तमिलनाडु के थेनी उप-जेल में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियां सामने आई हैं। महज 200 कैदियों को रखने की क्षमता वाली इस जेल में 334 कैदी बंद थे। क्षमता से अधिक कैदियों के कारण पहले से ही सुरक्षा कर्मचारियों पर भारी दबाव था। इसी स्थिति का फायदा उठाकर 17 विचाराधीन कैदियों ने जेल से भागने की योजना को अंजाम दिया। जेल अधिकारियों को अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कैदियों ने भागने की साजिश कब रची थी। हालांकि, घटना को उस समय अंजाम दिया गया, जब जेल परिसर के भीतर केवल चार सुरक्षाकर्मी मौजूद थे।
मिर्गी का फर्जी दौरा बना जेल से भागने की साजिश का पहला कदम
दक्षिण क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक विजयेंद्र बिदारी के अनुसार, सोमवार रात लगभग 9:45 बजे जेल के ब्लॉक नंबर तीन में बंद मुथु इलंगोवन नामक कैदी ने अचानक मिर्गी का दौरा पड़ने का नाटक किया। उसके साथ बंद अन्य कैदियों ने शोर मचाना शुरू कर दिया और जेलकर्मियों को बताया कि इलंगोवन की हालत गंभीर हो रही है।
इलंगोवन को पहले भी मिर्गी के दौरे के कारण तीन बार अस्पताल में भर्ती कराया जा चुका था। इसलिए जेलकर्मी उसकी हालत को लेकर चिंतित हो गए। कांस्टेबल स्टालिन प्रभु ने जब इलंगोवन को सांस लेने में परेशानी होती देखी, तो उसकी मदद करने के लिए ब्लॉक का दरवाजा खोल दिया। लेकिन दरवाजा खुलते ही कैदियों ने अपनी पहले से तैयार योजना को अंजाम देना शुरू कर दिया।
कंबल डालकर जेलकर्मी पर हमला, दूसरे गार्ड को भी बनाया निशाना
जैसे ही कांस्टेबल स्टालिन प्रभु ब्लॉक के अंदर पहुंचे, अन्य कैदियों ने उन पर कंबल डाल दिया और मारपीट शुरू कर दी। शोर सुनकर जेल गार्ड माधन भी मौके पर पहुंचे। शुरुआत में उन्हें लगा कि यह अफरातफरी इलंगोवन को मिर्गी का दौरा पड़ने के कारण हो रही है। माधन ने कैदियों से शांत रहने को कहा, लेकिन कैदियों ने उन पर भी हमला कर दिया।
हमलावरों ने माधन को जमीन पर दबोच लिया और उनके गले से लगभग डेढ़ सॉवरेन वजन की सोने की चेन छीन ली। इसके बाद माधन को एहसास हुआ कि यह किसी बीमार कैदी की मदद का मामला नहीं, बल्कि जेल से भागने की सुनियोजित साजिश है।
जेलकर्मियों को ब्लॉक में बंद कर कैदियों ने किया कब्जा
हमले के दौरान गार्ड माधन ने दरवाजे को बंद होने से रोकने के लिए अपना पैर अड़ा दिया, लेकिन कैदियों की संख्या अधिक होने के कारण वह उन्हें रोक नहीं सके। हमलावर कैदियों ने माधन और अन्य सुरक्षाकर्मियों को धक्का देकर ब्लॉक के अंदर बंद कर दिया। जेल विभाग के सूत्रों के मुताबिक, इसके बाद कैदियों ने जेल के भीतर आगे बढ़ना शुरू किया। उनका अगला निशाना जेल की रसोई थी, जो ब्लॉक से लगभग 20 मीटर की दूरी पर स्थित थी।
रसोई के बर्तनों को बनाया हथियार, गार्ड का सिर फोड़ा
जेल से भागने वाले कैदी रसोई में पहुंचे और वहां रखे बड़े बर्तन तथा अन्य सामान उठा लिया। इन बर्तनों को हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हुए कैदी मुख्य प्रवेश द्वार की ओर बढ़ने लगे। इस दौरान गार्ड थंगापांडी ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन कैदियों ने उन पर बर्तनों से हमला कर दिया।
हमले में थंगापांडी के सिर पर गंभीर चोटें आईं और वह खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़े। इसके बाद हमलावरों ने चाबियां छीन लीं और आगे बढ़ गए।
शिफ्ट बदलने आए पांच जेलकर्मियों पर भी पथराव
घटना के समय जेल के बाहर पांच सुरक्षाकर्मी ड्यूटी बदलने का इंतजार कर रहे थे। जब उन्हें कैदियों के भागने की जानकारी मिली, तो उन्होंने फरार हो रहे कैदियों को रोकने की कोशिश की। लेकिन कैदियों ने उन पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए और मुख्य निकास द्वार की ओर दौड़ पड़े।
दूसरी ओर ब्लॉक में बंद गार्ड माधन लगातार सीटी बजाकर मदद मांग रहे थे। उन्होंने ब्लॉक में मौजूद अन्य कैदियों से भी अलार्म बजाने और सुरक्षाकर्मियों को सहायता देने की अपील की। हालांकि, जेल विभाग के एक सूत्र के अनुसार, बाकी कैदियों ने सुरक्षाकर्मियों की मदद नहीं की।
अचानक पुलिस वैन देखकर घबराए फरार कैदी
