कांग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा पर किए गए कथित पासपोर्ट संबंधी आरोपों का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।
गुरुवार को खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान उन्होंने अदालत में कहा कि उन्हें गिरफ्तार कर अपमानित करने की जरूरत नहीं थी। उन्होंने दलील दी कि अगर अग्रिम जमानत नहीं मिली तो गिरफ्तारी-पूर्व जमानत का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि असम CM की पत्नी के पास तीन पासपोर्ट हैं—भारत, UAE और मिस्र के। इसके अलावा उन्होंने दुबई में संपत्ति और अमेरिका के व्योमिंग में कंपनी होने का भी दावा किया था।
इन आरोपों के बाद रिंकी भुइयां सरमा ने गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में खेड़ा के खिलाफ मामला दर्ज कराया।
कोर्ट में क्या हुई बहस
इस मामले की सुनवाई जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल चांदुरकर की बेंच ने की। खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा।
सिंघवी ने दलील दी कि यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा है और गिरफ्तारी की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि खेड़ा जांच में सहयोग करने को तैयार हैं और उनके भागने की कोई आशंका नहीं है।
फैसला सुरक्षित
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले में अंतिम निर्णय बाद में सुनाया जाएगा।
राजनीतिक तकरार तेज
इस विवाद के बाद राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। एक तरफ कांग्रेस इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला बता रही है, वहीं दूसरी ओर इसे मानहानि और गलत आरोपों से जुड़ा मामला बताया जा रहा है।
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