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भारत के ग्रीन एनर्जी सेक्टर में ₹20 लाख करोड़ से अधिक निवेश के अवसर, पीएम मोदी ने वैश्विक निवेशकों को दिया बड़ा संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक निवेशकों से भारत के ग्रीन एनर्जी सेक्टर में निवेश की अपील की। ₹20 लाख करोड़ के अवसर, 500 GW लक्ष्य और ग्रीन हाइड्रोजन पर जोर।

भारत के ग्रीन एनर्जी सेक्टर में ₹20 लाख करोड़ से अधिक निवेश के अवसर, पीएम मोदी ने वैश्विक निवेशकों को दिया बड़ा संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के लिए वैश्विक निवेशकों को बड़ा आमंत्रण दिया है। सोमवार, 2 नवंबर 2026 को आयोजित ‘भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 2026’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में राजनीतिक और नीतिगत स्थिरता के कारण निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। उन्होंने कहा कि इस दशक के अंत तक देश के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के अवसर पैदा होंगे। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि भारत 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत क्षमता के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

ग्रीन एनर्जी में भारत बनेगा वैश्विक निवेश का बड़ा केंद्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन में दुनिया भर के निवेशकों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास और निवेश का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है। सरकार सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण और बिजली पारेषण से जुड़े बुनियादी ढांचे के विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में राजनीतिक स्थिरता और नीतियों की निरंतरता निवेशकों को दीर्घकालिक अवसर प्रदान करती है। उन्होंने वैश्विक कंपनियों से भारत की स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन यात्रा में भागीदार बनने का आह्वान किया।

उन्होंने बताया कि दशक के अंत तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के अवसर तैयार होने की संभावना है। इससे ऊर्जा क्षेत्र में नई परियोजनाओं, आधुनिक तकनीक, विनिर्माण और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है।

2030 तक 500 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। देश 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता हासिल करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने इस लक्ष्य को चुनौतीपूर्ण बताते हुए कहा कि इसे हासिल करना भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक भविष्य के लिए आवश्यक है।

प्रधानमंत्री ने अगले 10 से 11 वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के बड़े विस्तार की भी बात कही। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले एक दशक में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है और अब इस विकास को नई गति देने की जरूरत है।

पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में पश्चिम एशिया में जारी संकट और उसके वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े प्रभाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव के कारण दुनिया के कई देशों को ऊर्जा आपूर्ति संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इसके बावजूद भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है।

प्रधानमंत्री के अनुसार, पिछले दस वर्षों में देश ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के विकास में जो निवेश किया है, उससे ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि यदि भारत ने स्वच्छ ऊर्जा क्षमता का विस्तार नहीं किया होता, तो वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान देश को अधिक गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य में ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए स्वदेशी स्वच्छ ऊर्जा संसाधनों का विकास जरूरी है।

सरकारी भवनों से लेकर स्कूल-अस्पताल तक सौर ऊर्जा का विस्तार

प्रधानमंत्री मोदी ने देशभर में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी भवनों, स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को अधिक से अधिक सौर ऊर्जा से जोड़ा जाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि देश में 44,000 से अधिक सरकारी भवनों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जा चुका है। इससे सालाना लगभग 700 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सौर ऊर्जा का विस्तार केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए ही नहीं, बल्कि सरकारी खर्च कम करने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने सड़कों पर प्रकाश व्यवस्था और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं में भी सौर ऊर्जा के व्यापक इस्तेमाल की जरूरत बताई।

बैटरी स्टोरेज और स्वदेशी तकनीक पर विशेष जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के साथ ऊर्जा भंडारण क्षमता बढ़ाने को भी आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन मौसम तथा प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। ऐसे में ऊर्जा भंडारण प्रणालियों का विकास बिजली आपूर्ति को स्थिर और विश्वसनीय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

प्रधानमंत्री ने स्वदेशी बैटरी भंडारण तकनीक विकसित करने और देश में ऊर्जा भंडारण की नई क्षमताएं तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए केवल बिजली उत्पादन ही नहीं, बल्कि ऊर्जा भंडारण और उससे जुड़ी तकनीकों में भी अपनी क्षमता बढ़ानी होगी।

ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में बड़ी छलांग की तैयारी

प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है। भारत ने वर्ष 2030 तक सालाना 50 लाख टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। हरित हाइड्रोजन का इस्तेमाल इस्पात, उर्वरक, रिफाइनरी और भारी परिवहन जैसे क्षेत्रों में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हरित हाइड्रोजन के विकास से भारत के औद्योगिक क्षेत्र को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने में मदद मिलेगी और भविष्य में नए निवेश तथा निर्यात के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के दूसरे चरण पर बड़ा निवेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरित ऊर्जा गलियारे (Green Energy Corridor) के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं से उत्पादित बिजली को देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने के लिए आधुनिक पारेषण नेटवर्क का विकास जरूरी है।

उपलब्ध विवरण के अनुसार, प्रधानमंत्री ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के दूसरे चरण के लिए दो लाख करोड़ रुपये के प्रावधान का उल्लेख किया। इस परियोजना का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन वाले क्षेत्रों को बिजली की अधिक मांग वाले राज्यों और औद्योगिक केंद्रों से जोड़ना है। इससे भविष्य में विकसित होने वाली सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं की बिजली को राष्ट्रीय ग्रिड तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी।

सौर और नवीकरणीय ऊर्जा में दुनिया के शीर्ष देशों में भारत

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत सौर और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल है। उन्होंने देश में पिछले एक दशक के दौरान स्वच्छ ऊर्जा क्षमता के विस्तार को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की ऊर्जा परिवर्तन यात्रा केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा के विकास में भी योगदान दे रही है।

भारत में सौर पैनल विनिर्माण, पवन ऊर्जा परियोजनाओं, बैटरी भंडारण और हरित हाइड्रोजन जैसी तकनीकों के विस्तार से आने वाले वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा का भविष्य स्वच्छ ऊर्जा में: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि भारत की भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा स्वच्छ, सस्ती और टिकाऊ ऊर्जा प्रणालियों के विकास पर निर्भर करेगी। उन्होंने वैश्विक निवेशकों, उद्योग जगत और तकनीकी कंपनियों से भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के साथ आर्थिक विकास को नई गति देना है। नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं, ऊर्जा भंडारण तकनीकों, हरित हाइड्रोजन और आधुनिक बिजली पारेषण व्यवस्था के विस्तार से भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक ग्रीन एनर्जी अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

 

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