जेल से भागने की घटना के दौरान एक ऐसा संयोग हुआ, जिससे कैदियों में अफरातफरी मच गई। जब फरार कैदी मुख्य निकास द्वार के पास पहुंचे, उसी समय एक पुलिस वैन दूसरे विचाराधीन कैदी को लेकर जेल परिसर में पहुंची। पुलिस वैन देखकर भाग रहे कैदियों को लगा कि उन्हें पकड़ने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल आ गया है। इस डर से सभी कैदी घबरा गए और तीन अलग-अलग दिशाओं में भाग निकले। इस तरह 17 विचाराधीन कैदी जेल से फरार होने में सफल हो गए।
तीन सुरक्षा घेरे पार कर गए कैदी, नहीं बजा जेल का सायरन
इस जेलब्रेक की सबसे गंभीर बात यह रही कि कैदियों ने जेल की तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था को पार कर लिया, लेकिन केंद्रीय अलार्म सिस्टम सक्रिय नहीं हुआ। जेल परिसर में लगा सेंट्रलाइज्ड सायरन सिस्टम घटना के दौरान काम नहीं कर पाया। सुरक्षा व्यवस्था की इस विफलता ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों ने सायरन सिस्टम के काम नहीं करने के कारणों की जांच शुरू कर दी है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि कैदियों को जेल के अंदर से किसी व्यक्ति की मदद तो नहीं मिली थी।
जेलब्रेक मामले में नौ सुरक्षाकर्मी निलंबित
घटना के बाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने जेल सुरक्षा में लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए नौ कर्मचारियों को निलंबित कर दिया। निलंबित कर्मचारियों में दो हेड कांस्टेबल, एक ग्रेड-1 जेल गार्ड और छह ग्रेड-2 जेल गार्ड शामिल हैं।
प्रशासन यह जांच कर रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में कैदी जेल से भागने में कैसे सफल हुए और सुरक्षा व्यवस्था में कहां-कहां चूक हुई। अधिकारियों ने जेल के भीतर किसी कर्मचारी की संभावित मिलीभगत की आशंका से भी इनकार नहीं किया है।
हत्या और नशीले पदार्थों के मामलों में आरोपी हैं फरार कैदी
जेल से फरार हुए सभी 17 कैदी विचाराधीन थे। उनके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, मारपीट और नशीले पदार्थों से संबंधित मामलों में मुकदमे चल रहे थे। इनमें से पांच कैदी 24 वर्षीय आर. सिद्दीक की हत्या के मामले में आरोपी थे।
सिद्दीक की 28 जून को मदुरै जिले के विक्रमंगलम के पास धारदार हथियारों से हमला कर हत्या कर दी गई थी। पुलिस को आशंका थी कि यह हत्या पुरानी रंजिश का बदला लेने के लिए की गई थी। सिद्दीक स्वयं भी हत्या के एक मामले में आरोपी था और घटना के समय जमानत पर बाहर था। ऐसे गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़े आरोपियों के जेल से फरार होने के कारण पुलिस की चिंता बढ़ गई है।
फरार कैदियों की तलाश में पुलिस की टीमें तैनात
घटना के बाद पुलिस ने फरार कैदियों की तलाश तेज कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, कैदियों के घरों और संभावित ठिकानों पर निगरानी रखने के लिए विशेष पुलिस टीमें तैनात की गई हैं।
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कैदी जेल से भागने के बाद कहां गए और क्या उन्हें बाहर से किसी प्रकार की सहायता मिली। साथ ही जेल की सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों की ड्यूटी और खराब अलार्म सिस्टम की भी जांच की जा रही है।
थेनी जेलब्रेक ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए बड़े सवाल
तमिलनाडु के थेनी उप-जेल से 17 कैदियों का फरार होना जेल सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर कमियों की ओर इशारा करता है। क्षमता से अधिक कैदियों को रखना, घटना के समय सीमित सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी, मेडिकल इमरजेंसी के बहाने सुरक्षा घेरे को खुलवाना और केंद्रीय अलार्म सिस्टम का काम नहीं करना इस घटना के प्रमुख पहलू रहे। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि जेलब्रेक पूरी तरह कैदियों की योजना का परिणाम था या इसके पीछे किसी अंदरूनी व्यक्ति की भी भूमिका थी।
फिलहाल नौ कर्मचारियों के निलंबन के बाद प्रशासन की प्राथमिकता फरार कैदियों को पकड़ना और जेल की सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक का पता लगाना है।
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