भारतीय जनसंघ के 75वें स्थापना दिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने संगठन के ऐतिहासिक सफर, स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और भारत के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण बातें कहीं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश की आजादी के लिए लाखों लोगों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। स्वतंत्रता सेनानियों का सपना केवल भारत को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराना नहीं था, बल्कि एक ऐसे लोकतांत्रिक राष्ट्र का निर्माण करना भी था, जहां समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचे और भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत तथा राष्ट्रीय स्वाभिमान के साथ दुनिया में मजबूत पहचान बनाए।
नितिन नवीन ने भारतीय जनसंघ की स्थापना के शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि 21 अक्टूबर 1951 को जब संगठन की शुरुआत हुई थी, तब उसके पास न कार्यालय था, न आवागमन के साधन और न ही रसीद छपवाने के लिए पर्याप्त पैसे थे। इसके बावजूद संगठन के संस्थापकों के पास एक स्पष्ट विचारधारा और उसे जन-जन तक पहुंचाने का मजबूत संकल्प था।
’75 साल पहले रसीद छपवाने के पैसे भी नहीं थे’ – नितिन नवीन
भारतीय जनसंघ के स्थापना दिवस कार्यक्रम में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने संगठन की शुरुआती चुनौतियों को याद करते हुए भावुक अंदाज में अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारतीय जनसंघ की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने पर उस ऐतिहासिक स्थल पर पहुंचना उनके लिए सौभाग्य की बात है, जहां से संगठन की यात्रा शुरू हुई थी।
नितिन नवीन ने कहा, “75 साल पहले, 21 अक्टूबर 1951 को जब जनसंघ की स्थापना हुई, तो उस समय हमारे पास न रसीद छपवाने के पैसे थे, न कार्यालय के लिए कोई परिसर था और न ही आवागमन का कोई साधन था। हमारे पास केवल एक विचार था, जिसे जन-जन तक पहुंचाना था।”
उन्होंने कहा कि संगठन की शुरुआती यात्रा सीमित संसाधनों, समर्पित कार्यकर्ताओं और वैचारिक प्रतिबद्धता के सहारे आगे बढ़ी। भाजपा अध्यक्ष के अनुसार, भारतीय जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी तक का सफर संगठन के कार्यकर्ताओं के संघर्ष और निरंतर प्रयासों का परिणाम है।
भारत की आजादी के लिए लाखों लोगों ने दी कुर्बानी
अपने संबोधन में नितिन नवीन ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सेनानियों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि भारत को स्वतंत्र कराने के लिए असंख्य लोगों ने अपना जीवन देश के नाम समर्पित किया। सभी का एक ही लक्ष्य था कि भारत विदेशी शासन से मुक्त होकर एक स्वतंत्र और स्वाभिमानी राष्ट्र बने।
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों की कल्पना ऐसे भारत की थी, जहां लोकतंत्र में हर नागरिक की चिंता हो, गरीब और वंचित वर्गों तक विकास की योजनाएं पहुंचें तथा देश की सांस्कृतिक जड़ें मजबूत बनी रहें।
उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता का उद्देश्य केवल राजनीतिक आजादी हासिल करना नहीं था, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से सशक्त राष्ट्र का निर्माण करना भी था।
‘आज की पीढ़ी को भी अपने संकल्प मजबूत करने होंगे’
नितिन नवीन ने युवाओं और भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी को भी अपने संकल्पों को उतना ही मजबूत बनाना होगा, जितना संगठन के संस्थापकों और वरिष्ठ नेताओं ने किया था। उन्होंने कहा कि पूर्वजों द्वारा देखे गए भारत को विश्वगुरु बनाने के सपने को पूरा करने के लिए निरंतर परिश्रम, समर्पण और संगठनात्मक प्रतिबद्धता आवश्यक है।
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रत्येक पीढ़ी को अपने समय की चुनौतियों का सामना करते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देना होता है। उन्होंने जोर दिया कि यदि भविष्य में समृद्ध और विकसित भारत का निर्माण करना है, तो वर्तमान पीढ़ी को भी उसी संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा, जिसके आधार पर संगठन की स्थापना हुई थी।
When I studied this period, I observed that whether it was the issue of Goa or that of West Bengal, the vision of Ek Bharat, Shreshtha Bharat, conceived by our thinker and leader, Dr Syama Prasad Mookerjee, was about uniting the nation.
