंध में अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
राजनीतिक मतभेदों के बीच शांतिपूर्ण संवाद की जरूरत
कनॉट प्लेस में फहीम नजीर के साथ कथित मारपीट की घटना ऐसे समय सामने आई है, जब देश में चुनाव आयोग, ईवीएम और चुनावी पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर राजनीतिक बहस जारी है।
फहीम नजीर ने अपने बयान में राहुल गांधी और कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति समर्थन व्यक्त किया है। वहीं, उनके साथ मारपीट किए जाने के आरोपों ने इस बहस को राजनीतिक असहमति और नागरिक सुरक्षा से भी जोड़ दिया है।
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