गुजरात के स्थानीय निकाय चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एकतरफा जीत हासिल करते हुए राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। राज्य की 15 महानगरपालिकाओं में हुए चुनाव में BJP ने न सिर्फ बहुमत बल्कि कई जगहों पर भारी अंतर से जीत दर्ज की है।
चुनाव परिणामों के बाद स्थिति यह बन गई है कि 15 में से 10 नगर निगमों में विपक्ष का आधिकारिक दर्जा ही नहीं रहेगा, क्योंकि विपक्ष के लिए जरूरी 10% सीटें भी नहीं मिल सकीं।
विपक्ष के लिए 10% सीट जरूरी
नगर निगमों के नियमों के अनुसार, किसी भी पार्टी को विपक्ष का दर्जा पाने के लिए कुल सीटों का कम से कम 10% हासिल करना होता है।
इस मानक को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Congress) केवल 5 नगर निगमों में ही पूरा कर पाई है।
इन 5 नगर निगमों में कांग्रेस को मिला 10% से ज्यादा वोट
- अहमदाबाद: 192 में से 32 सीट
- आनंद: 52 में से 8 सीट
- भावनगर: 52 में से 8 सीट
- गांधीधाम: 52 में से 11 सीट
- वापी: 52 में से 11 सीट
इन सभी नगर निगमों में BJP ने भी भारी बहुमत से जीत दर्ज की है।
10 नगर निगमों में कांग्रेस का खराब प्रदर्शन
सूरत, वडोदरा, राजकोट, नडियाद, सुरेंद्रनगर, पोरबंदर, मोरबी, नवसारी, मेहसाणा और जामनगर में कांग्रेस 10% सीटें भी हासिल नहीं कर सकी।
- मोरबी और पोरबंदर में कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला
- सूरत, सुरेंद्रनगर और नडियाद में केवल 1-1 सीट
- नवसारी और जामनगर में 2-2 सीट
राजकोट और मेहसाणा में भी कांग्रेस विपक्ष का दर्जा पाने से मामूली अंतर से चूक गई।
AAP का प्रदर्शन भी फीका
आम आदमी पार्टी (AAP) का प्रदर्शन भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।
- सूरत में 4 सीट
- जामनगर में 2 सीट
इन सीटों को कांग्रेस के साथ जोड़ने के बाद भी कई जगह विपक्ष के लिए जरूरी 10% आंकड़ा पूरा नहीं हो पा रहा है।
नियमों में लचीलापन संभव
हालांकि, कुछ मामलों में सत्तारूढ़ दल नियमों में लचीलापन दिखाते हुए विपक्ष को दर्जा दे सकता है। पहले भी ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जब कम सीट होने के बावजूद विपक्ष को मान्यता दी गई है।
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