After his death, if anyone continued to… pic.twitter.com/KuuPgnrU2A
— BJP (@BJP4India) October 21, 2026
‘तीन से शुरू किया सफर, आज लगातार तीसरी बार सरकार बनाई’
भारतीय जनसंघ से भाजपा तक की राजनीतिक यात्रा का उल्लेख करते हुए नितिन नवीन ने कहा कि संगठन ने बहुत छोटे स्तर से शुरुआत की थी, लेकिन आज वह राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
उन्होंने कहा, “हमने तीन के आंकड़े से शुरुआत की और आज लगातार तीसरी बार सरकार बनाई है। लेकिन हमें आज भी उसी प्रकार के समर्पण, संघर्ष और संकल्प की आवश्यकता है।”
यहां उनका संदर्भ भाजपा की शुरुआती संसदीय स्थिति और केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार सरकार बनने से था। नितिन नवीन ने कहा कि चुनावी सफलताओं के बावजूद संगठन को अपने मूल सिद्धांतों और कार्यकर्ताओं की प्रतिबद्धता को बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन की वैचारिक विरासत और राष्ट्र निर्माण के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की बात कही।
‘जनसंघ से जन-जन तक का सफर’ – संगठन की यात्रा को किया याद
कार्यक्रम में नितिन नवीन ने ‘जनसंघ से जन-जन तक का सफर’ का उल्लेख करते हुए संगठन के विकास पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दौरान दिलीप जी द्वारा कही गई यह बात भारतीय जनसंघ और भाजपा की राजनीतिक यात्रा को दर्शाती है।
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि जब उन्होंने पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्षों की तस्वीरें देखीं, तो उन्हें उन नेताओं के प्रयास और सपने याद आए, जिन्होंने संगठन को आगे बढ़ाने में योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि संगठन के वरिष्ठ नेताओं ने जिस विचार को आगे बढ़ाया, उसे प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाना वर्तमान नेतृत्व और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है। नितिन नवीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास संबंधी दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास की प्रक्रिया में समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को किया याद, राष्ट्रीय एकता पर दिया जोर
भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए नितिन नवीन ने उनके राजनीतिक और वैचारिक योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का दृष्टिकोण भारत की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने पर केंद्रित था।
भाजपा अध्यक्ष ने गोवा और पश्चिम बंगाल से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि मुखर्जी तथा जनसंघ के नेताओं ने राष्ट्रीय एकीकरण के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
उन्होंने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के विचार को राष्ट्रीय एकता से जोड़ते हुए कहा कि संगठन की वैचारिक यात्रा में अखंड भारत की भावना महत्वपूर्ण रही है। नितिन नवीन ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के निधन के बाद भारतीय जनसंघ ने उनके विचारों और राजनीतिक संकल्पों को आगे बढ़ाया।
गोवा के भारत में विलय का किया जिक्र
भाजपा अध्यक्ष ने अपने भाषण में गोवा के भारत में शामिल होने की ऐतिहासिक घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश के विभिन्न क्षेत्रों के एकीकरण का मुद्दा महत्वपूर्ण था और भारतीय जनसंघ ने राष्ट्रीय एकता से जुड़े प्रश्नों को उठाया।
गौरतलब है कि दिसंबर 1961 में भारतीय सैन्य कार्रवाई के बाद गोवा, दमन और दीव पुर्तगाली शासन से मुक्त हुए और भारतीय प्रशासन के अधीन आए। नितिन नवीन ने इस ऐतिहासिक संदर्भ के माध्यम से राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रीय अखंडता के महत्व को रेखांकित किया।
Millions of people made sacrifices for India’s independence. Everyone had one goal: to see my India become free.
