सुप्रीम कोर्ट ने देश में बढ़ती नशे की समस्या, खासकर पंजाब में ड्रग तस्करी और नशाखोरी को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। शुक्रवार (9 मई 2026) को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने राज्य सरकार और पुलिस व्यवस्था की कार्यशैली पर कड़ी टिप्पणी की।
“पंजाब में हालात बेहद खराब” – सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि पंजाब में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और अब यह समस्या सार्वजनिक रूप से सामने आ रही है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक 60 वर्षीय महिला अपने पाँच बेटों को नशे की वजह से खो चुकी है।
कोर्ट ने सवाल उठाया कि आखिर सरकार इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठा रही।
केंद्रीय निगरानी तंत्र की जरूरत पर जोर
जस्टिस सूर्यकांत ने सुझाव दिया कि देशभर में ड्रग्स से जुड़े मामलों की निगरानी के लिए एक केंद्रीय एजेंसी या समन्वित तंत्र बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी एक राज्य में बड़ा ड्रग सप्लायर सक्रिय है, तो उसकी जानकारी तुरंत अन्य राज्यों के साथ साझा होनी चाहिए, ताकि संगठित गिरोहों और ड्रग माफिया पर प्रभावी कार्रवाई हो सके।
पुलिस पर भी उठाए सवाल
CJI ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई बार छोटे स्तर के आरोपितों को पकड़कर प्रचार किया जाता है, जबकि बड़े तस्कर बच निकलते हैं।
उन्होंने कहा, “पुलिस को पब्लिसिटी पाने की ज्यादा चाहत होती है। छोटे मामलों को बड़ा बनाकर पेश किया जाता है, जबकि असली नेटवर्क तक पहुँचना जरूरी है।”
NDPS और UAPA मामलों की सुनवाई में देरी पर चिंता
यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें NDPS Act और UAPA के तहत लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष अदालतों की स्थापना की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने लंबित मामलों की बड़ी संख्या पर भी चिंता जताई और कहा कि न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने की आवश्यकता है।
न्यायपालिका का सहयोग का भरोसा
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए न्यायपालिका, सरकार और एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा।
CJI ने भरोसा दिलाया कि सभी हाई कोर्ट्स को आवश्यक सहयोग देने के निर्देश दिए जाएंगे ताकि ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई को प्रभावी बनाया जा सके।
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