Along with making India independent, they also envisioned a democracy that cares for everyone, where development schemes reach the last person, the roots of our… pic.twitter.com/s5UdcOMjIt
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पश्चिम बंगाल के विभाजन से जुड़े मुद्दे पर भी बोले नितिन नवीन
कार्यक्रम में भाजपा अध्यक्ष ने स्वतंत्रता के समय बंगाल के विभाजन और उसके बाद की राजनीतिक परिस्थितियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि स्वतंत्रता के आसपास पश्चिम बंगाल के कुछ हिंदू-बहुल क्षेत्रों को पूर्वी पाकिस्तान में शामिल किए जाने की आशंका थी और ऐसे प्रयासों का जनसंघ से जुड़ी वैचारिक धारा के नेताओं ने विरोध किया था।
नितिन नवीन ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बंगाल के विभाजन से संबंधित राजनीतिक चर्चाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ऐतिहासिक संदर्भ में यह उल्लेखनीय है कि 1947 में बंगाल का विभाजन हुआ था, जिसके परिणामस्वरूप पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा बना और पूर्वी बंगाल पाकिस्तान में शामिल हुआ। पूर्वी पाकिस्तान बाद में 1971 में स्वतंत्र बांग्लादेश बना।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1947 के विभाजन से पहले बंगाल के हिंदू-बहुल क्षेत्रों को भारत में रखने की मांग का समर्थन किया था। हालांकि, भारतीय जनसंघ की स्थापना 1951 में हुई थी, इसलिए 1947 के घटनाक्रम को सीधे उस संगठन की कार्रवाई नहीं माना जा सकता।
भारतीय जनसंघ की स्थापना कब और किसने की थी?
भारतीय जनसंघ की स्थापना 21 अक्टूबर 1951 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में हुई थी। स्वतंत्र भारत की राजनीति में जनसंघ ने राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और संगठन आधारित राजनीति को अपने प्रमुख वैचारिक विषयों में शामिल किया।
समय के साथ भारतीय जनसंघ राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हुआ और विभिन्न चुनावों में भाग लेने लगा। वर्ष 1977 में आपातकाल के बाद जनसंघ से जुड़े नेताओं और अन्य विपक्षी दलों ने जनता पार्टी के गठन में भाग लिया। इसके बाद 6 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई।
आज भाजपा भारतीय राजनीति के प्रमुख राष्ट्रीय दलों में शामिल है और केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का नेतृत्व कर रही है।
जनसंघ से भाजपा तक का राजनीतिक सफर
भारतीय जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी तक की यात्रा भारतीय राजनीति के महत्वपूर्ण संगठनात्मक परिवर्तनों में से एक रही है। 1951 में स्थापित जनसंघ ने प्रारंभिक वर्षों में सीमित संसाधनों और संगठनात्मक ढांचे के साथ राजनीतिक गतिविधियां शुरू की थीं। इसके बाद विभिन्न राजनीतिक घटनाक्रमों, चुनावों और संगठनात्मक बदलावों के बीच भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ।
1984 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को दो सीटें मिली थीं। बाद के दशकों में पार्टी ने अपनी संसदीय उपस्थिति का विस्तार किया और 2014 तथा 2019 में लोकसभा में पूर्ण बहुमत हासिल किया।
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा अपने दम पर बहुमत से पीछे रही, लेकिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के समर्थन से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार केंद्र सरकार बनी। नितिन नवीन ने इसी राजनीतिक यात्रा का उल्लेख करते हुए संगठन के शुरुआती संघर्ष और वर्तमान उपलब्धियों के बीच संबंध स्थापित किया।
विकसित भारत और विश्वगुरु के संकल्प पर दिया जोर
अपने संबोधन में नितिन नवीन ने भारत के भविष्य को लेकर भाजपा के दृष्टिकोण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश को विश्वगुरु बनाने की कल्पना तभी साकार हो सकती है, जब वर्तमान पीढ़ी अपने दायित्वों को गंभीरता से निभाए।
भाजपा अध्यक्ष ने विकास को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और देश की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें संगठन, कार्यकर्ताओं और नागरिकों की भागीदारी भी आवश्यक है।
75वें स्थापना दिवस पर जनसंघ की विरासत और भविष्य पर चर्चा
भारतीय जनसंघ के 75वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में नितिन नवीन का संबोधन संगठन के इतिहास, स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विरासत और भाजपा की राजनीतिक यात्रा पर केंद्रित रहा।
उन्होंने संगठन के शुरुआती दिनों की आर्थिक कठिनाइयों को याद करते हुए वर्तमान पीढ़ी के सामने राष्ट्र निर्माण के लक्ष्यों को रखा। नितिन नवीन ने कहा कि संगठन को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए समर्पण, संघर्ष और संकल्प की भावना बनाए रखनी होगी।
जनसंघ की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने का यह अवसर भारतीय राजनीति में संगठन के ऐतिहासिक विकास और उसकी वैचारिक विरासत पर चर्चा का महत्वपूर्ण मंच बना।
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